Prime minister @इनफिनिटी फोरम का उद्घाटन: Prime Minister Narendra Modi ने इनफिनिटी फोरम का उद्घाटन कर कहा देश में ATM निकासी से ज्यादा मोबाइल से हुआ भुगतान

मुद्रा का इतिहास बताता है कि इस क्षेत्र में जबरदस्त क्रमिक विकास हुआ है। भारत में पिछले वर्ष पहली बार मोबाइल द्वारा भुगतान ने एटीएम नकद निकासी को पीछे छोड़ दिया।

Prime Minister Narendra Modi ने इनफिनिटी फोरम का उद्घाटन कर कहा देश में ATM निकासी से ज्यादा मोबाइल से हुआ भुगतान

नई दिल्ली, एजेंसी। Infinity Forum
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये फिन-टेक पर एक विचारशील नेतृत्वकारी मंच इनफिनिटी फोरम का उद्घाटन किया। इसक बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि मुद्रा का इतिहास बताता है कि इस क्षेत्र में जबरदस्त क्रमिक विकास हुआ है। भारत में पिछले वर्ष पहली बार मोबाइल द्वारा भुगतान ने एटीएम नकद निकासी को पीछे छोड़ दिया। पूर्ण रूपेण डिजिटल बैंक बिना किसी इमारती बैंक शाखा के, अब एक वास्तविकता हैं और एक दशक से भी कम समय ये बहुत आम हो जाएंगे। उन्होंने कहा, “जैसे मानव का क्रमिक विकास हुआ है, उसी तरह हमारे लेन-देन के स्वरूप का भी विकास हुआ है। चीजों की अदला-बदली से लेकर धातु तक, फिर सिक्कों से नोटों तक, फिर चेक से कार्ड तक होते हुये आज हम यहां पहुंच चुके हैं।”


भारत ने दुनिया को किया साबित
PM ने हवाला दिया कि भारत ने दुनिया को साबित कर दिया है कि जब प्रौद्योगिकी को अपनाने या उसके मद्देनजर नवाचार की बात आती है, तो भारत किसी से कम नहीं है। डिजिटल इंडिया के तहत परिवर्तनशील पहलों ने शासन में लागू करने के लिए अभिनव फिन-टेक समाधानों के लिये द्वार खोल दिये हैं।

अब वक्त आ गया है कि इन फिन-टेक पहलों को फिन-टेक क्रांति में बदल दिया जाये। उन्होंने कहा, “ऐसी क्रांति जो देश के प्रत्येक नागरिक के वित्तीय अधिकारिता को प्राप्त करने में मददगार हो।”
430 मिलियन जन धन खाते
प्रौद्योगिकी ने कैसे वित्तीय समावेश को गति दी है, इसके बारे में बताते हुए मोदी ने कहा कि 2014 में 50 प्रतिशत से कम भारतीयों के पास बैंक खाते थे, लेकिन बैंक खातों को सर्वसुलभ बना दिया गया।  पिछले सात वर्षों में 430 मिलियन जन धन खाते खुल गए। उन्होंने तमाम पहलों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले वर्ष 690 मिलियन रूपे कार्डों द्वारा 1.3 अरब लेन-देन हुये, यूपीआई ने पिछले माह ही लगभग 4.2 अरब लेन-देन को संसाधित किया।

इसके साथ ही आज हर महीने लगभग 300 मिलियन बिलों को जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। महामारी के बावजूद लगभग 1.5 मिलियन रेलवे टिकट हर दिन ऑनलाइन बुक किए जाते हैं। पिछले वर्ष फास्टैग ने 1.3 अरब निर्बाध लेन-देन किया, प्रधानमंत्री स्वनिधि की बदौलत देशभर में छोटे विक्रेताओं के लिये कर्ज सुगम हुआ। ई-रूपी के आधार पर बिना किसी खामी के विशिष्ट सेवाओं की लक्षित आपूर्ति की गई।

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