शिक्षा में लैंगिक समानता: जामिया, बीएचयू व जादवपुर जैसे विश्वविद्यालय शिक्षा की पहुंच में जेंडर प्रभावों का कर रहे हैं अध्ययन

इलमें एनसीईआरटी के निदेशक डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी भी शामिल हुए। नजमा अख्तर ने कहा, अनुसंधान प्रसार कार्यशाला के उद्देश्यों में पेशेवर एसोसिएशंस के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान की सुविधा शामिल है ताकि परिणामों का व्यापक समुदाय के लाभ के लिए उपयोग किया जा सके।

जामिया, बीएचयू व जादवपुर जैसे विश्वविद्यालय शिक्षा की पहुंच में जेंडर प्रभावों का कर रहे हैं अध्ययन
शिक्षा में लैंगिक समानता

नई दिल्ली | बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता व राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए) जैसे नामी विश्वविद्यालय, कोविड-19 के दौरान शिक्षा व टेक्नॉलोजी की पहुंच पर जेंडर संबंधी प्रभावों की जानकारी हासिल कर रहे हैं। इसे इंग्लैंड की ऑक्सफोर्ड द्वारा शुरू किया गया है।

सभी सहयोगी संस्थानों ने अपने चुने हुए क्षेत्रों में पायलट आधार पर एक अध्ययन किया, जिसका उद्देश्य तेजी से बदलते समय के बीच, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी की पृष्ठभूमि में, 21वीं सदी के कौशल, शिक्षा में लैंगिक समानता और प्रौद्योगिकी तक पहुंच के अनुरूप भविष्य की नई शुरूआत के लिए एक उपकरण के रूप में डिजिटल लनिर्ंग पर विमर्श करना है।

जामिया ने दो स्थानों पर शफीक मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, बाड़ा हिंदू राव, सदर बाजार, वाल्ड सिटी क्षेत्र दिल्ली और जामिया के स्कूलों में अध्ययन किया है।

जामिया की कुलपति प्रो नजमा अख्तर ने कहा कि यह अध्ययन जामिया स्कूलों और शफीक मेमोरियल स्कूल पर किया गया था, जहां छात्रों की एक बड़ी संख्या, मुख्य रूप से मुस्लिम, शहरी गरीब तबके से आती है। मुस्लिम पुरुष और महिला साक्षरता कौशल में लैंगिक असमानता तेजी से महसूस की जाती है। यह नुकसान इस समूह को हाशिए पर रखता है, इसलिए, यह भेदभाव के प्रति संवेदनशील है।

जामिया और उसके सहयोगियों ने इस उम्मीद के साथ परियोजना पर सहयोग किया है कि यह सभी के लिए प्रौद्योगिकी तक स्थायी पहुंच में सुधार करने के तरीके पर नई सहमति बनाएगा। इसका उद्देश्य सामूहिक कार्रवाई के लिए विशिष्ट और प्रत्येक क्षेत्रीय व स्थानीय आवश्यकता के अनुरूप एक मंच पर एक साथ आना है।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने इसके लिए जेएनयू कैंपस में जेंडर्ड इम्पेक्ट्स ऑन एक्सेस टू एजुकेशन एंड टेक्नॉलोजी ड्यूरिंग कोविड-19 पर शोध प्रसार कार्यशाला की मेजबानी की। यह कार्यशाला इन चार सहयोगी संस्थानों की एक सहयोगी परियोजना का हिस्सा थी और इसे एंजेला रस्किन विश्वविद्यालय (एआरयू), ऑक्सफोर्ड, यूके द्वारा शुरू और प्रायोजित किया गया था।

इलमें एनसीईआरटी के निदेशक डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी भी शामिल हुए। नजमा अख्तर ने कहा, अनुसंधान प्रसार कार्यशाला के उद्देश्यों में पेशेवर एसोसिएशंस के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान की सुविधा शामिल है ताकि परिणामों का व्यापक समुदाय के लाभ के लिए उपयोग किया जा सके। उनका उद्देश्य परियोजना के निष्कर्षों को साझा करना और विभिन्न समुदायों के बीच शिक्षा और प्रौद्योगिकी तक पहुंच पर कोविड -19 के जेंडर संबंधी प्रभावों को दूर करने के लिए जागरूकता और कार्य योजना बनाना है।

प्रतिभागियों ने सहमति व्यक्त की कि उन्हें क्षेत्र में मौजूदा ट्रेंड से सीखना है, उन्हें अपनाना है, और प्रौद्योगिकी को अनुकूलित करना है। उन्हें प्रौद्योगिकी के प्रयोग और प्रयोग से डरना नहीं चाहिए क्योंकि उन्हें अनिश्चितता के बावजूद आगे आने वाली असीमित संभावनाओं का पता लगाना है।

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