सिरोही का वॉल पेंटिंग घोटाला: सिरोही जिले में वॉल पेंटिंग घोटाले की जांच जिला परिषद के अधिशाषी अभियंता को,घोटाले में आरोप जिला परिषद सीईओ,पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों पर, जांच की निष्पक्षता पर उठे सवाल

स्वच्छ भारत मिशन के तहत वॉल पेंंटिंग में लाखों रुपए का घोटाला, अनियमितताओं पर जांच करने के लिए मिशन निदेशक ने दिए ​निर्देश तो खानापूर्ति के लिए जिले के आला अधिकारियों ने अधिशाषी अभियंता को कर दिया जांच अधिकारी नियुक्त, 10 माह बाद भी नहीं आई जांच, अधिनस्थ अधिकारी कैसे करेगा आला अधिकारियों की जांच।

सिरोही जिले में वॉल पेंटिंग घोटाले की जांच जिला परिषद के अधिशाषी अभियंता को,घोटाले में आरोप जिला परिषद सीईओ,पंचायत समितियों के विकास अधिकारियों पर, जांच की निष्पक्षता पर उठे सवाल

सिरोही। 
Sirohi जिला परिषद में वॉल पेंटिंग घोटाले की जांच अब सवालों के घेरे आ गई है। जिले की पांचों पंचायत समितियों में वॉल पेंटिंग के नाम पर लाखों रुपए का घोटाला होने के बाद भी  सिरोही जिला प्रशासन आंख बंद कर के बैठा है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि लाखों का घोटाला उजागर होने के बाद जिला परिषद की ओर से खानापूर्ति करते हुए जांच के आदेश जारी किए गए। इसमें जांच एक अधिनस्थ अधिकारी को सौंपी गई, जबकि घोटाले में सीधे तौर पर सिरोही जिला प्रशासन के आला अधिकारी शामिल है। ऐसे में सवाल उठ रहे है कि एक अधिनस्थ अधिकारी अपने ही विभाग के आला अधिकारियों के खिलाफ जांच कैसे करेगा। इसके साथ ही जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे है। बहरहाल जांच के आदेशों के 10 माह बाद भी ​फिलहाल जांच नहीं हो पाई। आप को बता दें कि सिरोही जिले में स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत 13 लाख रुपए की वॉल पेंटिंग का कार्य करवाया जाना था,लेकिन जिला परिषद की ओर से बिना टेंडर, बिना कोटेशन इस कार्य को करवाया गया और 13 लाख की जगह 56 लाख रुपए का भुगतान ठेकेदार को कर दिया गया। इस वित्तीय अनियमितता पर स्वच्छ भारत मिशन निदेशक ने सितंबर 2020 में जांच के आदेश दिए थे जो आज तक पूरी नहीं हुई। 

यू समझे अधिनस्थ की जांच और घोटाला
सिरोही जिले में स्वच्छ भारत मिशन के तहत वॉल पेंटिग के नाम पर हुई अनियमितताओं के उजागर होने के बाद जब 10 माह पहले स्वच्छ भारत मिशन के निदेशक ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए तो जिला कमेटी द्वारा जांच शुरू करवाई गई। पर जिन अधिकारियों के विरुद्ध ये जांच की जानी हैं उसके लिए उन अधिकारियों के एक अधीनस्थ अधिकारी को ये पूरी जांच सौंपी गई। इस पूरे घोटाले की जांच जिला परिषद के अधिशाषी अभियंता को सौंपी गई जो इस मामले की जांच कर रहे हैं। जबकि इस घोटाले में विकास अधिकारी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी पर आरोप लगाए जा रहे है। ऐसे में एक अधीनस्थ अधिकारी अपने उच्च अधिकारी के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कैसे कर सकता हैं? ये बड़ा सवाल हैं 

सिरोही जिला परिषद:— सीईओ, भागीरथ बिश्नोई
इस पूरे मामले में जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नज़र आ रही हैं, उसमें सबसे बड़ा नाम जिले के जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भागीरथ बिश्नोई का है। 
सीईओ की घोटाले में भूमिका
वॉल पेंटिंग के इस कार्य को बिना टेंडर करवाने के साथ—साथ बिना तकनीकी स्वीकृति और बिना वित्तीय स्वीकृति के इस कार्य को करवाया गया। इसका भुगतान भी सम्बन्धित विकास अधिकारियों ने ठेकेदार को कर दिया। इसकी स्वीकृति जिला परिषद के सीईओ द्वारा जारी की गई। तो यहां सीईओ की भूमिका पर सवाल उठ रहे है।


पंचायत समितियों के विकास अधिकारी
1- पंचायत समिति सिरोही 
2- पंचायत समिति पिंडवाड़ा 
3- पंचायत समिति आबूरोड़ 
4- पंचायत समिति रेवदर  
5- पंचायत समिति शिवगंज 

घोटाले में भूमिका 
सिरोही जिले की पांचों पंचायत समितियों के इन पांच विकास अधिकारियों पर सीधे—सीधे आरोप लगाए गए है। बताया जा रहा है कि ठेकेदार से मिलीभगत कर इन पांचों विकास अधिकारियों ने लाखों रुपए के घोटाला किया है। इन पांचों विकास अधिकारियों ने ही ठेकेदार को भुगतान किया है।


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दोषी के खिलाफ होगी कार्रवाई 
मामला संज्ञान में आने के बाद जांच करवाई जा रही हैं।  जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
◆ भगवती प्रसाद कलाल, जिला कलेक्टर, सिरोही

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