विधानसभा में माही के पानी पर चर्चा: ...तो मिल सकता है सिरोही, पाली और जालौर को माही का पानी

भविष्य में अगर संभाव्यता हुई तो सिरोही, जालौर और पाली जिलों में माही के पानी को वितरित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1966 में राजस्थान और गुजरात के सिंचाई मंत्रियों के बीच 40ः9 के अनुपात में जल बंटवारे का समझौता हुआ था।

...तो मिल सकता है सिरोही, पाली और जालौर को माही का पानी

जयपुर। 
जल संसाधन मंत्री डॉ. बी.डी.कल्ला ने शुक्रवार को विधानसभा में बताया कि भविष्य में अगर संभाव्यता हुई तो सिरोही, जालौर और पाली जिलों में माही के पानी को वितरित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1966 में राजस्थान और गुजरात के सिंचाई मंत्रियों के बीच 40ः9 के अनुपात में जल बंटवारे का समझौता हुआ था।

वर्तमान में राजस्थान को 16 टीएमसी पानी मिल रहा है। जल संसाधन मंत्री ने प्रश्नकाल में विधायक पूराराम चौधरी के पूरक प्रश्न के उत्तर में बताया कि दोनों राज्यों के बीच हुए समझौते में ये उल्लेख नहीं किया गया था कि राजस्थान को मिलने वाले पानी का वितरण कहां-कहां किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य को अबतक अतिरिक्त पानी भी नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि संभाव्यता पाए जाने पर इस पानी को वितरण करने के क्षेत्रों पर विचार किया जा सकता है। इससे पहले, विधायक चौधरी के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में जल संसाधन मंत्री ने बताया कि माही के जल को बाड़मेर और जालौर जिलों में उपयोग किए जाने के लिए अक्टूबर, 2013 में राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण द्वारा माही-लूणी अंतः राज्यीय लिंक परियोजना का पूर्व संभाव्यता प्रतिवेदन तैयार किया गया था। इसके अनुसार ये प्रस्ताव आर्थिक एवं तकनीकी रूप से फिजीबल नहीं पाया गया। इसलिए वर्तमान में इस संबंध में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1966 में गुजरात और राजस्थान राज्य के बीच माही जल बंटवारे के निष्पादित अनुबंध में सिरोही, जालौर और पाली जिलों में पानी दिए जाने का उल्लेख नहीं किया गया था।