नदी में कोरोना वायरस की पुष्टि: अब पानी में फैला कोरोना वायरस, आईआईटी गांधीनगर सहित देश की 8 संस्थाओं ने किया शोध, जलस्रोत साबरमती नदी में मिला वायरस

कोरोना वायरस लगातार फैल रहा है। समय के साथ साथ इसके वैरिएंट भी बदल रहे है। अब जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इसके तहत अब पानी में भी कोरोना वायरस की पुष्टि हो गई। अब तक जहां देश के कई शहरों की सीवरेज लाइनों में कोरोना वायरस मिलने की पुष्टि हो चुकी है।

अब पानी में फैला कोरोना वायरस, आईआईटी गांधीनगर सहित देश की 8 संस्थाओं ने किया शोध, जलस्रोत साबरमती नदी में मिला वायरस

नई दिल्ली।
कोरोना वायरस (Corona virus) लगातार फैल रहा है। समय के साथ साथ इसके वैरिएंट भी बदल रहे है। अब जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इसके तहत अब पानी में भी कोरोना वायरस की पुष्टि हो गई। अब तक जहां देश के कई शहरों की सीवरेज लाइनों में कोरोना वायरस मिलने की पुष्टि हो चुकी है। वहीं अब सीवरेज के जरिए तालाब और नदियों के पानी में भी कोरोना वायरस पहुंचने की पुष्टि हो गई है। जानकारी के मुताबिक अहमदाबाद के जलस्रोत साबरमती नदी (Sabarmati river ), कांकरिया (Kankaria) और चंदोला तालाब (Chandola ponds) में कोरोना वायरस पाया गया है। पिछले चार महीनों में तीनों स्रोतों के 16 सैंपल लिए गए, इनमें से 5 सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं।

आईआईटी गांधीनगर (IIT Gandhinagar) समेत देश की 8 संस्थाओं ने मिलकर यह शोध किया है। इसमें दिल्ली के जेएनयू स्कूल ऑफ एन्वॉयरनमेंटल साइंसेज (JNU School of Environmental Sciences) के रिसर्चर भी शामिल हैं। असम के गुवाहाटी क्षेत्र में भारू नदी से लिया गया एक सैंपल भी पॉजिटिव पाया गया है। सीवरेज के सैंपल लेकर की गई जांच के दौरान नदी-तालाबों तक कोरोना वायरस पहुंचने की जानकारी मिली है। कई सीवरेज के सैंपल पॉजिटिव आने के बाद रिसर्चर ने साफ पानी के जलस्रोतों के रिसर्च की दिशा में काम शुरू किया था। अहमदाबाद में सबसे ज्यादा वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट हैं और गुवाहाटी (Guwahati)में एक भी नहीं है। इसी के चलते रिसर्च के लिए इन दोनों शहरों को चुना गया था। अहमदाबाद में साबरमती नदी पर बना रिवरफ्रंट गुजरात की शान माना जाता है। रिवरफ्रंट को लेकर यह भी दावे किए जाते हैं कि इसकी वजह से नदी का पानी प्रदूषित होने से बचाया जा सकता है। जबकि, रिसर्च में पता चला कि नदी बहुत अधिक प्रदूषित है। इसके कई सैंपल की जांच में पता चला कि नदी का पानी पीने लायक ही नहीं है। इसमें नरोडा, ओढव, वटवा और नारोल इलाके के उद्योगों का प्रदूषित कचरा (एफ्ल्यूएंट) और शहर के सीवेज का पानी मिल जाता है। इसी के चलते शहर के बीच से बहने के बाद भी अहमदाबाद के लोगों को नर्मदा के पानी पर ही निर्भर रहना पड़ता है। यही हाल शहर के कांकरिया और चंडोला तालाब का भी है।

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