राज्य सरकार आत्ममुग्ध: कर्मचारियों ने सरकार के तीन वर्ष खुद के लिए बताए दुर्भाग्यपूर्ण

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने सरकार के तीन वर्षों को राज्य कर्मचारियों के लिहाज से शोषण, प्रताडना, जेबतराशी, जबरन वसूली व दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुये चिंता जाहिर की है।

कर्मचारियों ने सरकार के तीन वर्ष खुद के लिए बताए दुर्भाग्यपूर्ण

जयपुर। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने सरकार के तीन वर्षों को राज्य कर्मचारियों के लिहाज से शोषण, प्रताडना, जेबतराशी, जबरन वसूली व दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुये चिंता जाहिर की है। महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य में राज्य सरकार के गठन की तीसरी वर्षगांठ का शाही अन्दाज में जश्न मनाया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा करोडो रूपये विज्ञापनों पर खर्च किये जा रहे है। सरकारी विज्ञापनों में इस प्रकार दर्शाया जा रहा है जैसे प्रदेश विकास के कीर्तिमान बना चुका है एवं रामराज्य की स्थापना हो गई है परन्तु राज्य सरकार के अधीन कार्यरत राज्य कर्मचारी, सार्वजनिक उपक्रमों एवं अस्थायी आधार पर कार्यरत कर्मचारी जिनके अथक परिश्रम एवं सम्पूर्ण क्षमताओं के उपयोग के बलबूते पर राज्य सरकार आत्ममुग्ध होकर अपनी पीठ-थपथपा रही है वहीं कर्मचारी वर्ग तीन वर्षों में सरकारी ठगी का शिकार बना हुआ है।

महासंघ का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा राज्य कर्मचारियों के वेतन से कोरोना के नाम पर जबरन वसूली की है। वित्त विभाग के अधिकारियों द्वारा नियमों की गलत व्याख्या करने से लाखों कर्मचारियों को लाखों रूपये की वसूली करवानी पडी है। विभिन्न प्रकार के आदेशों के कारण कर्मचारी बंधुआ मजदूरों जैसा अनुभव कर रहे है। राज्यकर्मियों को कमेटियों के नाम पर गुमराह किया जा रहा है।

महासंघ के प्रदेश महामंत्री तेजसिंह राठौड ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार राज्यकर्मियों के साथ स्वतंत्र भारत में द्वितीय श्रेणी के नागरिकों जैसा व्यवहार कर रही है। राज्य सरकार के मुखिया अशोक गहलोत ने सरकार के गठन से पूर्व सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि यदि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो कर्मचारियों को आंदोलन की जरूरत नहीं पडेगी व सरकार कर्मचारियों के आर्थिक व अन्य मसलों का स्वंय हल निकालेगी, पर स्वतंत्रता के उपरान्त राज्यकर्मी वर्तमान में अपने आपको असहाय व प्रताडित महसूस कर रहे है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। राज्य सरकार ने अपने ही समझौते तोडे है। जिन राज्य कर्मचारियों की बैशाखी के सहारे बहुमत हासिल किया है उन्हें ही हाशिये पर खडा कर दिया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा कर्मचारियों को नजर अंदाज कर, संवाद कायम नही कर व उपेक्षापूर्ण व्यवहार कर प्रदेश के 8 लाख कर्मचारियों का अपमान किया है। राज्य कर्मचारी समय आने पर इस अपमान का माकूल जवाब देंगे।

महासंघ के संयुक्त महामंत्री अर्जुन शर्मा ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार की बदनियती, नौकरशाही की निरंकुशता व कर्मचारी वर्ग की उपेक्षा को राज्य कर्मचारी बर्दाश्त नहीं करेगा। राज्य के मुख्यमंत्री को स्मरण रहे कि वर्ष 1999-2000 की आम हडताल जैसे ही वर्तमान में हालात बनते जा रहे है। मुख्यमंत्री अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे है। गत तीन वर्षों में राज्य कर्मचारियों को तीन मिनट का समय भी नहीं दिया गया है, इसके परिणाम अच्छे नहीं होंगे। मुख्यमंत्री सरकार बचाने की उधेडबुन में लोकतांत्रिक परम्पराओं से विमुख हो गए है। नौकरशाह सरकार पर हावी है क्योंकि उन्होंने मुख्यमंत्री के निर्देशों की पालना करना बंद कर दिया है। राज्य सरकार की कर्मचारी विरोधी नीति का विरोध करने के लिए प्रदेश का कर्मचारी लामबंद हो गया है व महासंघ द्वारा संचालित राज्यव्यापी आंदोलन को परवान चढाने में सरकार की संवादहीनता आग में घी का काम करेगी। राज्य कर्मचारियों की जेबतराशी कर, बेरोजगार शिक्षित-प्रशिक्षित नव युवकों का शोषण कर कोई भी सरकार जश्न मनाने का अधिकार नहीं रखती है।

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