अनूठी मिसाल :: गुजरात से बारात लेकर सिरोही आए इस दूल्हे की लोग क्यों कर रहे हैं चर्चा, आप भी जानिए

दूल्हे के बड़े पिताजी महेंद्र सिंह परमार ने बताया कि विवाह में दुल्हन ही वास्तविक दहेज है और इस बात को चरितार्थ करने में पूरा परिवार और रिश्तेदार काफी खुश है समाज में इस प्रकार की पहल से राजस्थान के सिरोही जालौर और गुजरात के बनासकांठा क्षेत्र के राजपूत समाज में चर्चा का विषय बना है।

गुजरात से बारात लेकर सिरोही आए इस दूल्हे की लोग क्यों कर रहे हैं चर्चा, आप भी जानिए

सिरोही. जिले के मगरीवाड़ा में हुई एक शादी इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। बिना दहेज के हुई इस शादी की मिसाल दी जा रही हैं. दरअसल, इस शादी में दूल्हे ने दहेज में मिली राशि वापस लौटाकर समाज को दहेज न लेने व देने का संदेश दिया है। दूल्हे की इस पहले के बाद ना केवल वधु पक्ष की आंखों में पानी आ गया बल्कि वहां मौजूद हर शख्स ने कहा कि यदि आज का हर युवा ऐसा करे तो समाज दहेज मुक्त हो सकता है।

गुजरात से आई थी बारात
गुजरात के अभापुरा के रहने वाले जयसिंह पुत्र स्व. दिलीप सिंह परमार की शादी मगरीवाड़ा के रहने वाले उगमसिंह देवड़ा की बेटी जीनल कंवर से तय हुई। टीका दस्तूर के दौरान वधु पक्ष ने दूल्हे को 1.11 लाख रुपए दिए। इस पर दूल्हे और उनके बड़े पापा महेंद्रसिंह परमार ने दहेज की यह राशि लेने से इनकार कर दिया। दूल्हे ने यह राशि अपने माथे से लगाकर वापस की तो दुल्हन के पिता की आंखे भर आई। उन्होंने खूब आग्रह भी किया, लेकिन दूल्हे के बड़े पिता ने यही कहा कि हम बहू लेकर जा रहे हैं और उसे बेटी बनाकर रखेंगे। बहू बेटियां तो लक्ष्मी का रूप होती हैं तो फिर दहेज किस बात का। इसके बाद दूल्हे ने शगुन के नाम पर केवल  11 रुपए व नारियल ही लिया।

दुल्हन ही दहेज
दूल्हे के बड़े पिताजी महेंद्र सिंह परमार ने बताया कि विवाह में दुल्हन ही वास्तविक दहेज है. दहेज के दानव को समाज के सभी लोगों को आकर खत्म करना होगा. उन्होंने बताया कि समाज मेंं जागरूकता व शिक्षा के प्रसार से दहेज की प्रथा का अंत किया जा सकता है। वहीं शादी में उपस्थित अन्य लोगों ने भी दहेज प्रथा को मिटाने का संकल्प लिया

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