नेताजी की होटल ने ली पेड़ों की बलि ​: नेताजी की होटल के चलते तहसीलदार ने नियमों को ताक में रखकर हरे पेड़ों पर चलवा ​दी कुल्हाडी

नेताजी की होटल के चलते तहसीलदार ने नियमों को ताक में रखकर हरे पेड़ों पर चलवा ​दी कुल्हाडी

सिरोही। जब आप सत्तारूढ़ दल के नेता हैं तो प्रशासन आपके आगे नतमस्तक होना लाजमी हैं। पर नियम कायदों को ताक में रखकर भी कोई अधिकारी इन नेताओं को फायदा दे दे तो आप क्या कहेंगे? हम ये सवाल इसलिए पूछ रहे हैं कि सिरोही जिले के आबूरोड़ के तलहटी क्षेत्र में स्थित एक आलीशान होटल का सड़क से साफ दीदार नही हो रहा था, क्योंकि सड़क किनारे खड़े विशाल नीम के पेड़ इस होटल के दीदार में बाधा उत्पन्न कर रहे थे।

ये  होटल किसी आम आदमी की नही हैं। बल्कि ये होटल आबूरोड़ के एक बड़े नेताजी के पारिवारिक सदस्य की बताई जा रही हैं। होटल संचालक ने इन पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने के लिए आबूरोड़ तहसील कार्यालय में आवेदन किया। और तत्कालीन तहसीलदार ने इन पेड़ों को खतरनाक मानते हुए इनकी छंटाई के आदेश नेताजी के रिश्तेदार को हाथोहाथ दे दिए। जबकि ये पेड़ नेताजी के रिश्तेदार की सम्पत्ति में खड़े ही नही हैं। ये पेड़ सार्वजनिक विभाग के स्वामित्व वाले सड़क के किनारे खड़े हैं। यदि ये पेड़ किसी भी तरीके से खतरनाक भी साबित हो रहे थे तो उनकी कटाई छंगाई की जिम्मेदारी सार्वजनिक विभाग या वन विभाग की होती हैं, ना कि किसी व्यक्ति विशेष की। फिर भी आबूरोड़ के तत्कालीन तहसीलदार ने इन पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने की परमिशन एक होटल संचालक को दे दी, जो अपने अधिकारों के बेजा इस्तेमाल की श्रेणी में आता हैं। 

10 किलोमीटर के रास्ते मे सिर्फ 10 पेड़ ही दिखे खतरनाक

आबूरोड़ बस स्टैंड से लेकर आबूरोड़ तलहटी के बीच करीब 10 किलोमीटर का फ़ासला हैं। और इस पूरे सड़क मार्ग के दोनों किनारे असंख्य नीम के विशाल पेड़ खड़े हैं। पर तत्कालीन तहसीलदार को सिर्फ नेताजी के रिश्तेदार की होटल के आगे खड़े नीम के ये 10 पेड़ ही खतरनाक दिखाई दिए। ये दस पेड़ ही सड़क मार्ग से गुजरने वाले वाहनों और राहगीरों पर गिरकर उन्हें क्षति पहुंचा सकते हैं। बाकी के सारे पेड़ किसी को भी किसी भी प्रकार की हानि नही पहुंचाने वाले हैं। ये तत्कालीन तहसीलदार की जांच रिपोर्ट ने साबित किया था। जिसके चलते तत्कालीन तहसीलदार ने इन 10 पेड़ो की छंटाई के आदेश इस होटल संचालक को जारी किए थे।

शिकायत पर के बाद हुई जांच, पर जांच में भी हुई लीपापोती 

तलहटी क्षेत्र में स्थित इस होटल के सामने सड़क मार्ग पर स्थित इन पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने की शिकायत जिला कलेक्टर तक पहुंची थी। जिसकी जांच के लिए जिला कलेक्टर ने माउंट आबू वन्य अभ्यारण के उपवन संरक्षक को इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे। पर राजनैतिक रसूखात के चलते यह जांच मात्र औपचारिकता बनकर रह गई। जिसके चलते ना तो होटल संचालक के विरुद्ध कोई कार्रवाई हुई और ना ही इन पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने की इजाजत देने वाले तत्कालीन तहसीलदार पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। जिसके चलते ये नीम के पेड़ भी सूखने की कगार पर खड़े हैं।