आतंकी संगठन से जुड़े थे इंजीनियर छात्र: 178 गवाह और 500 से अधिक साक्ष्यों के बाद कोर्ट ने 12 इंजीनिरिंग स्टूडेंट्स को माना आतंकी, इंडियन मुजाहिदीन आतंकी संगठन से था संपर्क

जयपुर की जिला अदालत ने सिमी के 13 सदस्यों में से 12 को आतंकी करार दिया है। वहीं जोधपुर निवासी एक स्टूडेट्स को बरी कर दिया गया। कोर्ट की सुनवाई में आज मंगलवार को आरोप प्रमाणित मानते हुए आतंकी करार दिया।

178 गवाह और 500 से अधिक साक्ष्यों के बाद कोर्ट ने 12 इंजीनिरिंग स्टूडेंट्स को माना आतंकी, इंडियन मुजाहिदीन आतंकी संगठन से था संपर्क

जयपुर। 
जयपुर की जिला अदालत ने सिमी के 13 सदस्यों में से 12 को आतंकी करार दिया है। वहीं जोधपुर निवासी एक स्टूडेट्स को बरी कर दिया गया। कोर्ट की सुनवाई में आज मंगलवार को आरोप प्रमाणित मानते हुए आतंकी करार दिया। ये सभी इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स थे जो आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन के लिए काम करते थे। इन्हें 2014 में एटीएस और एसओजी ने अरेस्ट किया था। आतंकी करार दिए गए स्टूडेंट्स में से 6 सीकर के, 3 जोधपुर के, एक-एक जयपुर और पाली के और एक बिहार के गया का है। जिस स्टूडेंट को कोर्ट ने बरी किया है, वह जोधपुर का रहने वाला है।
जानकारी के मुताबिक राजस्थान में सिमी की स्लीपर सेल से जुड़ा यह मामला सात साल पुराना है। दिल्ली में गिरफ्तार हुए आतंकियों से मिले इनपुट के आधार पर राजस्थान में ATS और SOG की टीमों ने 2014 में जयपुर, सीकर और कुछ दूसरे जिलों में 13 संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार किया था। इन पर आरोप था कि ये प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े हैं और राजस्थान में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए बम बनाने जैसे कामों में लगे हैं। तब ATS ने यह भी दावा किया था कि सिमी की स्लीपर सेल को एक्टिव करने के लिए जयपुर से गिरफ्तार हुए मारुफ के रिश्तेदार उमर ने इंटरनेट के जरिए संपर्क कर इन युवकों को संगठन से जोड़ा था। इसके बाद ये युवक एक्टिव होकर आतंकी गतिविधियों में शामिल हो गए। ये किसी साजिश को अंजाम दे पाते, इससे पहले ही ATS और SOG ने स्लीपर सेल से जुड़े इन 13 युवकों को पकड़ लिया। इस मामले में पिछले सात साल से कोर्ट में ट्रायल चल रहा था। इस केस में अभियोजन पक्ष ने 178 गवाह और 506 डॉक्यूमेंट्री एविडेंस कोर्ट में पेश किए हैं। इसमें सरकारी वकील लियाकत खान ने पैरवी की।
बम विस्फोट करने के लिए जगह की करते थे रेकी
जानकारी के मुताबिक इन 12 आतंकियों को कोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों से सिम खरीदने, जिहाद के नाम पर फंड जुटाने, आतंकियों को शरण देने और बम विस्फोट के लिए रेकी करने जैसे मामलों में दोषी करार दिया है। यह भी सामने आया है कि ये गोपालगढ़ में हुई पुलिस फायरिंग से भी बौखलाए हुए थे। ​​​​​​ATS ने इनके पास से लैपटॉप, फोन, पेन ड्राइव, किताबें, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद किया था। दिल्ली ATS की सूचना पर राजस्थान ATS ने 28 मार्च, 2014 को इस मामले में FIR दर्ज की थी।

इन के खिलाफ कोर्ट ने माना जुर्म प्रमाणित
1. मोहम्मद अम्मार यासर पुत्र मोहम्मद फिरोज खान, उम्र 22 साल, निवासी काजी मोहल्ला शेरघाटी, गया (बिहार)
2. मोहम्मद सज्जाद पुत्र इकबाल चौहान (32), अन्जुम स्कूल के पास, मोहल्ला कुरैशीयान, सीकर
3. मोहम्मद आकिब पुत्र अशफाक भाटी (22), मोहल्ला जमीदारान वार्ड 13, सीकर
4. मोहम्मद उमर पुत्र डॉ. मोहम्मद इलियास (18), जमीदारान वार्ड 2, सीकर
5. अब्दुल वाहिद गौरी पुत्र मोहम्मद रफीक (26), मोहल्ला कुरैशियान, वार्ड 31, सीकर
6. मोहम्मद वकार पुत्र अब्दुल सत्तार (22), मोहल्ला रोशनगंज, वार्ड 13, सीकर
7. अब्दुल माजिद उर्फ अद्दास पुत्र असरार अहमद (21), मोहल्ला जमीदारान वार्ड 12, सीकर
8. मोहम्मद मारुफ पुत्र फारुक इंजीनियर, डी 105, संजय नगर, झोटवाड़ा, जयपुर
9. वकार अजहर पुत्र मोहम्मद तस्लीम रजा, 20 पुराना चूड़ीघरों का मोहल्ला, पाली
10. बरकत अली पुत्र लियाकत अली (28), मकान नं 8, हाजी स्ट्रीट, शान्तिप्रिय नगर, जोधपुर
11. मोहम्मद साकिब अंसारी पुत्र मोहम्मद असलम (25), ए 45, बरकतुल्ला कॉलोनी, जोधपुर
12. अशरफ अली खान पुत्र साबिर अली (40), 653, लायकान मोहल्ला, जोधपुर

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