राजस्थान/सिरोही : पालड़ी थानाधिकारी की नाकामियों को छुपा रहे एसपी

सिरोही जिले के पालड़ी थाने का इन दिनों भगवान ही मालिक हैं। पालड़ी थाना क्षेत्र में कब कौनसी बड़ी घटना हो जाए, किसी को कोई परवाह नही। सिर्फ फरवरी महीने की ही बात करें तो यहां दो बड़ी घटनाओं ने आमजन को झकझोर के रख दिया।

पालड़ी थानाधिकारी की नाकामियों को छुपा रहे एसपी
  • आखिर एक एसपी क्यों ढो रहे नाकाम एसआई को

सिरोही। एक फरवरी को वेरा विलपुर गांव स्थित पिपलेश्वर महादेव मंदिर के महंत पर दिन दहाड़े जान लेवा हमला हुआ, और गम्भीर हालात में महंत भगीरथ गिरी को अस्पताल लाया गया। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए तो उदयपुर स्थित संभाग मुख्यालय के अस्पताल के लिए रैफर किया गया। घायल महंत को उदयपुर पहुंचाया गया। पर सात दिन इलाज लेने के बाद महंत भगीरथ गिरी ने दम तोड़ दिया।

वहीं दूसरी वारदात क्षेत्र के अरठवाड़ा गांव में हुई, जहां एक दलित व्यक्ति की हत्या कर शव को क्षत विक्षत कर सिर को धड़ से अलग कर शव को सुनसान जगह पर फेंक दिया गया। कटे हुए सिर की स्थिति ऐसी कर दी कि शव की शिनाख्त में भी पुलिस को 50 से ज्यादा घण्टों का समय लग गया। लेकिन दोनों ही मामलों में पालड़ी थानाधिकारी सुजानाराम के हाथ अब तक खाली हैं। ये तो गनीमत समझो कि पिपलेश्वर के महंत के हत्यारे सरूपगंज थानाधिकारी के हत्थे चढ़ गए और वो भी एक मोटरसाइकिल चोरी के मामले में। वरना पालड़ी थानाधिकारी तो अब तक हाथ पर हाथ धरे बैठे ही थे।

सरूपगंज थानाधिकारी ने मोटरसाइकिल चोर के रूप में जब इन दो आरोपियों को पकड़ा और पूछताछ की तो एक साथ 13 वारदातों को अंजाम देना इन आरोपियों ने कबुल कर दिया जिसमें पालड़ी थाना क्षेत्र के पिपलेश्वर महादेव मंदिर के महंत की हत्या भी शामिल थी। सरूपगंज थानाधिकारी ने तुरंत इसकी जानकारी जिले के पुलिस कप्तान को दी, और कप्तान ने इस पर वाहवाही लूटने  और चेहते पालड़ी थानाधिकारी को बचाने के लिए बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर महंत के हत्यारों का पर्दाफाश किया और कहा कि इस हत्याकांड का खुलासा करने के लिए सरूपगंज थानाधिकारी के नेतृत्व में भी एक टीम गठित की गई थी जिसने इन हत्यारो को पकड़ कर पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया।

यही से हमारा शक शुरू हुआ और हमने आरोपियों के वीडियो करने के लिए पालड़ी थाने जाने की बात एसपी से की। जिस पर एसपी ने कहा कि आरोपी अभी सरूपगंज थाने की कस्टडी में हैं। एसपी की इसी बात पर हमें शक हुआ। जब पालड़ी थाने के मामले का खुलासा करने के लिए बनाई टीम के एक उप निरीक्षक ने आरोपियों को पकड़ा हैं तो फिर आरोपी पालड़ी थाने की कस्टडी में होने चाहिए थे, ना कि सरूपगंज थाने की कस्टडी में। सिरोही जिले के पुलिस कप्तान जिन आरोपियों को पालड़ी थाना क्षेत्र के वेरा विलपुर के महंत हत्याकांड का बताकर गिरफ्तार करने की बात कर रहे हैं, वो आरोपी गिरफ्तारी के दो दिन बाद भी सरूपगंज थाना पुलिस के पास रिमांड पर हैं। यदि इन आरोपियों को महंत हत्याकांड में गिरफ्तार किया गया हैं तो फिर ये पीसी रिमांड ओर पालड़ी थाना पुलिस की कस्टडी में होने चाहिए थे। आखिर जिले के एसपी इन बातों को नजरअंदाज कर एक नाकाम अधिकारी को बचाने का प्रयास क्यों कर रहे हैं ये हमारी समझ से परे हैं।