Gravel Mining @सरकार ने जारी किए 3 पट्टे: राजस्थान सरकार ने देवली, नाथद्वारा और राजसमंद में जारी किए तीन बजरी खनन के पट्टे

गहलोत सरकार ने आमनागरिकों को बड़ी राहत देते हुए टोंक जिले में एक और राजसमंद जिले में दो बजरी खनन के कुल तीन खनन पट्टे जारी किए हैं। खान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि इससे पहले राजस्थान सरकार ने जालोर में दो व भीलवाड़ा में एक बजरी खनन पट्टे जारी किए थे।

राजस्थान सरकार ने देवली, नाथद्वारा और राजसमंद में जारी किए तीन बजरी खनन के पट्टे

जयपुर।
गहलोत सरकार ने आमनागरिकों को बड़ी राहत देते हुए टोंक जिले में एक और राजसमंद जिले में दो बजरी खनन के कुल तीन खनन पट्टे जारी किए हैं। खान विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि इससे पहले राजस्थान सरकार ने जालोर में दो व भीलवाड़ा में एक बजरी खनन पट्टे जारी किए थे। अब जयपुर, कोटा और उदयपुर में बजरी की समस्या पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी। जबकि समूचे राजस्थान में कुल मांग की 25 प्रतिशत से भी अधिक बजरी की मांग पूरी की जा सकेगी।
एसीएस डॉ. अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर खनिज पट्टों हेतु जारी मंशा पत्रों की वैधता को 13 माह के स्थान पर 68 माह कर दिया है। इससे देवली, राजसमंद, नाथद्वारा में बजरी मंशा पत्रोंं की वैधता की राह प्रशस्त होने से तीन लीज जारी हो सकी है। उन्होंने बताया कि बजरी से संबंधित सभी प्रकरणों की मोनेटरिंग व समन्वय के लिए अतिरिक्त निदेशक बीएस सोढ़ा को प्रभारी बनाया हुआ है।
प्रदेश में अन्य पट्टों के लिए ईसी जारी करने की मांग
खान एवं गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बताया कि आमलोगों को आसानी से और वैध तरीके से बजरी प्राप्त हो सके इसके लिए विभाग द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के क्रम में राज्य सरकार द्वारा केन्द्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को अन्य पट्टों के लिए शीघ्र ही ईसी जारी करने हेतु पत्र लिखा गया है। माइंस एवं पेट्रोलियम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा जारी तीन बजरी खनन पट्टों में से टोंक जिले के देवली में एसआर एसोसिएट्स भीलवाड़ा 1667.78 हैक्टेयर क्षेत्रफल का,  नरोत्तम सिंह जादौन करौली को राजसमंद मेें 489.3965 हैक्टेयर क्षेत्रफल और राजसमंद के नाथद्वारा का हिम्मत सिंह शेखावत को 773.2797 हैक्टेयर क्षेत्रफल के पट्टे जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इससे राज्य सरकार को 50 करोड़ रु. का सालाना राजस्व प्राप्त होगा। एसीएस डॉ. अग्रवाल ने बताया कि एक मोटे अनुमान के अनुसार राज्य में 70 मिलियन टन बजरी की मांग है। उन्होंने बताया कि यह तीन पट्टे जारी होने से कुल मांग की 25 फीसदी से अधिक पूर्ति हो सकेगी। 

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