राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में बवाल: पाली के रायपुर तहसीलदार का लेटर विवादों में, एसडीएम, कलेक्टर से लेकर जयपुर के साहब तक पर दबाव का आरोप

राजस्थान की राजनीति में बयानबाजी के बाद अब राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में एक लेटर बवाल बन रहा है। मामला पाली जिले से जुड़ा हुआ है। मामले की सत्यता तो जांच के बाद ही तय पाएगी, लेकिन इस लेटर ने रायपुर से लेकर पाली और राजधानी जयपुर तक हंगामा खड़ा कर दिया।

पाली के रायपुर तहसीलदार का लेटर विवादों में, एसडीएम, कलेक्टर से लेकर जयपुर के साहब तक पर दबाव का आरोप

जयपुर।
राजस्थान की राजनीति में बयानबाजी के बाद अब राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी में एक लेटर बवाल बन रहा है। मामला पाली जिले से जुड़ा हुआ है। मामले की सत्यता तो जांच के बाद ही तय पाएगी, लेकिन इस लेटर ने रायपुर से लेकर पाली और राजधानी जयपुर तक हंगामा खड़ा कर दिया। बताया जा रहा है कि आवासीय जमीन कन्वर्जन (residential colony conversion case) के मामले में रायपुर तहसीलदार पर दबाव बनाया गया और नियम विरुद्ध कार्रवाई करने को कहा गया। हालांकि इस संबंध में कार्रवाई नहीं करने के साथ ही संबंधित तहसीलदार ने इस पूर मामले में आर्डर शीट चला दी और अधिकारियों के दबाव का हवाला देते हुए रायपुर एसडीएम को लेटर तक भेज दिया। 
 यह है मामला
तत्कालीन तहसीलदार नरेंद्र सिंह (Raipur Tehsildar Narendra Singh) ने हाईलेवल से आए प्रेशर का पूरा ब्योरा आर्डर शीट में लिखा है। इसमें बताया कि रायपुर तहसील में मील कॉलाेनी की आवासीय जमीन का कन्वर्जन किया गया था। इसे रद्द करने के लिए जयपुर से साहब के कहने पर कलेक्टर लगातार दबाव बनाते रहे, जबकि जिन धाराओं का हवाला दिया गया है, उसमें ऐसा मामला बनता ही नहीं। उसका यह भी आरोप है कि नौकरी ध्यान में रखने तक भी धमकी दी गई। इधर, कलेक्टर का कहना है कि यह आरोप गलत है और बैकडेट में आर्डर जारी किए गए। एपीओ (प्रतीक्षारत) तहसीलदार अब भी इस बात पर बना है कि उस पर बेवजह का प्रेशर बनाया गया।


जमीन कन्वर्जन रद्द करने का दबाव
रायपुर तहसील के मील कॉलोनी में 8 साल पहले रेजिडेंशियल जमीन में कन्वर्जन किया गया था। रायपुर की कुछ कॉलोनियों में पिक एंड चूज के आधार पर जमीन का कन्वर्जन रद्द करने की कार्रवाई के दबाव की बात सामने आ रही है। तहसीलदार के लेटर के मुताबिक, मामले को टीनेंसी एक्ट के तहत केस बनाकर तहसीलदार पर खातेदार को बेदखल करने के लिए जयपुर से साहब के कहने पर पाली कलेक्टर और एसडीएम ने दबाव बनाया। रायपुर तहसीलदार ने दावा किया कि मामला इन धाराओं में बनता ही नहीं। रायपुर तहसीलदार ने लिखा- मौखिक रूप से एसडीएम कार्यालय में तहसीलदार को बुलाकर बताया गया कि कलेक्टर का बार-बार फोन आ रहा है कि मील कॉलोनी का प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही? तब एसडीएम के कहने पर रेवेन्यू इंस्पेक्टर रायपुर व पटवारी हल्का रायपुर सेकंड से रिपोर्ट लेकर 1849/1, 1849/3, 1849/5, 1849/7. 1849/8, 1849/10, 1849/11, 1849/12 1849 / 13 किस्म आवासीय इकाई का धारा 177 और धारा 212 के तहत प्रकरण तत्परता से तैयार कर एसडीएम को पेश किया गया।

तहसीलदार को दी नौकरी की धमकी

रायपुर तहसीलदार ने पत्र में लिखा है कि एसडीएम कार्यालय से मील कॉलोनी का प्रकरण दर्ज करने के लिए कोई भी लेटर जारी नहीं किया गया। न ही किसी की लिखित में शिकायत प्राप्त हुई। तहसीलदार का कहना है कि मुझे कलेक्टर, चेनाराम सरपंच प्रतिनिधि और जयपुर से मैसेज आने की बात व दबाव डालकर प्रकरण तैयार करने को कहा गया। यह भी कहा कि अपनी नौकरी का ख्याल रखना, तब मैंने कहा कि नौकरी किसी की दान में नहीं दी हुई है। तहसीलदार ने आगे ऑर्डरशीट में लिखा है  कि इस तरह के मामले धारा 177 के प्रकरण में नहीं आते हैं। फिर भी एसडीएम ने दबाव बनाकर रिपोर्ट पेश करने को कहा। यह रूपान्तरण कन्वर्जन आठ साल पहले के हैं। मेरे से पहले भी कई तहसीलदार रहकर गए हैं। रायपुर और हरिपुर तहसील में इस तरह के कई प्रकरण होंगे, लेकिन मुझ पर दबाव बना इसी प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कर पेश करने को कहा। जबकि यह मामला धारा 177 की परिभाषा के अनुरूप नहीं है। इसे खारिज किया जाना उचित होगा।

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