Rajathan @ भाजपा CM फेस पर खींचतान खत्म: राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ेगी भाजपा, भाजपा में खींचतान समाप्त करने की कवायद शुरू

राजस्थान में विधानसभा चुनावों में अभी दो साल से ज्यादा का समय बाकी है। इस बीच, चुनावों में उतरने से पहले भाजपा अपने बड़े नेताओं की आपसी खींचतान को खत्म करने की कवायद कर रही है। बीजेपी की मंशा है कि चुनावों में उतरने से पहले डेमेज कंट्रोल कर लिया जाएं।

राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ेगी भाजपा, भाजपा में खींचतान समाप्त करने की कवायद शुरू

कुंभलगढ़।
राजस्थान में विधानसभा चुनावों में अभी दो साल से ज्यादा का समय बाकी है। इस बीच, चुनावों में उतरने से पहले भाजपा अपने बड़े नेताओं की आपसी खींचतान को खत्म करने की कवायद कर रही है। बीजेपी की मंशा है कि चुनावों में उतरने से पहले डेमेज कंट्रोल कर लिया जाएं। कुंभलगढ़ में दो दिन तक भाजपा के चिंतन शिविर में सीएम फेस की कतार में खड़े नेताओं को खींचतान मिटाने का साफ मैसेज दे दिया गया है। बीजेपी विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी के चेहरे के साथ सामूहिक नेतृत्व में ही चुनाव लड़ने का फार्मूला अपनाएगी।
बीजेपी की चिंतन बैठकें पहले भी होती रही हैं, लेकिन इस बार की चिंतन बैठक ऐसे माहौल में हुई है, जब पार्टी के भीतर सीएम फेस और सीएम इन वेटिंग बनने के लिए नेताओं की लंबी कतार खड़ी हो गई है। कई केंद्रीय मंत्री, सांसद और बीजेपी नेता खुद को पिछले सवा साल से सोशल मीडिया पर सीएम फेस प्रोजेक्ट करने में लगे हैं। ऐसे सभी नेताओं की कवायद से पार्टी के भीतर जबर्दस्त खींचतान का माहौल बन गया। पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का खेमा भी मुखर होकर मुद्दे उठाता रहता है। केंद्रीय नेतृत्व ने खींचतान मिटाने के लिए ही अब चिंतन शिविर के जरिए मैसेज दे दिया है कि सीएम फेस प्रोजेक्ट ही नहीं होगा। राजस्थान बीजेपी में कांग्रेस की तरह ही लगातार चल रही खींचतान और खेमेबंदी को मिटाने के लिए सामूहिक नेतृत्व का फार्मूला ईजाद किया गया है। राजस्थान में पार्टी विपक्ष में है। इसलिए यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा और केंद्र के कामकाज के आधार पर पार्टी वोट मांगने उतरेगी। 
गुजरात मॉडल के आधार पर हर बूथ पर पकड़
पीएम का चेहरा सामने करके स्थानीय सीएम फेस की लड़ाई को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। बीजेपी इस बार के विधानसभा चुनाव में गुजरात मॉडल पर चुनाव मैदान में उतरेगी। गुजरात मॉडल के आधार पर हर बूथ स्तर तक चुनाव से पहले ही 20 वोटर पर एक कार्यकर्ता की ड्यूटी लगाई जाएगी। हर बूथ पर पन्ना प्रमुख और हाफ पन्ना प्रमुख अप्रैल तक नियुक्त करने का टारगेट दिया गया है। इस फार्मूले पर पूरे देश में काम चल रहा है। राजस्थान में इस पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। गुजरात मॉडल की शुरुआत सूरत से की गई थी, जो बाद में कई जगह सफल रहा। इस मॉडल से चुनाव में जीत की संभावना बढ़ जाती है। गुजरात मॉडल पर चुनाव लड़ने से सीएम फेस की लड़ाई खत्म हो जाएगी।

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