Jalore @ नर्मदा नीर आंदोलन हुआ उग्र: भीनमाल को नर्मदा नीर की मांग पर चक्का जाम, भीनमाल बंद को जन समूह का समर्थन

नर्मदा नीर संघर्ष समिति द्वारा स्थानीय एसडीएम कार्यालय के समक्ष आयोजित बेमियादी धरना प्रदर्शन, हस्ताक्षर अभियान व क्रमिक अनशन के 44 वें दिन भीनमाल बंद व चक्का जाम रहा। इस दौरान पुलिस व लोगों के बीच मामूली नोक झोंक को छोड़कर शांतिपूर्वक रहा।

भीनमाल को नर्मदा नीर की मांग पर चक्का जाम, भीनमाल बंद को जन समूह का समर्थन

भीनमाल जालोर।
नर्मदा नीर संघर्ष समिति द्वारा स्थानीय एसडीएम कार्यालय के समक्ष आयोजित बेमियादी धरना प्रदर्शन, हस्ताक्षर अभियान व क्रमिक अनशन के 44 वें दिन भीनमाल बंद व चक्का जाम रहा। इस दौरान पुलिस व लोगों के बीच मामूली नोक झोंक को छोड़कर शांतिपूर्वक रहा।कार्यक्रम के दौरान लोगों ने धरना देकर व रैली निकालकर प्रदर्शन व  आक्रोश प्रकट किया। चक्का जाम को लेकर पुलिस-प्रसाशन खासा मुस्तेद नजर आया। मंगलवार को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नगर के समस्त व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर धरना स्थल पहुंचे।

करीब 10 बजे बड़ी संख्या में लोग एसडीएम कार्यालय के बाहर धरना स्थल पर जमा हो गए थे। इस दौरान समिति के सदस्य शेखर व्यास, दिनेश दवे नवीन,कपूरचंद गहलोत, मोहनसिंह,सिसोदिया नरेश अग्रवाल व अशोक सिंह ओपवत सहित दर्जन भर वक्ताओं ने संबोधित करते हुए भीनमाल नगर सहित विधानसभा क्षेत्र में भीषण पेयजल संकट व नर्मदा परियोजना के कार्य मे देरी के लिए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, सरकार व प्रसाशन को जिम्मेदार ठहराते हुए पानी उपलब्ध नहीं होने तक आंदोलन को अनवरत जारी रखने की चेतावनी दी। वक्ताओ ने राज्य सरकार, जनप्रतिनिधियों व जिला प्रसाशन द्वारा आंदोलन को हल्के में आंकने व नजरअंदाज करने को लेकर भी आक्रोश प्रकट करते हुए समय आने पर करारा जवाब देने की आवश्यकता जताई। दोपहर करीब 12 बजे धरना स्थल से रैली का आयोजन किया। जो मुख्य मार्ग होते हुए अम्बेडकर तिराहे पहुंचे। यहां मुख्य सर्किल पर टेन्ट लगाकर दोपहर ढाई बजे तक धरना जारी रखा। इसके बाद पुनः रैली के रूप में एसडीएम कार्यालय पहुंचे। यहां पीएम व सीएम के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौपकर नर्मदा का नीर उपलब्ध करवाने के लिए कार्य में तेजी लाने की मांग की। इस दौरान समिति के सदस्य श्रवणसिंह राव,श्याम खेतवात,शैतान सिंह भाटी,दिनेश भट्ट, जबराराम भाटी,जगदीशप्रसाद शर्मा व दिनेश नवीन सहित करीब दर्जनभर वक्ताओं ने संबोधित किया।
वही नगर के समस्त करीब दस प्रवेश मार्ग जालौर, रानीवाड़ा, करड़ा,जसवंतपुरा, दासपा, निम्बोडा, भागलभीम,भादरड़ा, एमपी व जुंजाणी मार्ग पर समिति के सदस्यों के नेतृत्व में अलग अलग टोलियां द्वारा मार्ग अवरुद्ध करने की वजह से सुबह सुबह वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन पुलिस-प्रसाशन की सक्रियता व वाहनों की निकासी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की वजह से बाहर से आने-जाने वाले वाहनों को बायपास से निकाला गया।

भीनमाल के इतिहास में पहली बार पेयजल संकट व नर्मदा परियोजना का कार्य शीघ्र पूर्ण करवाने की मांग को लेकर संचालित आंदोलन को मंगलवार को करीब डेढ़ माह गुजर जाने के बावजूद जिला कलेक्टर, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों व सरकार  पर अभी तक कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। उक्त जिम्मेदारों की हठधर्मिता की वजह से आंदोलन समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है। हैरत तो यह है कि सत्ताधारी व मुख्य विपक्षी दल भी आंदोलन को नजरअंदाज कर रहे हैं। जबकि 2013 में स्वीकृत परियोजना का कार्य 2016 मे पूर्ण करने का लक्ष्य था। पांच वर्ष देरी के बावजूद वर्तमान में उक्त कार्य 65 से 70 प्रतिशत ही पूर्ण हुआ है और राज्य सरकार द्वारा बजट आवंटन में कंजूसी व वर्तमान कार्य की गति के अनुसार आगामी 2025 तक कार्य पूर्ण होना मुश्किल नजर आ रहा है। इसी कारण सरकार, जनप्रतिनिधि, प्रसाशन व नर्मदा विभाग के अधिकारी भी जिम्मेदारी लेने से कतरा रहे है। आंदोलन से दूरी रखने में स्वयं की भलाई समझ रहे हैं।


आंदोलन के तहत अब मटका फोड़ प्रदर्शन
आंदोलन की अगली कड़ी में प्रसाशनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के ऑफिस व आवास के समक्ष मटका फोड़ कार्यक्रम का आयोजन होगा। इसके बाद विरोध प्रदर्शन व नेताओं का सार्वजनिक रूप से बहिष्कार लेकर भी मंथन चल रहा है। यदि यही हालात रहे तो आगामी नगर पालिका, विधानसभा व लोकसभा चुनावों में दोनों दलों के जनप्रतिनिधियों को भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है। बंद व चक्का जाम के दौरान कानून व शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपखंड अधिकारी जवाहरराम चौधरी व पुलिस उप अधीक्षक शंकरलाल के नेतृत्व में तहसीलदार रामसिंह राव , भीनमाल थानाधिकारी दुलीचंद गुर्जर, रामसीन थानाधिकारी अरविंद पुरोहित, बागोड़ा थानाधिकारी छतरसिंह देवड़ा, एसआई भैरूसिंह सोलंकी,किरण कुमार, एएसआई प्रेमसिंह,मोहनलाल बिश्नोई,चौकी प्रभारी भरतसिंह ओर यातायात प्रभारी दलपतसिंह राऊता व वागाराम के नेतृत्व में करीब डेढ़ सौ से अधिक पुलिस के जवान विभिन्न स्थानों व प्रवेश मार्गो पर तैनात थे।

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