Jaipur नेताजी बोस की 125वीं जयंती: Chief Minister ने नेताजी के बताए रास्ते पर चलते हुए गुमराह करने वाली शक्तियों से युवा वर्ग को सावधान रहने की अपील की

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि देश में आज शांति एवं सद्भाव कायम करने की जरूरत है। अनेकता में एकता वाले इस मुल्क मेंं कुछ ताकतें हमारे नौजवानों को गुमराह कर रही हैं। धर्म और जाति के आधार पर नई पीढ़ी को आपस में लड़ाने वाली इन ताकतों को हमें कामयाब नहीं होने देना है। 

Chief Minister ने नेताजी के बताए रास्ते पर चलते हुए गुमराह करने वाली शक्तियों से युवा वर्ग को सावधान रहने की अपील की

जयपुर।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि देश में आज शांति एवं सद्भाव कायम करने की जरूरत है। अनेकता में एकता वाले इस मुल्क मेंं कुछ ताकतें हमारे नौजवानों को गुमराह कर रही हैं। धर्म और जाति के आधार पर नई पीढ़ी को आपस में लड़ाने वाली इन ताकतों को हमें कामयाब नहीं होने देना है। 
सीएम अशोक गहलोत मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर आयोजित वर्चुअल संवाद कार्यक्रम में ‘आजादी का स्वर्णिम इतिहास एवं नया भारत‘ विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
सीएम ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने युवाओें में एक नया जज़्बा कायम किया और विदेश की धरती पर आजाद हिंद फौज खड़ी कर अपनी हिम्मत एवं साहस का परिचय दिया। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ ताकतें हमारे नौजवानों को गुमराह कर रही हैं। इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के प्रयास किए जा रहे हैं। 50 वर्ष से जल रही अमर जवान ज्योति को बुझा दिया गया है। 
70 सालों में अर्जित की गई देश की उपलब्धियों को नकारा जा रहा है।  देश आज जिस राह पर जा रहा है, उसे देखते हुए हमारी नौजवान पीढ़ी यहां की महान संस्कृति एवं परम्पराओं के बारे में अध्ययन करे और सच्चाई की राह अपनाए।
कार्यक्रम में कला, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने कहा कि नेताजी की आजाद हिंद फौज में युवाओं के साथ अनुभवी लोग भी थे।
राज्यमंत्री युवा मामले एवं खेल विभाग अशोक चांदना ने कहा कि विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन के महानायकों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता राजीव गांधी स्टडी सर्कल के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. सतीश राय ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रखर राष्ट्रवादी एवं स्वराज्य के प्रबल पक्षधर थे। 
गांधी पीस फाण्डेशन के अध्यक्ष कुमार प्रशांत ने कहा कि गांधीजी ने अलग-अलग जातियों, धर्म, प्रांतों एवं सूबों वाले इस मुल्क को एक रखने का उपक्रम किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजादी हिंद फौज के सुप्रीम कमांडर के रूप में रंगून से गांधीजी को पहली बार राष्ट्रपिता के नाम से संबोधित किया। 

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