कोरोना की तीसरी लहर की शुरूआत तो नहीं: उत्तराखंड में 10 दिनों में 1 हजार बच्चें कोरोना पॉजिटिव, क्या यह तीसरी लहर की शुरूआत तो नहीं

देश के उत्तराखंड राज्य से आज डराने वाली खबर आई। यहां 10 दिनों में अचानक 1 हजार बच्चों में कोरोना संक्रमण पाया गया हैं। कोरोना की तीसरी लहर की यह शुरूआत है तो यह चिंता का विषय हैं। इसे लेकर अब इस बात की चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि क्या देश में कोरोना की तीसरी लहर का प्रकोप शुरू हो गया है।

उत्तराखंड में 10 दिनों में 1 हजार बच्चें कोरोना पॉजिटिव, क्या यह तीसरी लहर की शुरूआत तो नहीं

नई दिल्ली। 
देश के उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य से आज डराने वाली खबर आई। यहां 10 दिनों में अचानक 1 हजार बच्चों (Children) में कोरोना (Corona) संक्रमण पाया गया हैं। कोरोना की तीसरी लहर की यह शुरूआत है तो यह चिंता का विषय हैं। इसे लेकर अब इस बात की चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि क्या देश में कोरोना की तीसरी लहर का प्रकोप शुरू हो गया है। मीडिया में चल रही खबरों की मानें तो उत्तराखंड के एक गांव में बीते दस दिनों में 9 वर्ष से कम उम्र के करीब एक हजार बच्चे कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए है। ये आंकड़े राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए हैं। इस खबर के सामने आने के बाद से राज्य में हड़कंप मच गया है। जानकारी के मुताबिक, कोरोना से संक्रमित इन सभी बच्चों को इलाज के लिए कई अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। आकड़ों के मुताबिक, अब तक उत्तराखंड में कुल 2131 बच्चे कोरोना वायरस की चपेट में आए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कोरोना की दूसरी लहर में ही राज्य में इतनी संख्या में बच्चे संक्रमित हो गए है। उत्तराखंड के गांवों में कोरोना वायरस तेजी से अपना असर दिखा रहा है और बड़ी संख्या में गांवों में रहने वाले लोग संक्रमित हो रहे है। विशेषज्ञों के अनुसार  कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है। तीसरी लहर में ऐसी संभावना है कि वायरस बच्चों से लेकर बड़ों तक को अपनी चपेट में ले सकता है। ऐसे में वायरस के खतरे को समझते हुए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा इससे बचाव को लेकर तैयारी शुरू कर दी गई हैै। बच्चों में संक्रमण के बढ़ने से संक्रमण के खतरे को कंट्रोल करना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाएगा। राज्य और केंद्र सरकार भी इस जानकारी के बाद से अलर्ट मोड पर है। आप को बता दें कि कोरोना की दूसरी लहर में कई कोरोना मरीजों को बहुत ही हाई डोज इंजेक्शन, कैप्सूल, टैबलेट के साथ ही ऑक्सीजन आदि भी देने की जरूरत पड़ी है। हालांकि, बच्चे इन इंजेक्शन, कैप्सूल, टैबलेट का सेवन नहीं कर पाते है और उनके लिए सहन करना भी मुश्किल होता है। ऐसे में देश के कई हिस्सों में बच्चों के लिए कोरोना वार्ड भी खोलने की तैयारी तेज हो गई है। ताकि तीसरी लहर आने से पहले ही तैयारी पूरी किया जा सकें। इसके साथ ही देशभर से कोरोना की वैक्सीन की कमी की खबरें भी आ रही है। ऐसे में अगर ये कोरोना की तीसरे लहर की शुरूआत है तो केंद्र सरकार को इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।