सिरोही विधायक और युवाओं को वैक्सीनेशन: सिरोही विधायक संयम लोढ़ा ने विधायक कोष से स्वीकृत किए 3 करोड़ ताकि जिले के 4 लाख 72 हजार 400 युवाओं को लग सकें वैक्सीन

विधायक संयम लोढ़ा ने 18 से 45 वर्ष आयु के युवाओं को निःशुल्क वैक्सीन लगाने के लिए विधायक कोष से 3 करोड़ रुपए स्वीकृत करने की अनुशंसा की। सिरोही जिले में इस आयु वर्ग की संख्या 4 लाख 72 हजार 400  है,  जिनको वैक्सीन लगाई जानी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अपील पर यह राशि प्रदान की गई।

सिरोही विधायक संयम लोढ़ा ने विधायक कोष से स्वीकृत किए 3 करोड़ ताकि जिले के 4 लाख 72 हजार 400 युवाओं को लग सकें वैक्सीन

सिरोही।
विधायक संयम लोढ़ा ने 18 से 45 वर्ष आयु के युवाओं को निःशुल्क वैक्सीन लगाने के लिए विधायक कोष से 3 करोड़ रुपए स्वीकृत करने की अनुशंसा की। सिरोही जिले में इस आयु वर्ग की संख्या 4 लाख 72 हजार 400  है,  जिनको वैक्सीन लगाई जानी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अपील पर यह राशि प्रदान की गई। इससे पहले भी विधायक संयम लोढ़ा ने अपने एक माह का वेतन भी इस कार्य के लिए प्रदान किया है। लोढ़ा ने कहा कि इतिहास में अब तक हर तरह की वैक्सीन का सम्पूर्ण व्यय भारत सरकार वहन करती रही है। इस बार  भारत सरकार ने पहली बार 18 से 45 वर्ष के युवाओं को वैक्सीन लगाने का खर्च उठाने से इंकार कर दिया है। इसके लिए राज्य सरकार को 400 रुपए प्रति डोज व प्राईवेट को 800 रुपए प्रति डोज वहन करने होंगे। देशवासी इस सम्बंध में लगातार प्रधानमंत्री से आग्रह कर रहे है। भारत सरकार द्वारा इंकार करने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यह शुल्क नहीं लेने का निर्णय किया है लेकिन राज्य के संसाधन सीमित है। उन्होंने इस संबंध में नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने सांसदों, विधायक से भी सहयोग करने एवं सांसद कोष, विधायक कोष से रुपए देने की अपील की। लोढ़ा ने एक बयान जारी कर कहा कि केन्द्र सरकार कोरोना वैक्सीन नीति को लेकर  दिग्भ्रमित है। भारत दुनिया मे चीन, अमेरिका एव जर्मनी के बाद चौथे नम्बर का बड़ा वैक्सीन उत्पादक देश है लेकिन अपने नागरिकों को वैक्सीन लगाने में बहुत पिछड़ गया है। आबादी प्रतिशत के आधार पर दुनिया मे 65वे नम्बर पर है। भारत सरकार ने अभी तक केवल दो कंपनियों के साथ वैक्सीन निर्माण का करार किया है जबकि भारत मे 16 कंपनियां ऐसी है जो वैक्सीन बना सकती है। करार की गई दो कम्पनिया भारत बायोटेक और सीरम इंसीट्यूट हर माह साढ़े 7 करोड़ डोज बना सकती है। भारत की जरूरत ज्यादा है और अन्य कम्पनियों से फॉर्मूला साझा किया जाए तो भारतीय कंपनियां हर माह 25 करोड़ डोज बना सकती है ऐसा करने पर हर नागरिक को डोज लगाने के लक्ष्य एक साल में प्राप्त किया जा सकेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि नागरिकों का जीवन बचाने के लिये खुले दिल दिमाग से निर्णय करे एवं सबका सहयोग लेने का वातावरण बनाएं।

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