पुलिस क्यों छिपा रही सुसाइड नोट: संत आत्महत्या प्रकरण में एमएलए पूराराम के खिलाफ मामला दर्ज, साधु-संतों ने किया देह उतारने से इनकार

पुलिस जिस सुसाइड नोट को सवेरे से दबाकर और छिपाकर बैठी हैं, उसका मजमून रिपोर्ट में मिल गया है। रिपोर्ट में विधायक पूराराम चौधरी समेत तीनों लोगों पर साधू को धमकाने, जातिसूचक शब्दों से प्रताडित करने तथा उनके साथ मारपीट करने के आरोप लगाए गए हैं।

संत आत्महत्या प्रकरण में एमएलए पूराराम के खिलाफ मामला दर्ज, साधु-संतों ने किया देह उतारने से इनकार

जालोर। जालोर के राजपुरा गांव में सुंधा माता मंदिर की तलहटी के पास स्थित आश्रम के साधु रविनाथ (60) ने आश्रम में ही फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मामला आश्रम के पास एक जमीन से जुड़ा है। पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है। जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया। इस मामले में आश्रम के संतों ने स्थानीय भाजपा विधायक पूराराम चौधरी (भीनमाल) पर साधु को सुसाइड के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। वहीं, पूर्व प्रधान रमिला मेघवाल ने भी विधायक पर साधु को धमकाने का आरोप लगाया है। सवेरे से साधू की बॉडी पेड़ पर लटकी हैं और साधु-संत इसे उतारने के लिए राजी नहीं है। साधू और संत आश्रम में धरने पर बैठ गए हैं। इस मामले में गतिरोध खत्म करने के लिए पुलिस ने शुक्रवार देर शाम पंसेरी के बाबूराम पुत्र रणछोड़ाराम की रिपोर्ट पर विधायक पूराराम चौधरी पुत्र धन्नाराम चौधरी निवासी कावतरा समेत उनके चालक धनसिंह रावणा राजपूत एवं बींजनाथ पुत्र छोगानाथ के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस जिस सुसाइड नोट को सवेरे से दबाकर और छिपाकर बैठी हैं, उसका मजमून रिपोर्ट में मिल गया है। रिपोर्ट में विधायक पूराराम चौधरी समेत तीनों लोगों पर साधू को धमकाने, जातिसूचक शब्दों से प्रताडित करने तथा उनके साथ मारपीट करने के आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साधू ने जो सुसाइड नोट छोड़ा है, उसमें विधायक पूराराम चौधरी समेत कई लोगों के नाम हैं। मामला दबाने की मंशा से पुलिस इसे सार्वजनिक नहीं कर रही है।

पुलिस पर सुसाइड नोट छुपाने का आरोप लगाते हुए साधु-संतों ने पेड़ पर लटके साधु की बॉडी को उतारने से इनकार कर दिया है। मौके पर पहुंचे प्रशासन के अधिकारी समझाइश का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अब तक विवाद कायम है। घटना जालोर के राजपुरा गांव में सुंधा माता मंदिर की तलहटी के पास एक आश्रम की है। पुलिस ने बताया कि गुरुवार देर रात आश्रम के साधु रविनाथ (60) ने आश्रम में ही फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मामला आश्रम के पास एक जमीन से जुड़ा है। मौके से पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है। जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया।

जानकारी के अनुसार राजपुरा गांव में मंदिर के बाहर सड़क के किनारे रविनाथ महाराज का शव शुक्रवार सवेरे एक पेड़ से लटकता मिला था। इसकी सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी। उसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। इस घटना की जानकारी दलित समुदाय को लगने के बाद समुदाय के लोग मौके पर एकत्रित होना शुरू हो गए। दलित समुदाय के लोगों का आरोप है कि सुसाइड नोट को सार्वजनिक कर नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए, अन्यथा शव को उतारने नहीं दिया जाएगा। इसके चलते गतिरोध चल रहा है।

जानकारी के अनुसार बीते दिनों में भीनमाल के विधायक पूराराम चौधरी और व संत रविदास के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई थी। उसके बाद अब यह आत्महत्या का मामला सामने आ गया है। इससे दलित समुदाय में आक्रोश व्याप्त है। जानकारी के अनुसार सुसाइड नोट में जमीन को लेकर भीनमाल से भाजपा विधायक पूराराम चौधरी पर परेशान करने के आरोप लगाए गए हैं। आश्रम के पीछे भीनमाल विधायक पूराराम सहित कुछ लोगों की जमीन है, लेकिन रास्ता नहीं था। इस पर साधु के आश्रम में से रास्ता लेने को लेकर विवाद चल रहा था। तीन दिन पहले विधायक ने अपने लोगों को आश्रम में खाई खोदने भेजा था। उन्होंने आश्रम के पास कुछ खुदाई भी की। इसके बाद से साधु रविनाथ परेशान थे।

साधु के सुसाइड की जानकारी मिलते ही आश्रम में साधु-संतो की भीड़ जुट गई। लोगों के आक्रोश को देखते हुए जसवंतपुरा, रानीवाड़ा और भीनमाल थाने से पुलिस जाब्ता बुलाकर मौके पर तैनात किया गया है। सूचना के बाद एडीएम राजेंद्र सिंह, सांचौर डीएसपी रूप सिंह इंदा सहित पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने साधु के सुसाइड नोट को जब्त कर लिया। इसे किसी को भी नहीं दिखाया गया है। इससे लोगों में नाराजगी है। गुस्साए लोगों ने अंतिम संस्कार करने से पहले इस सुसाइड नोट का खुलासा करने की मांग की है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद अंतिम संस्कार करने की बाद ही अड़े हैं।

इस मामले में भीनमाल विधायक पूराराम चौधरी का कहना है कि उनकी खातेदारी जमीन सुंधा माता तलहटी के पास हनुमान आश्रम के पास है। जिसे 30 साल पहले खरीदा था। उसमें रिसॉर्ट बनाने की प्लानिंग की जा रही है। तहसीलदार से पैमाईश की इजाजत लेकर गुरुवार को पटवारी से जमीन नपवाई थी। हमने तो 2 दिनों से साधु के साथ राजी खुशी खेत को नपवाया था। हमारे बीच में कोई विवाद नहीं था। उनके कहने से मैंने मेरी खातेदारी में से रास्ते के लिए जगह छोड़ी है, जो मौके पर पड़ी है।

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