कोयला खदान पर फैसला: राजस्थान बिजली संकट के लिए बड़ी खबर, परसा खदान परियोजना के सामने लगी सभी पांचों याचिका उच्च न्यायालय में खारिज

राजस्थान को सस्ते कोयले और बिजली के अलावा स्थानीय लोगो को अब रोजगार और राज्य सरकार को राजस्व मिलने का रास्ता भी साफ़ हो गया है। देश मे कोयले की वर्तमान किल्लत को देखते हुए यह खदान के शुरुआत हेतु आवश्यक था।

राजस्थान बिजली संकट के लिए बड़ी खबर, परसा खदान परियोजना के सामने लगी सभी पांचों याचिका उच्च न्यायालय में खारिज

बिलासपुर | परसा खदान परियोजना के कोल बेयरिंग एक्ट के तहत् अधिग्रहण के विरोध में छत्तीसगढ़ के उच्च न्यायालय के सामने दायर सभी पांच याचिका आज खारिज हो गई। माननीय उच्च न्यायालय ने देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण परियोजना के सामने लगाए गए सभी अरोपों और दलीलों को खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद परसा खदान परियोजना की तरफ में तस्वीर साफ़ हो गयी है। राजस्थान को सस्ते कोयले और बिजली के अलावा स्थानीय लोगो को अब रोजगार और राज्य सरकार को राजस्व मिलने का रास्ता भी साफ़ हो गया है। देश मे कोयले की वर्तमान किल्लत को देखते हुए यह खदान के शुरुआत हेतु आवश्यक था।

माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने याचिका क्रमांक Wpc/2541/2020, WPC/302/2022, WPC/698/2022, WPC/ 560/2022, WPC/1247/2022 राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित परसा कोल ब्लॉक में खदान करने तथा जमीन अधिग्रहण के विरुद्ध कुछ लोगो द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए कोर्ट ने परसा कोल ब्लॉक के लिए जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को विधिसम्मत मानते हुए अपना फैसला सुनाया है।

इसी के साथ ही वकील सुदीप श्रीवास्तव और अन्य व्यक्तिओ द्वारा चलाई गई गलत मुहीम पर भी अब लगाम लग गई। उल्लेखनीय है की कुछ सम्मिलित लोगो ने इस केस की सुनवाई के दौरान माननीय कोर्ट की कार्यवाही को मीडिया के सामने गलत तरीके से पेश करके राजस्थान और छत्तीसगढ़ के हितो के विरोध में अभियान चलाने का पिछले कुछ महीनों में विफल प्रयास किया था।

न्यायालय के निर्णय के बाद परसा खदान परियोजना की तरफ में तस्वीर साफ़ हो गयी है। राजस्थान को सस्ते कोयले और बिजली के अलावा स्थानीय लोगो को अब रोजगार और राज्य सरकार को राजस्व मिलने का रास्ता भी साफ़ हो गया है। देश मे कोयले की वर्तमान किल्लत को देखते हुए यह खदान के शुरुआत हेतु आवश्यक था।

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सुदीप श्रीवास्तव और अन्य ने सरगुजा  और सूरजपुर जिले में स्थित कोल ब्लॉक को अवैध बताते हुए माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। जिसमें उन्होंने उपरोक्त खदान को कोल बेयरिंग एक्ट (सी बी सी) के तहत भू अधिग्रहण को एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के अवैध आरोप लगाए थे।

राजस्थान की परसा खदान को हाल ही में छत्तीसगढ़ राज्य और केंद्र की सरकारों ने नियमानुसार आगे बढ़ाने के लिए हरी झंडी दे दी थी। जिसको लेकर जिन ग्रामीणों ने अपनी जमीन इस परियोजना के लिए दी थी उनके लिए रोजगार के नए विकल्प खुल जायेंगे। स्थानीय लोगों ने हाल ही में छत्तीसगढ़ और राजस्थान के मुख़्यमंत्रीओ को पत्र लिखकर कहा था की वह बाहरी लोगों के दबाव में न आये और परसा खदान को जल्दी शुरू करें। कई दिनों से परसा क्षेत्र के स्थानीय लोग बाहरी तत्वों और पेशेवर NGO के सामने अपना विरोध प्रदर्शन चला रहे है।

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राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ निर्मल शुक्ला तथा अधिवक्ता शैलेंद्र शुक्ला और राजस्थान कोलियरीज के ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ तथा अर्जित तिवारी तथा शासन के ओर से हरप्रीत सिंह अहलूवालिया उपमहाधिवक्ता ने पक्ष रखा।

याचिकाकर्ता के ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव तथा अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव, रोहित शर्मा, रजनी सोरेन और सौरभ साहू ने पक्ष रखा। उच्च न्यायालय में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित परसा कोल ब्लॉक अधिग्रहण के संबंध में गत दिनों 30 अप्रैल और 4 मई की सुनवाई के बाद निर्णय को सुरक्षित रखा गया था।

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