सिरोही: पुलिस ने बीस दिन में बंद किया मामला, एक साल बाद खुला पिटारा

- सालभर पहले परिवाद को जांच में रख किया था दाखिले दफ्तर - नगर परिषद सभापति व आयुक्त के खिलाफ गैंगरेप का मामला

पुलिस ने बीस दिन में बंद किया मामला, एक साल बाद खुला पिटारा

सिरोही | नगर परिषद सभापति महेंद्र मेवाड़ा व आयुक्त महेंद्रसिंह चौधरी समेत अन्य के खिलाफ दर्ज हुए गैंगरेप के मामले में पुलिस बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है। इसलिए कि मामला सालभर पहले भी पुलिस के पास आया था, लेकिन उसे दाखिले दफ्तर कर दिया गया। पीडि़ताओं ने कोर्ट के जरिए परिवाद भेजा तो पुलिस को मामला दर्ज करना पड़ा।

प्रकरण को पुलिस मान चुकी है झूठा
उल्लेखनीय है कि इन पीडि़ताओं ने गत वर्ष भी इस तरह का परिवाद पुलिस को दिया गया था, लेकिन पुलिस ने परिवाद को जांच में रखते हुए ही दाखिले दफ्तर कर दिया। इस प्रकरण को पूरी तरह झूठा मानते हुए एफआर लगा दी गई। अब पुलिस के पास यह मामला वापस पहुंचा, जिस पर एफआईआर दर्ज करनी पड़ी।

आखिर पुलिस क्यों दबाए रखना चाह रही
सभापति व आयुक्त समेत अन्य के खिलाफ दर्ज हुए गैंगरेप के मामले ने राजनीतिक स्तर पर भूचाल ला दिया है, लेकिन पुलिस अब भी इस मामले में चुप्पी साधे बैठी है। दर्ज हुए मामले को लेकर भी पुलिस अधिकारी कोई प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। आखिर ऐसा क्या है, जो पुलिस इस मामले को अंदर ही अंदर दबाए रखना चाह रही है।

कुछ दिन की जांच के बाद एफआर
सालभर पहले पीडि़ताओं की ओर से दिए गए परिवाद को पुलिस ने दर्ज तक नहीं किया था। इसे जांच के अधीन रखा तथा कुछ ही दिनों में जांच पूरी करते हुए मामले में एफआर लगा दी। मामले में सत्यता कितनी है यह तो जांच के बाद ही पता चल सकता है, लेकिन पीडि़ताओं की ओर से आए परिवाद को दर्ज किए बगैर ही जांच में रखना उचित प्रतीत नहीं होता।

गैंगरेप के बाद ब्लैकमेलिंग का आरोप
उल्लेखनीय है कि सिरोही नगर परिषद सभापति महेंद्र मेवाड़ा एवं आयुक्त महेंद्रसिंह चौधरी के खिलाफ पाली जिला निवासी बीस से ज्यादा महिलाओं ने गैंगरेप का मामला दर्ज करवाया है। इसमें आरोप लगाया है कि नौकरी देने के बहाने उनको सिरोही बुलाया गया तथा रात को एक जगह रूकवा कर खाने में नशीली दवाई खिलाई। बेहोश करने के बाद उन महिलाओं के साथ सभापति, आयुक्त व उनके दस-पंद्रह साथियों ने गैंग रेप किया। इसके वीडियो बनाए तथा अब ये लोग ब्लैकमेल कर रहे हैं।

पुलिस तो बयान देने से भी बच रही
पुलिस इस पूरे मामले में कोई बयान देने से भी बच रही है। पुलिस अधिकारी केवल इतना ही बताते हैं कि मामले में जांच चल रही है इसके अलावा कुछ नहीं बता सकते। एक साथ बीस से ज्यादा महिलाओं की ओर से मामला दिए जाने के बावजूद पुलिस का यह रवैया समझ से परे है।

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