विधानसभा उप चुनाव 2021: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने चारों सीटों पर उप चुनावों के लिए कमर कसी, कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी अब अविनाश व्यास को

उप चुनावों में यह राष्ट्रीय पार्टी परिणामों को प्रभावित करने का पूरा मानस बना चुकी है। पार्टी ने अविनाश व्यास को राजस्थान प्रदेश के लिए कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने के साथ ही संगठन को इन उप चुनावों में प्रभावपूर्ण कार्य का काम सौंप दिया है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने चारों सीटों पर उप चुनावों के लिए कमर कसी, कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी अब अविनाश व्यास को

जयपुर | प्रदेश में नए राजनीतिक विकल्प के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए कमर कस चुकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने अब संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से खड़ा करना शुरू कर दिया है। सहाड़ा, सुजानगढ़, राजसमंद और भींडर में हो रहे उपचुनावों से ही अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयारियों को देखकर ऐसा ही लग रहा है कि इन चुनावों में यह राष्ट्रीय पार्टी परिणामों को प्रभावित करने का पूरा मानस बना चुकी है। पार्टी ने अविनाश व्यास को राजस्थान प्रदेश के लिए कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने के साथ ही संगठन को इन उप चुनावों में प्रभावपूर्ण कार्य का काम सौंप दिया है।


प्रदेशाध्यक्ष उम्मेदसिंह चम्पावत का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व के निर्देशानुसार आगामी रणनीति पर काम चल रहा है। सभी सीटों पर ऐसे समीकरण बन रहे हैं कि पार्टी यहां पर प्रभावी प्रदर्शन कर सकती है। इन्हीं समीकरणों के आधार पर संगठन काम कर रहा है। संभावित उम्मीदवार के नाते कई लोग सम्पर्क भी साध रहे हैं और एनसीपी को यहां चुनाव मैदान में आने का निमंत्रण भी दे रहे हैं। ये जनभावनाएं हैं जो आज तक शासन करती आई पार्टियों के विरुद्ध खड़ी हुई है। चम्पावत कहते हैं कि लोकतंत्र की खासियत यही है कि लोगों को चयन के लिए प्रभावी और निष्पक्ष राजनीति का विकल्प मिले और हम वही अवसर लोगों को देने के लिए आए हैं। चम्पावत ने कार्यकारी अध्यक्ष की घोषणा करते हुए अविनाश व्यास को निर्देश दिए हैं कि वे संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाएं। व्यास अब आगामी विधानसभा उपचुनावों के मद्देनजर पार्टी अपने उम्मीदवारों को चिह्नित करने और संगठन को मजबूत करने में जुट गए हैं। व्यास पंजाब नेशनल बैंक में बड़े पदों पर प्रबंधन देख चुके हैं और सेवानिवृत्ति के बाद पार्टी से जुड़े हैं।

कई जगह चुनाव परिणाम करेंगे तय

बाली के विधानसभा कार्यालय में हुई बैठक में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा की गई। प्रदेश अध्यक्ष उम्मेद सिंह चंपावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में एनसीपी के वरिष्ठ नेता बृजमोहन गुर्जर विधानसभा सहाड़ा एवं युवा प्रदेश महासचिव मोहम्मद मारूफ हुसैन मुल्तानी ने प्रदेश अध्यक्ष को राजस्थान निकाय चुनाव को लेकर प्रत्याशियों का फीडबैक दिया। उन्होंने आगामी समय में होने वाले उपचुनाव को लेकर चर्चा की गई। जिसमें पार्टी प्रदेश अध्यक्ष उम्मेदसिंह चंपावत ने कहा कि पार्टी तीनों विधानसभा सीटों पर मजबूती के साथ उपचुनाव लड़ेगी एवं वर्तमान परिदृश्य और लोगों की जन भावनाओं को देखते हुए निकाय चुनाव में चौंकाने वाले परिणाम सामने आएंगे।
नेताओं ने कहा कि मौजूदा निकाय चुनावों में पाली जिले एवं निवाई मैं पार्टी का बोर्ड बनेगा एवं कई जगहों पर एनसीपी किंग मेकर की भूमिका में होगी। एनसीपी के वरिष्ठ नेता बृजमोहन गुर्जर ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष चंपावत साहब के मार्गदर्शन में पार्टी राजस्थान में युवा, किसान मजदूर वर्ग में अपनी गहरी पैठ जमा रही है। जिससे सहाड़ा गंगापुर विधानसभा मैं महाराष्ट्र प्रवासी मतदाता बड़ी संख्या में मौजूद हैं। जिनकी एनसीपी के प्रति आस्था और जुड़ाव वर्षों से रहा हैं। जिसका फायदा एनसीपी को उपचुनाव में मिलेगा और पार्टी सहाड़ा में अपना परचम लहराने में कामयाब होगी।

उप चुनाव अलग से लड़ेगी एनसीपी
प्रदेश के कई निकाय चुनावों में अभी उम्मीदवार उतार चुकी एनसीपी विधानसभा उप चुनाव में भी अलग से उम्मीदवार उतारेगी। पहले भी स्थानीय चुनावों में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी पंचायत चुनाव में कांग्रेस का गणित बिगाड़ चुकी है। पाली के पूर्व सांसद बद्री जाखड़ ने खुले तौर पर मीडिया से संवाद में भी स्वीकारा की उन्हें एनसीपी की वजह से कई जगह नुकसान हुआ। अब बाली निकाय चुनावों को लेकर एनसीपी की तैयारियां बीजेपी-कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों के लिए चिंताजनक है।

राजपूत और ब्राह्मण वोट बैंक पर सीधी नजर
पार्टी के मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष उम्मेदसिंह चम्पावत ने इन चुनावों के मद्देनजर संगठन को जिस हिसाब से ढालने की शुरूआत की है, वह राजनीतिक रूप से प्रभावी रहेगा। सुजानगढ़, सहाड़ा, राजसमंद और भींडर की चारों ही सीटों पर राजपूत वोटर्स निर्णायक हैं। हालांकि सुजानगढ़ अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है, लेकिन वहां के बड़े जाति वर्ग वर्ग राजपूत और प्रवासियों से प्रदेशाध्यक्ष अपने स्तर पर सम्पर्क साध रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही का गणित बिगड़ने की पूरी सम्भावना है।

प्री बोर्ड की तरह देख रही है एनसीपी
बीजेपी-कांग्रेस का प्रदेश में बड़ा वोट बैंक है और बसपा इसमें किंचित घुसपैठ करती रही है। परन्तु बसपा के जीते उम्मीदवार अपनी ही पार्टियों को धोखा देते रहे हैं। यहां तक कि उसके जीते हुए विधायक बसपा संगठन की पोल यह कहकर खोल चुके हैं कि यहां तो पैसे लेकर टिकट दिए जाते हैं। पड़ोसी राज्य गुजरात में एनसीपी अब पैर जमा चुकी है और 2022 में होने वाले चुनावों में खम ठोकने के लिए तैयार है। परन्तु इससे पहले 2021 में राजस्थान विधानसभा उप चुनाव को वह प्री बोर्ड एक्जाम की तरह अपने आपको परखने का मन बना चुकी है। देखने वाली बात यह है कि राजस्थान में यह कैसे अपना प्रभाव व्यापक कर पाती है।

इन सीटों पर होने हैं चुनाव
सुजानगढ़: मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल के निधन के बाद यहां पर चुनाव होने हैं। यहां करीब दो लाख साठ हजार मतदाता हैं। यहां सुजानगढ़ और बीदासर दो बड़ी नगरपालिकाएं हैं। अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व इस सीट पर हर बार मेघवाल जाति से ही प्रत्याशी जीत रहा है। अन्य दलित वर्ग से प्रतिनिधित्व दोनों ही पार्टियों ने आज तक किसी को नहीं दिया है। यहां एनसीपी के लिए एक बड़ा अवसर बनता है। साथ ही यहां पर राजपूत और वैश्य वोटर्स की अधिकता भी है और मुम्बई में व्यापार करने वाले प्रवासियों की संख्या अधिक है। इन पर एनसीपी का प्रभाव भी है। यदि एनसीपी यहां प्रभावी उम्मीदवार उतारती है तो निश्चित तौर पर परिणाम बीजेपी और कांग्रेस की अपेक्षा प्रतिकूल ही आएंगे।

राजसमंद: पूर्व मंत्री किरण माहेश्वरी के निधन के बाद यहां होने वाले चुनावों में जीत के लिए कांग्रेस अपना दम-खम लगा रही है। कांग्रेस यहां से राजपूत उम्मीदवार को टिकट देती रही है और बीते चार चुनाव में लगातार हार रही है। यदि जातीय समीकरणों को यहां साधा जाए तो परिणाम यहां भी प्रभावित ही होंगे। यहां करीब दो लाख 20 हजार वोटर्स हैं।

सहाड़ा: विधायक कैलाशचंद्र त्रिवेदी के निधन के बाद से यहां सीट रिक्त है और चुनाव करवाए जाने हैं। यहां करीब ढाई लाख मतदाता हैं। राजपूत ब्राह्मण वर्ग के साथ ही यहां भी प्रवासियों की संख्या अच्छी खासी है। ऐसे में मुम्बई से सीधा प्रभाव वाली एनसीपी यहां के वोटबैंक में बड़ा सेंध मार सकती है।

भींडर : पूर्व मंत्री और विधायक गजेन्द्रसिंह शक्तावत के निधन के बाद रिक्त हुई यह सीट राजपूतों के वर्चस्व वाली सीट है। जनता सेना बना चुके पूर्व विधायक रणधीरसिंह भींडर का प्रभाव इतना है कि बीजेपी का संगठन ही इस सीट पर सर्वाधिक अप्रभावी है। ऐसे में एनसीपी अपने को विकल्प के रूप में प्रस्तुत करने की पूरी चाह रखती है।