भाई बहनों के जोड़े का रेला: चांदना में  22 वर्ष बाद तालाब हिलौर कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब 

बजते नासिक ढोल, सिर पर कलश धारण की महिलाएं, पुरुषों के सिर पर केसरिया साफा, मंगल गीत गाती महिलाएं, बढ़ते कदम, सालों का बेसब्री का इंतजार खत्म होने को लेकर हजारों की संख्या में भाई बहनों के जोड़े का रेला उमड़ पड़ा।

चांदना में  22 वर्ष बाद तालाब हिलौर कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब 

जालोर |  बजते नासिक ढोल, सिर पर कलश धारण की महिलाएं, पुरुषों के सिर पर केसरिया साफा, मंगल गीत गाती महिलाएं, बढ़ते कदम, सालों का बेसब्री का इंतजार खत्म होने को लेकर हजारों की संख्या में भाई बहनों के जोड़े का रेला उमड़ पड़ा। कुछ ऐसा ही नजारा रविवार सवेरे निकटवर्ती चांदना गांव में देखने को मिला।

डीजे की धुन पर नाचते गाते पहुंचे भाई बहनों के जोड़े
रविवार को चांदना गांव में रणवीरसिंह चौहान के घर से गाजे बाजों के साथ भाई बहनों का काफिला रवाना होकर सरपंच नैनसिंह चौहान, अभयसिंह चौहान के सानिध्य में विभिन्न जातियों के हजारों भाई बहनों ने गीत गाते हुए डीजे की धुन पर काम के मुख्य बस स्टैंड पर पहुंचे वहां से चांदना भेटाला मुख्य सड़क मार्ग पर स्थित तालाब पर पहुंचे जहां पर बागरा थाना अधिकारी तेजूसिंह की सुरक्षाकर्मियों के साथ पंडित उदयशंकर भट्ट के वैदिक मंत्रोचार के साथ तालाब की पूजा अर्चना के विधि विधान से भाई ने बहन को मटका हिलोरा, तालाब का पानी पिला, चुनरी उड़ा कर गूंगरी मात्तर खिलाई और एक दूसरे की रक्षा करने की कसम खाई उसी दौरान सवेरे नौ बजे हुए कार्यक्रम के आगाज से शाम करीब दो बजे तक चला।

अमन चैन खुशहाली की कामना

तालाब हिलोरने वाली महिलाओं ने तालाब की सात परिक्रमा लगाकर गांव में अमन चैन खुशहाली की कामना की। इस दौरान महिलाओं ने डीजे की धुन पर खूब नृत्य किया। इस मौके पर माधूसिंह चौहान, जगतावरसिंह चौहान, अभयसिंह चौहान, कांतिलाल, मोहनलाल मेघवाल, हरिपालसिंह, रमेश राजपुरोहित, सुरेश राजपुरोहित, किरणसिंह, महेंद्र सुथार समेत गांव के कई ग्रामीण मौजूद थे।

सालों का सपना हुआ साकार 

चांदना की बुजुर्ग महिलाओं ने बताया की शादी हुए करीब 50 साल बीत गए लेकिन तालाब हिलोरने की तमन्ना आज भी अधूरी रहने से प्रतिवर्ष मन में तालाब हिलोरने की आस लगाए बैठे थे, जो कि समय में रविवार को गांव में आयोजित तालाब हिलोरने के कार्यक्रम का सपना साकार हुआ। जिसमें काफी बुजुर्ग महिलाओं ने भाइयों के हाथ की चुनरी और तालाब का पानी पी कर मन प्रफुल्लित हुआ। इस कार्यक्रम में करीब पांच हजार भाई बहनों के जोड़ों ने भाग लिया।

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