जालोर बागरा पुलिस पर मिलीभगत के आरोप: जालोर के बागरा पुलिस थानाधिकारी पर रॉयल्टी कर्मचारियों से मिलीभगत के आरोप, ग्रामीणों ने एसपी से जांच अधिकारी बदलने की मांग की

जालोर पुलिस पर भी एक मामले में निर्दोष को फंसाने का आरोप लगाया जा रहा है। पीड़ित की ओर से ग्रामीणों ने जालोर पुलिस अधीक्षक से बागरा पुलिस थानाधिकारी पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए जांच अधिकारी बदलने की मांग की।

जालोर | सिरोही के बरलूट पुलिस थाना इलाके में निर्दोष व्यक्ति को हत्या के मामले में फंसाने के बाद राजस्थान पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे है।

सिरोही के बाद अब जालोर पुलिस पर भी ऐसे ही एक मामले में निर्दोष को फंसाने का आरोप लगाया जा रहा है। पीड़ित की ओर से ग्रामीणों ने जालोर पुलिस अधीक्षक से बागरा पुलिस थानाधिकारी पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए जांच अधिकारी बदलने की मांग की।

ग्रामीणों ने इस मामले में ज्ञापन देकर बताया कि पुलिस ने जांच में तथ्यों को ही बदल दिया। घटना स्थल बदलने के साथ ही दूर दराज शादी समारोह में शामिल युवक को वारदात में शामिल बताते हुए आरोपी बना दिया।

जबकि युवक घटना के दिन इलाके तक में मौजूद नहीं था। बागरा थानाधिकारी पर ग्रामीणों ने रायल्टी कर्मचारियों से मिलीभगत का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने जालोर SP के साथ जोधपुर रेंज डीआईजी को ज्ञापन दिया है।


ज्ञापन के साथ घटना स्थल की तस्वीरें
पाबू सिंह ने बताया कि 20 फरवरी की सुबह करीबन 10:30 बजे उस्मान खान आकोली बीबलसर गांव के निवासी मनोहर सिंह के मकान के आगे जालोर—भीनमाल रोड पर गाड़ी फॉर्च्यूनर खड़ी कर अंदर बैठा था।

तभी अचानक से दो बोलेरो कैंपर गाड़ी आकोली की तरफ से आई व फॉर्च्यूनर गाड़ी के आगे लगा दी। इसमें सवार बजरी रॉयल्टी कर्मचारी जगबीर सिंह, हरि सिंह व 8 अन्य कर्मचारी गाड़ी से उतर कर उस्मान खान पर हमला कर दिया।

इन्होंने मनोहर की गाड़ी में तोड़फोड कर दी। उस्मान खान भागते हुए पाबू सिंह की गली की तरफ भागा तभी हरि सिंह ने सरिए से वार कर ​उसे गिरा दिया। जगबीर सिंह और हरि सिंह ने जान से मारने की नीयत से मारपीट की। तभी ग्राम वासियों ने बीच-बचाव करके छुड़ाया।

भभूताराम नहीं था मौजूद, पुलिस ने फंसाया 
पाबू सिंह ने ज्ञापन में बताया कि पुलिस थानाधिकारी बागरा तेजू सिंह बजरी रॉयल्टी कर्मचारी से मिलीभगत कर निर्दोष लोगों को फंसा रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों द्वारा भभूताराम मेघवाल निवासी बिबलसर, गंगा सिंह तथा मनोहर सिंह व अन्य को भी आरोपी बनाया। इसमें भभूताराम घटना के दिन गांव में ही नहीं था। वह अजाराम मेघवाल की शादी में गया हुआ था।

पुलिस पर घटना स्थल बदलने का आरोप
ज्ञापन में बताया गया कि पुलिस व बजरी रॉयल्टी के कर्मचारियों की मिलीभगत से जांच में घटनास्थल को बदल दिया गया। पुलिस जांच में घटनास्थल स्कूल के सामने बताया गया। जबकि घटना मनोहर सिंह के मकान के आगे हुई। वहां की सीसीटीवी फुटेज मौजूद है।

वहीं बागरा थाना अधिकारी तेजू सिंह ने जांच रिपोर्ट में अवैध बजरी परिवहन का मामला है। जबकि इसमें फर्जी तरीके से ट्रेक्टर व ट्रेक्टर ड्राइवर को पेश किया गया।

28 फरवरी की सुबह 8 बजे बागरा थाना अधिकारी तेजू सिंह व पूरी टीम मनोहर सिंह के घर पर अवैध तरीके से घुसकर घर पर अकेली महिलाओं के साथ बदतमीजी की।

इसके बाद अवैध तरीके से ट्रैक्टर और ट्रॉली उठाकर ज़ब्त कर लिया गया। इसकी सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद है।

इस तरीके से गांव के निर्दोषों को पुलिस झूठे मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया गया।

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