पत्रकारिता का पुलित्जर पुरस्कार: बजफीड न्यूज एजेंसी की भारतीय मूल की पत्रकार मेघा को मिला पत्रकारिता का सबसे बड़ा पुरस्कार पुलित्जर अवॉर्ड

भारतीय मूल की महिला पत्रकार मेघा राजगोपालन को पत्रकारिता का सबसे बड़ा पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। बज़फीड न्यूज एजेंसी में खोजी पत्रकारिता में बेहतरीन कार्य करने पर मेघा सहित कई अन्य पत्रकारों को इस सम्मान से सम्मानित किया है।

बजफीड न्यूज एजेंसी की भारतीय मूल की पत्रकार मेघा को मिला पत्रकारिता का सबसे बड़ा पुरस्कार पुलित्जर अवॉर्ड

नई दिल्ली।
भारतीय मूल की महिला पत्रकार मेघा राजगोपालन (Megha Rajagopalan) को पत्रकारिता का सबसे बड़ा पुलित्जर पुरस्कार (Pulitzer Prize) से सम्मानित किया गया है। बज़फीड न्यूज एजेंसी में खोजी पत्रकारिता में बेहतरीन कार्य करने पर मेघा सहित कई अन्य पत्रकारों को इस सम्मान से सम्मानित किया है।

मेघा ने अपने रिपोर्ट के जरिए चीन के डिटेंशन कैंपों की सच्चाई दुनिया के सामने रखी थी। उन्होंने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर बताया था कि चीन ने कैसे लाखों की संख्या में उइगुर मुसलमानों को कैद करके रखा हुआ है। मेघा राजगोपालन ने अपने पिता के बधाई संदेश को ट्वीटर पर पोस्ट किया है। इस मैसेज में उनके पिता मेघा को पुलित्जर पुरस्कार मिलने की बधाई दी है। उनके पिता ने लिखा कि बधाई मेघा, मम्मी ने मुझे अभी यह संदेश फॉरवर्ड किया है। पुलित्जर पुरस्कार। बहुत बढ़िया। इसके जवाब में मेघा ने पिता को थैंक्स लिखकर जवाब दिया।

मेघा के साथ इंटरनेट मीडिया बजफीड न्यूज के दो पत्रकारों को भी पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दिया गया। पत्रकार नील बेदी को भी स्थानीय रिपोर्टिंग कैटेगरी में पुलित्जर पुरस्कार दिया गया है। उन्होंने फ्लोरिडा में सरकारी अधिकारियों के बच्चों की तस्करी को लेकर टंपा बे टाइम्स के लिए इंवेस्टीगेशन स्टोरी की थी। पत्रकारिता के क्षेत्र में पुलित्जर पुरस्कार सबसे पहले 1917 में दिया गया था और इसे अमेरिका में इस क्षेत्र का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है। पत्रकारिता के क्षेत्र में 2020 जैसे वर्ष कम ही रहे होंगे जब जो कुछ भी हुआ उस पर कोविड-19 का प्रभाव रहा। पहले पुरस्कार समारोह का आयोजन 19 अप्रेल को होना था लेकिन इसे जून तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। पिछले साल भी विजेताओं की घोषणा दो हफ्ते की देरी से हुई थी क्योंकि बोर्ड सदस्य महामारी संबंधी परिस्थितियों के कारण व्यस्त थे और उम्मीदवारों के आकलन के लिए उन्हें अधिक समय की जरूरत थी।

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