Rajasthan @ फोन टैपिंग केस और ओएसडी: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी की याचिका पर सुनवाई जनवरी तक टली, अब गिरफ्तारी भी नहीं...

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में आज सुनवाई टलगई है। ओएसडी को कोर्ट ने राहत देते हुए सुनवाई अगले साल तक टाल दी। अब अगले साल  जनवरी में 13 को इस मामले में सुनवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के ओएसडी को हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से राहत बरकरार रखी है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी की याचिका पर सुनवाई जनवरी तक टली, अब गिरफ्तारी भी नहीं...

जयपुर। 
राजस्थान में फोन टैपिंग केस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot)के ओएसडी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट(Delhi High Court) में आज सुनवाई टलगई है। ओएसडी को कोर्ट ने राहत देते हुए सुनवाई अगले साल तक टाल दी। अब अगले साल  जनवरी में 13 को इस मामले में सुनवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के OSDको हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से राहत बरकरार रखी है। इससे अब अगले आदेश तक ओएसडी की गिरफ्तारी नहीं होगी। यह राहत जारी रहेगी। दिल्ली की क्राइम ब्रांच CM गहलोत के ओएसडी को अगले आदेश तक गिरफ्तार नहीं कर पाएगी।


दिल्ली क्राइम ब्रॉच ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat) की शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज कर नोटिस भेजा था। इस पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी लोकेश शर्मा ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने दो सुनवाई में मुख्यमंत्री गहलोत के ओएसडी को दो बार गिरफ्तारी से राहत दी। अगस्त माह में सुनवाई के समय इस केस में अगली सुनवाई आज तय की थी। इससे पहले 3 जून को दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकेश शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए 6 अगस्त तक गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी। गौरतलब है कि शेखावत ने इस साल मार्च अंत में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में लोकेश शर्मा के साथ पुलिस अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। शेखावत ने राजस्थान की कांग्रेस सरकार पर फोन टैपिंग का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत(Chief Minister Ashok Gehlot) के ओएसडी लोकेश शर्मा को नामजद आरोपी बनाया था। यह मामला भी उस वक्त सामने आया था जब पुर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट खेमे की बगावत के दौरान ओएसडी ने सोशल मीडिया पर तीन ऑडियो सर्कुलेट किए थे। इन  ऑडियो में गजेंद्र सिंह शेखावत और कांग्रेस विधायक भंवरलाल शर्मा के बीच बातचीत का दावा किया गया। इसके साथ ही सरकार गिराने के लिए विधायकों की खरीद फरोख्त का भी आरोप लगाया। इसी साल मार्च में राजस्थान विधानसभा में फोन टैपिंग का विवाद उछला था। विधानसभा में दो दिन में भारी हंगामे किए गए, संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल (Shanti Dhariwal)ने सदन में जवाब दिया कि मुख्यमंत्री के ओएसडी के पास कहीं से आए ऑडियो में विधायकों की खरीद फरोख्त की बातचीत है। हालांकि इसके बाद सरकार ने गैरकानूनी तरीके से किसी के फोन टैप करने के आरोपों को गलत बताया था। मामला तूल पकड़ गया तो लोकसभा और राज्यसभा में भी उठाया गया और शेखावत ने दिल्ली पुलिस से इस मामले की जांच करने की मांग की। इस पर दिल्ली पुलिस ने मुख्यमंत्री गहलोत के ओएसडी और सरकारी मुख्य सचेतक को पूछताछ के लिए पेश होने के नोटिस दिए थे।

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