राज्यभर में किया प्रदर्शन और दिए ज्ञापन: EWS आरक्षण की विसंगतियों को दूर किया जाए

गुजरात, राजस्थान सहित अन्य राज्यो ने राज्य की परिस्थितियों अनुसार संपत्ति की शर्तों को हटाकर मात्र आठ लाख वार्षिक आय को ही मापदंड माना है।अतः पूरे देश मे एक नियम की बजाय राज्यो द्वारा तय नियमो से बने प्रमाण पत्र को केंद्र में भी मान्यता दी जाए,जिससे प्रार्थी को अलग अलग प्रमाण न बनाने पड़े व शर्ते भी स्थानीय

EWS आरक्षण की विसंगतियों को दूर किया जाए
EWS Reservation Notice in Jalore

Jaipur | श्री क्षत्रिय युवक संघ के आनुषंगिक संगठन श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन के तत्वावधान में प्रदेश भर में EWS आरक्षण में विद्यमान विसंगतियों के सम्बंध में प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देने की मुहिम प्रारम्भ की गई है।

इसके तहत पूरे प्रदेश में सैकड़ो स्थानों पर ज्ञापन दिए जा रहे है, इसी कड़ी में आज जयपुर,जालोर,सिरोही,बाड़मेर,भीलवाड़ा,अजमेर,जैसलमेर,टोंक,कोटपूतली,सीकर,पाली,गंगानगर जिलों में ज्ञापन दिया गया।

आर्थिक रूप से पिछड़े अनारक्षित वर्गों को आरक्षण देने हेतु प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए उसमें विद्यमान विसंगतियों को दूर करने का निवेदन किया गया। केंद्र में आर्थिक पिछड़ा वर्ग के आरक्षण की पात्रता हेतु आय के साथ संपत्ति की शर्तों को भी शामिल किया गया है।

चूंकि भारत विविधताओं का देश है अतः सम्पूर्ण भारत की भूमि एक सी उर्वरक व उत्पादक नहीं है,साथ ही संपत्ति की कीमतों में भी भारी अंतर है।

गुजरात, राजस्थान सहित अन्य राज्यो ने राज्य की परिस्थितियों अनुसार संपत्ति की शर्तों को हटाकर मात्र आठ लाख वार्षिक आय को ही मापदंड माना है।

अतः पूरे देश मे एक नियम की बजाय राज्यो द्वारा तय नियमो से बने प्रमाण पत्र को केंद्र में भी मान्यता दी जाए,जिससे प्रार्थी को अलग अलग प्रमाण न बनाने पड़े व शर्ते भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल हो।

इस मांग की पुष्टि के लिए पिछले वित्त वर्ष में केंद्र व राज्य में बने EWS के प्रमाणपत्रों के आंकड़े संलग्न किये गए जिससे ज्ञात होता है कि राज्य व केंद्र में बने प्रमाणपत्रों का अनुपात 70:30 है। साथ ही केंद्र में अधिकतम आयु सीमा,न्यूनतम अहर्ताक,फीस आदि में अन्य वर्गों को मिले आरक्षण की तरह छूट दी जाए।

साथ ही प्रमाणपत्र की वैधता एक वर्ष की अपेक्षा तीन वर्ष की जाए,कतिपय राज्य सरकारों ने ऐसा प्रावधान किया है,अतः केंद्र में भी ये लागू हो जिससे आर्थिक रूप से कमजोर को इस आरक्षण का पूरा लाभ मिल सके।

इसी के साथ ही इसमें आय की इकाई परिवार को माना गया है और परिवार में माता पिता,पति,पत्नी,अविवाहित भाई,बहन सबकी आय सम्मिलित है इससे प्रक्रियागत परेशानी होती है व आय की गणना की प्रक्रिया जटिल हो जाती है।

विवाहित महिला के लिए यह और अधिक कठीन हो जाता है क्योंकि उसके ससुराल व पीहर दोनों पक्षो की आय को मानने का प्रावधान है जिससे दोनों स्थानों के प्रशासनिक कार्यालय में चक्कर लगाने पड़ते है।अतः आय की गणना अन्य क्रिमीलेयर आरक्षण की तरह केवल माता पिता की आय से की जाए।

साथ ही इस वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रावास,छात्रवृत्ति आदि की सुविधा की जाए व राष्ट्रीय आर्थिक पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया जाए जिससे इस वर्ग के हितों का न्यायपूर्ण संरक्षण हो सके।

इसके अलावा मुख्यमंत्री से ज्ञापन के माध्यम से यह मांग की गई कि राजस्थान विधानसभा में 16 जुलाई 2008 व 23 सितंबर 2015 को सर्वसम्मति से अनारक्षित वर्ग को 14% आरक्षण देने का विधेयक पारित किया गया था जबकि वर्तमान में 10% ही दिया गया है अतः संविधान के अनुच्छेद 15(6) व 16(6) में दिए गए अधिकारों का प्रयोग करते हुए इसे 14% किया जाए।

साथ ही यह आरक्षण केवल सरकारी नौकरी व शिक्षा में ही दिया गया जबकि अन्य सभी आरक्षण पंचायती राज व अन्य स्थानीय स्वायत्तशासी संस्था चुनावो में भी लागू है।

अनारक्षित वर्ग के आर्थिक पिछड़ा वर्ग का स्थानीय राजनिति में प्रतिनिधित्व निरन्तर घटता जा रहा है अतः मुख्यमंत्री से  राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 102 व राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009  की धारा 337 में प्रदत अधिकारों का उपयोग करते हुए पंचायती राज संस्थाओं,नगर निकायों व अन्य सभी स्वायत्तशासी संस्थाओं में लागू कर अनुग्रहित करने का निवेदन किया गया ताकि आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग को स्थानीय राजनीति में समुचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सके।

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