विधानसभा में परीक्षा संशोधन विधेयक: राजस्थान की भर्ती प​रीक्षाओं में धांधली के बाद गहलोत सरकार ने विधानसभा में ध्वनिमत से पारित किया परीक्षा संशोधन विधेयक

राजस्थान विधानसभा ने गुरूवार को राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधयेक 2022 को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

राजस्थान की भर्ती प​रीक्षाओं में धांधली के बाद गहलोत सरकार ने विधानसभा में ध्वनिमत से पारित किया परीक्षा संशोधन विधेयक

जयपुर।
राजस्थान विधानसभा ने गुरूवार को राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधयेक 2022 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। 
इससे पहले उच्च शिक्षा राज्य मंत्री राजेन्द्र यादव ने विधेयक को चर्चा के लिए सदन में प्रस्तुत किया।


उच्च शिक्षा राज्य मंत्री राजेन्द्र यादव  ने सदन में हुई चर्चा के बाद विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों पर प्रकाश डाला। 
यादव ने कहा कि राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 1992 की धारा 8 में राज्य सरकार द्वारा गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से इस अधिनियम की अनुसूची में किसी परीक्षा को जोड़ने का तो प्रावधान है परन्तु अनुसूची में से किसी परीक्षा को हटाने का प्रावधान नहीं है।
इसलिए इस अधिनियम की अनुसूची में से किसी परीक्षा को हटाने के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 1992 की धारा 8 में आवश्यक संशोधन किया जाना प्रस्तावित है। 
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम की अनुसूची में भर्ती परीक्षाओं के संबंध में आज नया बिल पारित करवा लिया गया है। इस संशोधन के पश्चात् जरिये नोटिफिकेशन भर्ती परीक्षाओं को इसमें से हटाया जा सकेगा।यादव ने बताया कि अब अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले परीक्षार्थियों के लिए दंडात्मक प्रावधान के अंतर्गत तीन साल तक का कारावास, न्यूनतम एक लाख रूपये का अर्थदंड एवं सार्वजनिक परीक्षा से दो वर्ष के लिए वंचित किया जाएगा।
परीक्षा एजेंसी के साथ मिलीभगत कर अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाला परीक्षार्थी सहित किसी भी व्यक्ति को 5 से 10 वर्ष तक कारावास एवं 10 लाख से 10 करोड़ रुपए तक का अर्थदंड दिए जाने का प्रावधान किया गया है। 
 यादव ने बताया कि अपराध के आगम से प्राप्त सम्पत्ति की जब्ती, कुर्की व राजसात करने के संबंध में प्रावधान किए गए है।
इसमें अनुसंधान अधिकारी द्वारा राज्य सरकार की पूर्वानुमति से चल या अचल सम्पत्ति को जब्त किया जा सकेगा। मैनेजमेंट या संस्था द्वारा अपराध करने पर उस संस्था को सदैव के लिए बैन एवं दोषी पाये जाने पर परीक्षा पर हुए खर्चे की भरपाई के लिए संस्था या प्रबंधन की सम्पत्ति को नीलाम किया जाएगा।
इस प्रकार के अपराध संज्ञेय, गैर जमानती एवं नॉन कम्पाउंडेबल होंगे। अपराधों की ट्रायल के लिए सेशन कोर्ट का प्रावधान किया गया है। 
अनुसंधान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी या उससे ऊपर के अधिकारी द्वारा किया जायेगा।  
उच्च शिक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि 1992 के अधिनियम के अनुसार परीक्षार्थियों के द्वारा अनुचित साधनों का प्रयोग किये जाने पर तीन साल तक कारावास अथवा दो हजार रूपये तक का जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान रहा है।
उन्होंने कहा कि हम सभी को आरोप-प्रत्यारोप के बजाय समाज के लिए कलंक ऐसे मामलों की रोकथाम के प्रयास करने चाहिए।
इस विधेयक से सख्ती आयेगी, आगे और भी सुझाव आने पर धाराएं जोड़ सकते है। राज्य सरकार द्वारा शिक्षा क्षेत्र के विकास के लिए रेग्युलेटरी ऑथोरिटी ला रहे है। इससे शिक्षा के सभी क्षेत्र एक अम्ब्रेला के नीचे आ जायेंगे। 

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