टोक्यो ओलिंपिक में रचा इतिहास: कभी हॉकी ट्रेनिंग के लिए नहीं होते थे रुपए, आज भारतीय हॉकी टीम की खिलाड़ी ने टोक्यो ओलिंपिक में रच दिया इतिहास

टोक्यो ओलिंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी ने इतिहास रच दिया। भारतीय महिला हॉकी टीम ने गु्रप-ए के अपने आखिरी मैच में साउथ अफ्रीका को 4-3 से हरा दिया। उत्तराखंड के हरिद्वार के छोटे से गांव रोशनाबाद की रहने वाली वंदना कटारिया ने इस मैच में 3 गोल दागकर इतिहास रच दिया।

कभी हॉकी ट्रेनिंग के लिए नहीं होते थे रुपए, आज भारतीय हॉकी टीम की खिलाड़ी ने टोक्यो ओलिंपिक में रच दिया इतिहास

 नई दिल्ली, एजेंसी। 
टोक्यो ओलिंपिक(Tokyo Olympics) में भारतीय महिला हॉकी टीम(Indian women's hockey team) की खिलाड़ी ने इतिहास रच दिया। भारतीय महिला हॉकी टीम ने ग्रुप-ए के अपने आखिरी मैच में साउथ अफ्रीका (South Africa)को 4-3 से हरा दिया। उत्तराखंड के हरिद्वार (Haridwar in Uttarakhand)के छोटे से गांव रोशनाबाद (Roshnabad)की रहने वाली वंदना कटारिया (Vandana Kataria) ने इस मैच में 3 गोल दागकर इतिहास रच दिया। वंदना ओलिंपिक मैच में गोल की हैट्रिक (hat-trick of goals)लगाने वाली भारत की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बन गईं। महज 29 साल की वंदना पहले खो-खो प्लेयर बनना चाहती थीं, लेकिन रनिंग स्पीड अच्छी होने की वजह से हॉकी खेलना शुरू कर दिया।


उधार के पैसे से हॉकी की शुरूआत, आज रचा इतिहास
वंदना कटारिया  (Vandana Kataria)  के पास 2005 में हॉकी की ट्रेनिंग के लिए पैसे तक नहीं थे, इसके बाद वंदना के पिता नाहर सिंह कटारिया ने किसी तरह उधार लेकर पैसों का इतंजाम किया और अपनी बेटी के सपनों को पूरी करने में मदद की। टोक्यो ओलिंपिक (Tokyo Olympics) से 3 महीने पहले अपे्रल में नाहर सिंह का निधन हो गया था। इसके बाद वंदना ने उनकी याद को ही अपनी प्रेरणा बना लिया। पिता के लिए ओलिंपिक मेडल(Olympic medal) जीतने को ही एकमात्र लक्ष्य बना लिया। वंदना हॉकी से पहले खो-खो खेलती थीं। 2002 में खो-खो की राष्ट्रीय प्रतियोगिता (National competition) में वंदना ने शानदार रिकॉर्ड बनाने के बाद कोच कृष्ण कुमार (Coach Krishna Kumar)ने 11 साल की वंदना की ऊर्जा देखकर हॉकी में उतारा था। वंदना बताती हैं कि उनकी रनिंग स्पीड अच्छी होने के कारण हॉकी खेलना शुरू किया।

7 भाई बहनों में सबसे छोटी हैं वंदना
वंदना अपने 7 भाई बहनों में सबसे छोटी हैं। वंदना के 5 भाई बहन खेल से ही जुड़े हैं। बड़ी बहन रीना कटारिया (Reena Kataria) भोपाल एक्सीलेंसी में हॉकी कोच और छोटी बहन अंजलि कटारिया (Anjali Kataria) हॉकी खिलाड़ी हैं। भाई पंकज कराटे (Pankaj Karate)और सौरभ फुटबॉल खिलाड़ी (Saurabh Football Players) एवं कोच हैं। वंदना के पिता बीएचईएल में काम करते थे। वंदना बताती हैं कि कई बार हालात ऐसे हो जाते थे कि बाहर ट्रेनिंग करने के लिए मेरे पास पैसे नहीं होते थे। पापा उधार लेकर मुझे ट्रेनिंग के लिए भेजते थे। 2005 में मैंने उतर प्रदेश टीम से खेलना शुरू किया। मेरी किस्मत अच्छी थी कि 2011 में स्पोट्र्स कोटे से रेलवे में जूनियर पद पर जॉब लग गई। 2010 में मेरा नेशनल महिला हॉकी टीम में सिलेक्शन हो गया। इसके बाद से वंदना ने कभी पीछ मुड़कर नहीं देखा। 2013 महिला हॉकी जूनियर वर्ल्ड कप(Women's Hockey Junior World Cup) में उन्होंने सबसे ज्यादा गोल दागे और टीम को ब्रॉन्ज मेडल जीतने में मदद की। 

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