सरजावाव दरवाजा सिरोही: ऐतिहासिक दरवाजे पर जीर्णोद्वार के नाम पर उद्घाटन बोर्ड क्या दे रहा संदेश! इतिहास की अनदेखी क्यों? आने वाली पीढ़ी इस बोर्ड से क्या पढ़ेगी इतिहास?

जीर्णोद्वार उद्घाटन नाम वाले पत्थर के साथ लग सकता है इस दरवाजे का इतिहास भी, ताकि लोग जाने कि जीर्णोद्वार करने वाले कौन और दरवाजा बनाने वाले कौन? रंग-रोगन और पुताई करने से बोर्ड लग सकता है तो बनाने वालों का क्यों नहीं!! आने वाली पीढ़ियां इस बोर्ड से क्या इतिहास पढ़ेगी? 

ऐतिहासिक दरवाजे पर जीर्णोद्वार के नाम पर  उद्घाटन बोर्ड क्या दे रहा संदेश! इतिहास की अनदेखी क्यों? आने वाली पीढ़ी इस बोर्ड से क्या पढ़ेगी इतिहास?
ऐतिहासिक दरवाजे पर जीर्णोद्वार के नाम पर उद्घाटन बोर्ड क्या दे रहा संदेश!

जीर्णोद्वार उद्घाटन नाम वाले पत्थर के साथ लग सकता है इस दरवाजे का इतिहास भी, ताकि लोग जाने कि जीर्णोद्वार करने वाले कौन और दरवाजा बनाने वाले कौन?

रंग रोगन और पुताई करने से बोर्ड लग सकता है तो बनाने वालों का क्यों नहीं!! आने वाली पीढ़ियां इस बोर्ड से क्या इतिहास पढ़ेगी? 

सिरोही। पिछले दिनों विधायक संयम लोढ़ा के मुख्य आतिथ्य और नगर परिषद सभापति की अध्यक्षता में सरजावाव दरवाजा सिरोही का जीर्णोद्वार के बाद समारोह पूर्वक कार्यक्रम हुआ। जिसका भारी भरकम पत्थर पर लिखा जीर्णोद्वार बोर्ड लगा दिया, जो सिरोही के ऐतिहासिक दरवाजे के पास ही शोभा बढ़ा रहा है।

इस विशाल जीर्णीद्वार बोर्ड को देखकर कम पढ़े लिखे लोगों को लगता है कि ऐतिहासिक दरवाजा बनाने वाले यही सब लोग है! क्या इतिहास के साथ यह धोखा नहीं?

इस जीर्णोद्वार उद्घाटन के इस पत्थर पर विधायक संयम लोढ़ा, सभापति महेंद्र मेवाडा, उपसभापति जितेंद्र सिंघी, नेता प्रतिपक्ष मगनलाल मीणा और आयुक्त के नाम दर्ज है।

यह शिलालेख नुमा बोर्ड शहरवासियों को ही नहीं, बाहर से आने वालों को भी शान से दिखेगा, नहीं दिखेगा तो इस सरजावाव दरवाजे का इतिहास।

सिरोही शहर का यह दरवाजा महज दरवाजा नहीं, अपराजित राज्य सिरोही का इतिहास है, मूल रूप से यह सिंदरथ दरवाजा है जो अब सरजावाव दरवाजे के रूप जाना जाता है।

पुराने समय में सुरक्षा की दृष्टि से बनाए गए इस दरवाजे के इतिहास का शिलालेख बोर्ड भी यहां लगता तो शहरवासी, बाहर से आने वाले लोग व युवापीढ़ी इतिहास को जानती, समझती व गर्व करती।

अगर कुछ राशि खर्च कर प्लास्टर, रंगाई-पुताई कर जीर्णोद्वार के नाम से स्थाई नाम लिखे पत्थर लग सकते हैं तो इस ऐतिहासिक दरवाजे के निर्माण वर्ष, किस राजा के समय में बना, किसने बनाया व इस दरवाजे से जुड़े कुछ ऐतिहासिक तथ्यों के साथ में दरवाजे के भीतरी दीवारों पर एक बढ़िया बोर्ड या शिलालेख क्यों नहीं लग सकता? यह प्रश्न तो लोग पूछेंगे ही। वरना आने वाले वर्षों में नई पीढ़ी तो इसी बोर्ड को इतिहास समझेगी।

राजस्थान के विभिन्न पर्यटन स्थलों व ऐतिहासिक इमारतों के इतिहास को दर्शाते बोर्ड या शिलालेख लगे मिलेंगे।

नगर परिषद सिरोही के वर्तमान पदाधिकारियों को अपना व विधायक का नाम अमर करने का ख्याल तो आया, लेकिन दरवाजा बनाने वाले इतिहास के किरदारों को याद नहीं करना प्रश्न खड़े करता है।

अभी भी लग सकता है बोर्ड या शिलालेख -- 
नगर परिषद सिरोही या विधायक चाहे तो सिरोही के इस ऐतिहासिक दरवाजे के इतिहास से जुड़े बिंदुओं के साथ एक शिलालेख बोर्ड उनके जीर्णोद्वार बोर्ड के साथ लग सकता है।

ताकि लोगों को ध्यान में रहे कि जीर्णोद्वार करने वाले कौन है और ऐतिहासिक दरवाजा बनाने वाले कौन? फिलहाल तो भारी भरकम इस शिलान्यास पत्थर को देखकर लगता है कि इतिहास बनाने वाले यही है!

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