सिरोही जिले की अमानवीय घटना: मासूम बेटी ठंड से कांपती रही, नहीं पसीजे थानेदार, कालंद्री पुलिस का अमानवीय चेहरा आया सामने

प्रवासी युवक व उसकी बच्ची को रात भर रखा थाने में, ठंड में ठिठुरती रही बच्ची, प्रवासी युवक वर्दीधारियों से लगाता रहा गुहार, पर नहीं पसीजा खाकी का दिल, ठंड में ठिठुरते हुए बच्ची को गुजारनी पड़ी रात

मासूम बेटी ठंड से कांपती रही, नहीं पसीजे थानेदार, कालंद्री पुलिस का अमानवीय चेहरा आया सामने

कालंद्री (सिरोही) | आमजन में विश्वास और अपराधियों में भय का नारा बुलंद करने वाली पुलिस यदि ठंड में ठिठुरती एक मासूम बच्ची को रात भर बिना कम्बल, बिना किसी गर्म कपड़ों के थाने में बिठाए रखे...। जबकि उस बच्ची का कोई कसूर नहीं तो उसे क्या कहा जाएगा? यही नहीं मासूमों के साथ थाने में इस तरह के व्यवहार पर देश के भविष्य कहे जाने वाले ये नौनिहाल पुलिस की कैसी छवि जीवनभर बनाएंगे, यह भी विचारणीय बिंदु है। 


मामला सिरोही जिले के कालन्द्री थाना क्षेत्र का है। बिना किसी अपराध के इस मासूम और उसके रिश्तेदार को थाने में बिठाए रखने की बात सामने आ रही है। युवक का एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें उसने अपने साथ हुई इस ज्यादती की शिकायत भी की है। अब अफसरों से उगलते  और निगलते दोनों ही नहीं बन पा रहा है। यदि युवक की बात सुनें तो यह मालूम होता है कि इस प्रवासी युवक और उसकी बच्ची का कसूर बस इतना था कि वे अहमदाबाद से अपने घर निम्बोड़ा आने के लिए अहमदाबाद से शाम के वक्त बस से रवाना हुए... अहमदाबाद से रवाना हुई ये बस रात के 2.30 बजे सिरोही पहुंचने वाली थी, और सिरोही से निम्बोड़ा जाने के लिए उस वक्त कोई साधन नहीं होता। प्रवासी युवक पूनमसिंह देवड़ा ने अपने गांव के एक परिचित युवक को फोन कर मोटरसाइकिल लेकर सिरोही लेने आने की बात कही।

जिस पर निम्बोडा गांव स्थित पूनमसिंह देवड़ा के घर से मोटरसाइकिल लेकर एक युवक सिरोही के लिए रवाना हुआ। गांव के ही दो अन्य लोग जो उसके परिचित थे, उन्हे सिरोही जाना था तो युवक ने उन दो युवकों को भी अपने साथ ले लिया। ये तीनों युवक जैसे ही कालंद्री पहुंचे, कालंद्री पुलिस ने इन्हे रोककर पूछताछ की। युवक ने पूरी बात पुलिस को बताई, पर पुलिस को उसकी बातों पर यकीन नहीं हुआ और तीनों को अपराधी मानकर थाने लाया। काफी कड़ी पूछताछ की फिर भी युवकों ने वहीं सच्चाई बयान की को वास्तविकता थी। कालंद्री पुलिस मोटरसाईकल चालक को साथ लेकर सिरोही पहुंची और प्रवासी युवक का इंतज़ार करने लगी। जैसे ही 2.30 बजे अहमदाबाद वाली बस भी सिरोही पहुंची और उस बस से उतरे पूनमसिंह व उसके साले की 10 साल की बच्ची को खूंखार अपराधी मानकर गाड़ी में बिठाकर पुलिस कालंद्री लेकर आई। वहां पर पूनमसिंह और उसके साथ 10 साल की बच्ची से अलग अलग कड़ी पूछताछ की गई। लेकिन पुलिस को कोई अपराधिक गतिविधि नज़र नहीं आई। बावजूद इसके पुलिस ने पूनमसिंह व बच्ची को रात भर थाने में रखा। 10 साल की बच्ची ठंड से कांप रही थी। उसके मुंह से शब्द तक नहीं निकल रहे थे, लेकिन इस बात से पुलिस को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। पूनमसिंह ने अपना जैकेट उतार कर बच्ची को पहनाया... और अलाप जलाकर बच्ची को ठंड से बचाने का जतन करता रहा.... कालंद्री पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर पूनमसिंह ने रात भर जिला एसपी को फोन लगाए।

एसपी साहब ने एक भी फोन रिसीव नहीं किया। अल सुबह पूनमसिंह ने कंट्रोल रूम में फोन कर आपबीती बताई। तब जाकर कालंद्री पुलिस ने पूनमसिंह व बच्ची को घर जाने दिया। लेकिन पूनमसिंह को लेने आने वाले युवक व दो अन्य युवकों को बिना किसी जुर्म के CRPC की धारा 151 में बंद कर रखा हैं। अब सवाल उठते हैं कि एक 10 साल की बच्ची को इतनी भयानक ठंड में पुलिस ने बिना किसी अपराध के थाने में क्यों बिठाया? आखिर कालंद्री पुलिस आम इन्सान के साथ अमानवीय आचरण क्यों कर रही हैं?... क्या कालंद्री पुलिस अपराधियों और आम इन्सान में फर्क नहीं कर पा रही? राजस्थान पुलिस का स्लोगन हैं "अपराधियों में भय, आमजन में विश्वास"  पर कालंद्री पुलिस के इस आचरण से आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास जागेगा? ये तो सिरोही जिले के पुलिस कप्तान ही बता पाएंगे।

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