Tokyo Paralympics में नोएडा के कलेक्टर: नोएडा के कलेक्टर ने टोक्यो पैरालिंपिक में पक्का किया मेडल, बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे

देश के लिए टोक्यो ओलिंपिक के साथ इस बार पैरालिंपिक गेम्स भी यादगार  साबित होने वाले है। पैरालिंपिक गेम्स में एक के बाद एक मेडल भारत की झोली में आते जा रहे हैं। टोक्यो पैरालिंपिक खेलों में 11वें दिन भी भारत के लिए अच्छी शुरूआत हुई। बैडमिंटन में एसएल-4 कैटेगरी में नोएडा के कलेक्टर सुहास यथिराज ने फाइनल में पहुंच...

नोएडा के कलेक्टर ने टोक्यो पैरालिंपिक में पक्का किया मेडल, बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचे

नई दिल्ली, एजेंसी। 
देश के लिए टोक्यो ओलिंपिक के साथ इस बार पैरालिंपिक गेम्स भी यादगार  साबित होने वाले है। पैरालिंपिक गेम्स में एक के बाद एक मेडल भारत की झोली में आते जा रहे हैं। टोक्यो पैरालिंपिक(Tokyo Paralympics) खेलों में 11वें दिन भी भारत के लिए अच्छी शुरूआत हुई। बैडमिंटन में एसएल-4 कैटेगरी में नोएडा के कलेक्टर सुहास यथिराज(Suhas yathiraj) ने फाइनल में पहुंच कर देश के लिए एक ओर मेडल पक्का कर दिया। पुरुष सिंगल्स बैडमिंटन एसएल 4 स्पर्धा में ग्रुप मैच में अपना दबदबा कायम रखते हुए सुहास ने आसान जीत दर्ज करवाई। सुहास देश के पहले आईएएस अधिकारी है जो टोक्यो पैरालिंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्वि कर रहे है। 

कर्नाटक के शिमोगा निवासी सुहास बचपन से होनहार 
आईएएस अधिकारी सुहास यथिराज कर्नाटक के शिमोगा के रहने वाले हैं। पैर खराब होने के बाद भी बचपन से ही सुहास खेलों को लेकर काफी एक्टिव नजर आते थे। सुहास ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी से कम्प्यूटर साइंस में इंजिनियरिंग पूरी की। इंजिनियरिंग पूरी करने के बाद सुहास ने बैंगलोर की एक कंपनी में नौकरी कर ली। सुहास ने भले ही बैंगलोर में नौकरी शुरू कर ली हो, लेकिन बार-बार उनके दिल में यही मलाल रहा कि उन्होंने अपने जीवन में समाज के लिए कुछ नहीं किया तो क्या फायदा।  UPSC की तैयारी शुरू की। 2005 में पिता की मौच के बाद सुहास टूट गए, लेकिन फिर भी उन्होंने खुद को संभाला और मन लगाकर UPSC की तैयारी की। साल 2007 में सुहास UP कैडर से IAS अधिकारी बने।

आईएएस बनने के बाद भी बैडमिंटन के लिए निकाला समय
यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद सुहास की पोस्टिंग आगरा में हुई। आगरा से जौनपुर, सोनभद्र, आजमगढ़. हाथरस, महाराजगंज, प्रयागराज और गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी के तौर पर कार्य संभाला। इस दौरान ड्यूटी खत्म होने के बाद सुहास टाइम निकालकर बैडमिंडन खेलने जाते थे।  धीरे-धीरे उन्होंने प्रोफेशनल तरीके से बैडमिंटन खेलना शुरू किया। 2016 में सुहास ने इंटरनेशनल मैच खेलना शुरू किया। सुहास यथिराज बीजिंग में हुई एशियाई पैरा-बैडमिंटन चैंपियनशिप में एक पेशेवर अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन टूर्नामेंट जीतने वाले पहले भारतीय नौकरशाह बने थे। उस समय वह आजमगढ़ के जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने इस चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर पूरी दुनिया में भारत और अपना नाम किया था।

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