जालोर: बिना खेले ही टीम को फाइनल से कर दिया बाहर, मांडोली क्रिकेट टीम ने अंपायर व कमेटी पर लगाया षड्यंत्र का आरोप

- दो गेंद खेलने के बाद उपजे विवाद के कारण मैच किया समाप्त - पूरा मैच खेले बिना ही जसवन्तपुरा को किया विजेता घोषित - एक तरफ समापन समारोह, दूसरी ओर खिलाड़ी दे रहे धरना

बिना खेले ही टीम को फाइनल से कर दिया बाहर, मांडोली क्रिकेट टीम ने अंपायर व कमेटी पर लगाया षड्यंत्र का आरोप
एक तरफ समापन समारोह, दूसरी ओर खिलाड़ी दे रहे धरना

जालोर | जालोर जिले में राजीवगांधी ग्रामीण ओलंपिक ब्लॉक स्तरीय प्रतियोगिता (Rajiv Gandhi Rural Olympic Block Level Competition) के अंतिम दिन खेला गया क्रिकेट का फाइनल मैच विवादों में घिर गया है। ये फाइनल मैच ग्राम पंचायत मांडोली व ग्राम पंचायत जसवन्तपुरा के बीच खेला गया खेला। जिसमें मांडोली टीम पहले बल्लेबाजी करने उतरी। मैच के प्रथम ओवर की दूसरी गेंद पर ही लेग अंपायर ने टीम के बैट्समैन अजय लौहार के कंधे पर गेंद लगने के बावजूद उन्हें आउट करार दे दिया। यह कार्य मेन अंपायर का होता है, जबकि मेन अंपायर ने कोई निर्णय ही नहीं दिया था। लेग अंपायर के इस निर्णय के बाद मैच में विवाद हो गया और खेल को रोकना पड़ा। 

मांडोली के खिलाड़ियों का कहना है कि, निर्णय को लेकर उनके खिलाड़ियों ने दोनों अंपायरों को मिलकर चर्चा करने की बात कही। परंतु लेग अंपायर जिस सोच के साथ अंपायरिंग करने आया था उसी सोच के साथ उसने फैसला बदलने से इनकार कर दिया और बैट्समैन को आउट ही करार दिया। अंपायर का कहना था कि, मेरा निर्णय सही है अब जो करना है वो करलो। अगर ओर ज्यादा बात की तो पूरी टीम को ही बाहर कर दूंगा।

मांडोली के खिलाड़ियों ने कहा कि, ये तो हम भी जानते हैं कि अंपायर का निर्णय अंतिम होता है और हमने स्वीकार्य भी किया था, परंतु अंपायर द्वारा आगे भी ऐसे ही निर्णय देने की बात कही जाने पर टीम को शंका थी कि अंपायर आगे भी ऐसे ही निर्णय दे सकता है। इस बात को लेकर हमने अंपायर बदलने की बात कही। परंतु कमेटी ने न तो हां में जवाब दिया और न ही ना में जवाब दिया। टीम के खिलाड़ियों से कहां की हम कुछ देर में कमेटी की बैठक रखकर आपको सूचना देते है कि अंपायर बदलना है या नही। परंतु कमेटी ने हमे गुमराह करते हुए इस बारे में कोई सूचना न देकर सीधे एकतरफा निर्णय दे दिया और जसवन्तपुरा को विजेता घोषित कर दिया। 

अंपायर तो अपायर कमेटी ने भी किया धोखा
टीम का कहना है कि, अंपायर के गैर जिम्मेदाराना व्यवहार के कारण हमने कमेटी से अंपायर को बदलने की बात कही थी परंतु कमेटी ने ही हमे धोखा दे दिया और 30 मिनट बाद ही बिना हमारा पक्ष जाने और बिना हमसे संपर्क किये जसवंतपुरा टीम को विजेता घोषित कर दिया। जबकि हमारी पूरी टीम मैदान में ही खड़ी रही और हम कमेटी के निर्णय का इंतजार करते रहे। ये हमारे खिलाड़ियों के साथ अन्याय हुआ है। 

टीम का आरोप उठाना पड़ा आर्थिक और मानसिक नुकसान
टीम का आरोप है कि, अंपायर द्वारा जानबूझकर गलत निर्णय देने पर हमारी टीम द्वारा आपत्ति दर्ज करवाई गई तो कमेटी ने भी जसवंतपुरा टीम को विजेता घोषित कर दिया। ये सब उनकी साजिश का हिस्सा है। कमेटी भी मेजबान होने के नाते जसवन्तपुरा को ही विजेता बनानी चाहती थी। उन्होंने अंपायर से साथ गांठ कर अंपायर से जानबूझकर गलत निर्णय दिलवाया है और जब उसका विरोध दर्ज करवाया गया तो कमेटी द्वारा टीम को बिना खेले ही बाहर निकालने की धमकी दी और मांडोली टीम का पक्ष जाने बिना ही कमेटी ने जसवन्तपुरा को विजेता घोषित कर दिया। ब्लॉक स्तरीय कमेटी द्वारा हमारे साथ भेदभाव पूर्ण व्यवहार किया गया है। हमारी एक बात नही सुनी गई इतना विवाद होने के बाद भी हम खेलने को तैयार थे और कमेटी के निर्णय का इंतजार करते रहे। हम क्रिकेट का दो दिन का शेड्यूल होते हुए भी लगातार चार दिन जसवन्तपुरा आये और चार टीमों को हराकर फाइनल में पहुचे थे। परंतु फाइनल खेले बिना ही हमको बाहर कर दिया। जिससे हमें न केवल आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है बल्कि फाइनल में हमे खेलने का मौका न देकर हमको मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया है। 

इनका कहना है - 

मेरे कंधे पर गेंद लगी थी और लेग अंपायर ने आउट दे दिया। मैने जहां गेंद लगी उस लाल धब्बे वाले स्थान को भी मैंने बताया था। परंतु अंपायर ने कहा कि जो दे दिया वो दे दिया। तुम बाहर जाओ और में चला गया।
अजय लोहार आऊट होने वाला खिलाड़ी

खिलाड़ी के कंधे पर गेंद लगी थी। तब मैं सामने ही खड़ा था। मेन अंपायर ने कोई निर्णय नही दिया था। लेग अंपायर ने सीधे ही खिलाड़ियों के अपील करते ही अंगुली ऊपर कर दी जबकि यह कार्य मेन अंपायर को करना था।
आलम सिंह, सामने खेल रहा खिलाड़ी

गलत आउट देने के बाद भी हम खेलने को तैयार थे। चुकी लेग अंपायर ने हमे बहस के दौरान कहा कि में आगे भी ऐसे ही निर्णय दूंगा। हमने अंपायर बदलने की बात कमेटी से की थी। परंतु कमेटी ने हमारी बात सुनने की बजाय हमको ही फाइनल मैच से बाहर कर दिया। ये हमारे साथ किसी धोखे से कम नहीं है और उस घटना के बाद हमारे अधिकतर खिलाड़ी मानसिक रूप से परेशान है।
विक्रमसिंह, खिलाड़ी मांडोली

फाइनल मैच में ये जो हार-जीत का निर्णय है ये वाद-विवाद कमेटी का निर्णय है। इस कमेटी में कई बड़े अधिकारियों के साथ जसवंतपुरा स्कूल के प्रिंसिपल, लैक्चरर और शारीरिक शिक्षक के अलावा दोनों अंपायर मौजूद रहे। कमेटी ने मांडोली क्रिकेट टीम से भी काफी समझाइश की गई लेकिन उनमें से कोई भी मानने को तैयार नहीं था। सब अपनी बात पर अड़े रहे।
भंवर सिंह, ब्लॉक खेल प्रभारी

मैच में विवाद का कारण खिलाड़ियों में प्रेम भावना का अभाव रहा। अंपायर का निर्णय मान्य होता है। मांडोली टीम मैच रेफरी बदलने की मांग पर अड़ी रही और खेलने से इनकार किया। अचानक मैच रेफरी नहीं बदला जा सकता, समझाईश के बाद भी टीम खेलने को तैयार नहीं थी।
त्रिकमराम, सीबीईओ, जसवंतपुरा

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