पेश की दोस्ती की मिसाल: झाक गांव के युवाओं ने कायम की मिसाल, दोस्त की याद में ने बना दिया रंगमंच

मित्र दुनिया से चला गया तो उसकी याद में आंसू बहाने की बजाय दोस्तों ने एक ऐसी मिसाल कायम की है कि इस मिसाल को देखकर हर किसी का मन प्रफुल्लित होगा। रंजों गम से दूर रहे दुनिया के लोग इसी चाह के चलते जालोर जिले के झाक गांव के युवाओं ने दोस्त की याद में एक रंगमच का निर्माण करवाया है। नन्हें बच्चे यहां खुशियों के फूल...

झाक गांव के युवाओं ने कायम की मिसाल, दोस्त की याद में ने बना दिया रंगमंच

जालोर | मित्र दुनिया से चला गया तो उसकी याद में आंसू बहाने की बजाय दोस्तों ने एक ऐसी मिसाल कायम की है कि इस मिसाल को देखकर हर किसी का मन प्रफुल्लित होगा। रंजों गम से दूर रहे दुनिया के लोग इसी चाह के चलते जालोर जिले के झाक गांव के युवाओं ने दोस्त की याद में एक रंगमच का निर्माण करवाया है। नन्हें बच्चे यहां खुशियों के फूल बिखेरेंगे तो दोस्त की आत्मा सुकून प्राप्त करेगी। इसी चाह के चलते युवाओं ने यह रंगमंच बनवाया है।

आपने किसी के पिता, माता, दादा-दादी की याद में प्याऊ, भवन आदि बनते देखे होंगे लेकिन किसी दोस्त की याद में दोस्तों द्वारा किसी चीज का निर्माण होते बहुत ही कम बार देखा होगा। परंतु यह कर दिखाया है झाक के युवाओं ने। दोस्ती की ऐसी मिशाल कायम की है कि आने वाली पीढियां भी उनके योगदन को भुला न पाएगी। जब बात दोस्ती की आती है तो न तो जाती आड़े आती है और न ही अमीरी या गरीबी। छोटे से गांव के युवाओं ने अपने दोस्त  की याद में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय झाक में रंगमंच का निर्माण कर अपने दोस्त को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है।
जालोर जिले की उप तहसील रामसीन से मात्र 7 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत पुनककलां का छोटा सा गांव झाक। भले ही यह गांव तमाम सरकारी सुविधाओं से अभी तक बहुत ही दूर है। यह गांव अभी तक पंचायत मुख्यालय से पक्की सड़क से जुड़ नहीं पाया है। परंतु यहां पर युवाओं ने गांव के विकास हेतु माताजी युवा मंडल नाम से एक ग्रुप बनाया है। इस ग्रुप का प्रमुख उद्देश्य गांव के युवाओं को एक मंच पर लाकर गांव का विकास करना है। उसी ग्रुप का एक सदस्य गणेशाराम हीरागर था। लाॅकडाउन के समय जब कोरोना के कारण प्रवासी अपनी मातृभूमि को आ रहे थे, तब गणेशाराम और उसका परिवार भी झाक में आया और एक दिन गणेशाराम की तबियत अचानक खराब होने से उसको अस्पताल ले जाया गया। परंतु उसको बचाया नहीं जा सका। कोरोना गाइडलाइन व लॉकडाउन के कारण उसका कोई भी मित्र उसके अंतिम संस्कार तक में शरीक नहीं हो सका। इसका सभी को मलाल था। माताजी नवयुवक मंडल के एक मिलनसार और हंसमुख स्वभाव वाले गणेशाराम के अचानक इस दुनिया से विदा होने के कारण हर कोई हैरान था। परंतु नियति के आगे किसकी चलती है।

परंतु माताजी युवा मंडल के सभी युवाओं ने तय किया कि हम सभी मिलकर अपने दोस्त की याद में ऐसी चीज का निर्माण करेंगे कि उसका नाम अमर हो जाये। सभी ने अपनी इच्छानुसार सहयोग कर एक बड़ी राशि इकठ्ठी कर विद्यालय में रंगमंच का निर्माण करने का निश्चय किया। ताकि न केवल अपने दोस्त के लिए यादगार हो बल्कि विद्यालय में अध्यनरत छात्रों के लिए भी लाभदायक हो। आखिरकार सभी का प्रयास रंग लाया और रंगमंच का निर्माण कर विद्यालय को सुपुर्द कर दिया।

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