उड्डयन कंपनियों और अफसरों का खेल: शादियों में बिना अनुमति के उतर रहे हैं हेलीकॉप्टर, सरकारी कारकून सेटिंग से नियमों को धता बता कमा रहे हैं माल

सूत्रों के अनुसार सिरोही में यह खेल भी सुनने में आ रहा है कि मामले में पहले तो 5 लाख रुपए देने का वायदा करके प्रकरण को साध लिया गया। परन्तु जैसे ही हेलिकाप्टर उड़ गया। इसके बाद यह रकम 25 हजार कर दी गई। इस पर संबंधित अफसर भड़क गए और आनन फानन में प्रकरण दर्ज किया गया। ऐसा ही खेल पाली में चल रहा बताया।

शादियों में बिना अनुमति के उतर रहे हैं हेलीकॉप्टर, सरकारी कारकून सेटिंग से नियमों को धता बता कमा रहे हैं माल

जयपुर | राजस्थान में नागरिक उड्ययन विभाग के कायदों को धता बताते हुए हेलीकॉप्टर उड़ रहे हैं। यही नहीं नियम विरुद्ध तरीके से हो रहे इस खेल में सरकारी अफसर भी शामिल है। बिना अनुमति के उतारे और उड़ाए जा रहे इन हेलीकॉप्टर के माध्यम से वे अवैध रूप वसूली में लगे हैं। एक मामला सिरोही में सामने आया है और दूसरा पाली के खैरवा में। सिरोही वाले प्रकरण में मुकदमा दर्ज हुआ है, जबकि पाली में किसी तरह का प्रकरण दर्ज नहीं हुआ है। 

पाली के खैरवा गांव में एक विवाह में रामासनी बाला से उड़ान भरकर हेलीकॉप्टर खैरवा पहुंचा और सरकारी स्कूल के मैदान में उतरा है। मैदान में उतारने के लिए संस्था प्रधान ने सरकारी अनापत्ति दी है। परन्तु किसी तरह की अनुमति प्रशास​सिक अधिकारियों से ली गई है। जबकि संस्था प्रधान विजय शर्मा ने अनापत्ति देने  में अनुमति की शर्त साफ लिखी है। परन्तु अनुमति नहीं ली गई। इससे साफ है कि यह खेल ऐसे ही चलता है। क्योंकि सिरोही में भी ठीक ऐसा ही मामला सामने आया है।

रुपए बचाने के लिए खेल
सरकारी नियमों के अनुसार अनुमति के लिए हजारों रुपए लगते हैं। जिनमें 30 हजार रुपए हेलीपेड, दो हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से अग्निशमन वाहन, दो हजार प्रतिदिन के हिसाब से एम्बुलेंस, होमगार्ड और पुलिस सुरक्षा के पैसे देने होते हैं। यह पैसा एविएशन कंपनियों को देने होते हैं। सीधे तौर पर अनुमति नहीं देकर ये एविएशन कंपनियां अफसरों, संस्था प्रधानों और एसडीएम कार्यालय के कारकूनों की जेब गर्म कर देती है। न तो मौके पर एम्बुलेंस होती है और न ही अग्निशमन वाहन। ऐसे में लोगों की जान भी खतरे में है, जिसे कुछ रुपए के लिए लोग इग्नोर कर रहे हैं।

इसे भुगतते हैं हेलीकॉप्टर बुलाने वाले लोग। वे अपने बच्चों की शादी में अपनी गाढ़ी कमाई लगाते हैं, लेकिन विमानपत्तन कंपनियां की गलतियां सीधे तौर पर उन्हें मुकदमों में फंसाने का कारण बनती है। यदि किसी तरह का हादसा हो जाए तो ऐसे प्रकरणों में परेशानी बड़ी हो सकती है।

यह दर्ज हुआ सिरोही में प्रकरण
सिरोही के रामपुरा गांव की सीनियर स्कूल के खेल मैदान में बिना परमिशन हेलिकॉप्टर उतारने पर पुलिस ने हेलिकॉप्टर मंगवाने वाले, हेलीकॉप्टर के पायलट और कंपनी के अफसरों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। CI राजेंद्र सिंह राजपुरोहित ने बताया कि रामपुरा निवासी शेर सिंह पुत्र भवानी सिंह ने अपने बेटे की शादी के लिए अहमदाबाद की एक कंपनी से हेलिकॉप्टर से मंगवाया था। लेकिन हेलिकॉप्टर उतारने के लिए उन्होंने प्रशासन से किसी भी तरह की अनुमति नहीं ली।

पायलट ने गुरुवार शाम करीब 6 बजे बिना इजाजत सीनियर स्कूल के खेल मैदान में अपना हेलिकॉप्टर उतार दिया। तहसीलदार नीरज कुमारी और थाना अधिकारी राजेंद्र सिंह राजपुरोहित मौके पर पहुंचे। उन्होंने पायलट नितिन वेलड़े से हेलिकॉप्टर उतारने की अनुमति के कागजात मांगे तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। जब संस्था प्रधान से इस संबंध मेंं संस्था प्रधान संस्था प्रधान महेंद्र कुमार जैन ने कहा था कि उन्होंने शेर सिंह को सशर्त अनुमति दी थी कि संबंधित अधिकारी से अनुमति लेने के बाद ही हेलिकॉप्टर उतारेंगे।

अब सामने आया है कि उन्होंने किसी से भी कोई अनुमति नहीं ली। पुलिस ने एरोड्रम सर्विस प्राइवेट लिमिटेड अहमदाबाद के मालिक राजीव, मैनेजर यशपाल शर्मा और पायलट नितिन वेलड़े के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

सूत्रों के अनुसार सिरोही में यह खेल भी सुनने में आ रहा है कि मामले में पहले तो 5 लाख रुपए देने का वायदा करके प्रकरण को साध लिया गया। परन्तु जैसे ही हेलिकाप्टर उड़ गया। इसके बाद यह रकम 25 हजार कर दी गई। इस पर संबंधित अफसर भड़क गए और आनन फानन में प्रकरण दर्ज किया गया। ऐसा ही खेल पाली में चल रहा बताया।

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