जेकेके के रंगायन सभागार में दर्शक अभिभूत: राजधानी के जेकेके में नृत्य नाटिका ‘द गेम ऑफ डाइस’ के मंचन ने महिला शक्ति को किया साकार

मुख्य सचिव ऊषा शर्मा की उपस्थिति में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के कार्यक्रमों के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग तथा डेल्फिक कौंसिल ऑफ राजस्थान की ओर से शनिवार को शाम जवाहर कला केन्द्र के रंगायन सभागार में ‘द गेम ऑफ डाइस’ फ्रॉम महाभारत के मंचन को देखकर दर्शक अभिभूत हो गए। 

राजधानी के जेकेके में नृत्य नाटिका ‘द गेम ऑफ डाइस’ के मंचन ने महिला शक्ति को किया साकार

जयपुर।
मुख्य सचिव ऊषा शर्मा की उपस्थिति में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के कार्यक्रमों के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग तथा डेल्फिक कौंसिल ऑफ राजस्थान की ओर से शनिवार को शाम जवाहर कला केन्द्र के रंगायन सभागार में ‘द गेम ऑफ डाइस’ फ्रॉम महाभारत के मंचन को देखकर दर्शक अभिभूत हो गए। 
इस नृत्य नाटिका ने नारीशक्ति की अद्भुत अभिव्यक्ति से सभागार को तालियों से गुंजायमान कर दिया। राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेहाना रियाज चिश्ती ने नृत्य नाटिका को देखकर कहा कि द्रौपदी ने ऐसे अत्याचार को कैसे बर्दाश्त किया होगा।
5 हजार साल के इतिहास को हम नहीं बदल सकते लेकिन अब हम ऎसा कुछ करेंगे कि किसी नारी का चीरहरण नहीं हो। महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रेया गुहा ने कहा कि महिला अधिकारिता का यह एक प्रयास था कि इस प्रकार का आयोजन कर महिला सशक्तिकरण का सन्देश दिया जाए। 
प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस से पहले ऐसा आयोजन लोगो में जिज्ञासा बढ़ाएगा कि आने वाले समय में किस प्रकार के बदलाव देखने को मिलेंगे। 
संतोष नायर द्वारा मंचित इस नृत्य नाटिका ने परंपराओं में निहित महिला सशक्तिकरण का अनुपम चित्रण किया। ‘द गेम ऑफ डाइस’ नृत्य नाटिका को महाकाव्य महाभारत की प्रमुख चरित्र द्रोपदी को मध्य में रखकर प्रस्तुत किया गया। 
यद्यपि इस नृत्य नाटिका में घटनाक्रम महाभारत से लिया गया है परंतु इस नृत्य नाटिका के माध्यम से नारी के प्रति अनादर और अत्याचारों पर समाज की उदासीनता पर आक्रोश को दर्शाया  गया है। 
महाभारत काल से लेकर अब तक समय बहुत गुज़र गया लेकिन आज भी महिलाओं के प्रति समाज की धारणा में बहुत अंतर नहीं आया। 
इसीलिए इस प्रसंग और नृत्य नाटिका की प्रासांगिकता हर काल में बनी रहती है। इस नृत्य नाटिका के अनेक मंचन महत्वपूर्ण स्थानों पर हो चुके हैं और बहुत सराहा जाते रहे हैं। 
इसके निर्देशक संतोष नायर ने इसको शास्त्रीय नृत्य मयूरभंज छाऊ पर तैयार किया है जिसमें दर्शकों को शारीरिक करतब के साथ-साथ अद्भुत नृत्य और अभिनय तथा प्रभावी पार्श्व संगीत और स्टेज लाइट्स का मनोरम प्रयोग दिखा।

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