एक बड़ी समस्या पर ध्यान दो सरकार: बिना गेट वाले सिणधरा बांध से पानी छोड़कर बांडी नदी को जिंदा करने की उठी मांग

नदी में पानी नहीं आने से भूमिगत जल रिचार्ज होना बंद हो जाने से हरा भरा पूरा इलाका सूख गया है। इस क्षेत्र में लाखों बीघा भू-भाग में जीरा, रायड़ा, इसबगोल, सरसों, मिर्च,  गेंहूं सहित दूसरी फसलों की भारी उपज होती थी, आज पानी के अभाव में वो सारी खेती चौपट हो गई है। 

बिना गेट वाले सिणधरा बांध से पानी छोड़कर बांडी नदी को जिंदा करने की उठी मांग

बिना गेट वाला राजस्थान का पहला तकनीकी खामियों वाला बांध बना किसानों की बर्बादी का कारण
बांडी नदी का प्राकृतिक बहाव रुकने से भीनमाल और आसपास के 120 से अधिक गांवों में जलस्तर पहुंचा डार्क जोन में
सामाजिक कार्यकर्ता श्रवण सिंह राठौड़ ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को लिखा पत्र

भीनमाल | तेज बारिश से नदी - नालों में पानी की आवक शुरू होने के साथ ही भीनमाल के समीप बने पश्चिमी राजस्थान के दूसरे सबसे बड़े बांडी- सिणधरा बांध में स्टोरेज होने वाले पानी में से 33 प्रतिशत पानी बांडी नदी में छोड़ने की मांग किसानों ने उठाई है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से  तकनीकी खामी और अदूरदर्शिता  से बने राजस्थान के पहले बिना गेट वाले इस 37 करोड़ की लागत से 16 साल पहले बने इस बांध से पानी की निकासी के लिए गेट बनाकर बांडी नदी का प्राकृतिक बहाव पुनः शुरू करवाने को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं कांग्रेस नेता श्रवण सिंह राठौड़ ने मांग रखी है।

राठौड़ ने कहा कि नियमों के खिलाफ नदी का प्राकृतिक बहाव पूर्णतया बंद कर दिए जाने से  भीनमाल सहित आसपास के 120 से अधिक गांवों में भूमिगत जल खत्म होने से खेती और पशुपालन चौपट हो गया है। रोजगार की तलाश में हज़ारों युवाओं को मजबूरी में यहां से दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में मजदूरी के लिए पलायन करना  पड़ा है।

बांडी नदी पर बन रखे सिणधरा बांध में निकासी गेट बनाकर नदी को पुनः जीवित करने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं कांग्रेस नेता श्रवण सिंह राठौड़ ने  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखा है। इससे पहले राठौड़ इस मामले में जन अभियोग निराकरण समिति के चैयरमेन पुखराज पाराशर से मिलकर किसानों की मांग में समाधान के लिए पैरोकारी करने का आग्रह किया है।

मुख्यमंत्री को लिखे पत्र के मुताबिक बांडी नदी पर बने इस बांध के निर्माण में तकनीकी खामी, अदूरदर्शिता और अधिकारियों की लापरवाही की वजह से प्राकृतिक बहाव वाली बांडी नदी की हत्या हो गयी और हरा भरा इलाका पूरी तरह उजड़ गया है।

 मुख्यमंत्री कार्यालय में जाकर भी रखी मांग

सामाजिक कार्यकर्ता श्रवण सिंह राठौड़ ने पिछले दिनों जयपुर में मुख्यमंत्री कार्यालय में जन अभियोग निराकरण समिति के अध्यक्ष पुखराज पाराशर, प्रमुख सचिव कुलदीप रांका और जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल को इस पूरे मामले से अवगत कराया और लिखित मांग की।  इसके साथ ही श्रवण राठौड़ ने जालोर कलेक्टर निशांत जैन से भी मिलकर इस मुद्दे पर किसानों की तकलीफों से लिखित में अवगत कराया। 

ऐसा बांध जिसका पानी किसी के काम नहीं आ रहा

भीनमाल, जालोर और सांचोर विधानसभा के 120 से अधिक गांवों से होकर बहने वाली बांडी नदी पर वर्ष 2006 में 37 करोड़ की लागत से सिणधरा बांध बनाया गया। शुरुआत में ये बांध भीनमाल में पेयजल सप्लाई को लेकर प्रस्तावित था। भीनमाल में नर्मदा नहर से पानी सप्लाई की नई योजना बन गयी तो संशोधित नए प्रोजेक्ट में सिणधरा बांध से आसपास के इलाकों में नहर से सिंचाई की योजना बनी। भ्रष्टाचार की वजह से नहर बनने के एक साल में ही टूट गयी। आज तक इस बांध से नहीं तो सिंचाई हुई और न ये पानी पेयजल के लिए काम आया। अब अधिकारी पुनः नहर के पुनर्निर्माण के नाम पर करोड़ों का बजट ठिकाने लगाने की तैयारी में है।

बिना जरूरत बढ़ा दी ऊंचाई

सिणधरा बांध  की भराव क्षमता 1085 एमसीएफटी है। पहले इस बांध की ऊंचाई 36 फ़ीट थी, जिसे बढाकर बिना जरूरत के 45 फ़ीट कर दिया है। 
इस बांध की एक किलोमीटर से अधिक चौड़ाई  एवं भराव और फैलाव क्षमता करीब 3 किलोमीटर है।

जीरे जैसी नकदी फसलों का इलाका बर्बाद

नदी में पानी नहीं आने से भूमिगत जल रिचार्ज होना बंद हो जाने से हरा भरा पूरा इलाका सूख गया है। इस क्षेत्र में लाखों बीघा भू-भाग में जीरा, रायड़ा, इसबगोल, सरसों, मिर्च,  गेंहूं सहित दूसरी फसलों की भारी उपज होती थी, आज पानी के अभाव में वो सारी खेती चौपट हो गई है। 

बांध का उपयोग अफसरों के मछियां खाने और पार्टियां तक सीमित  

 कई बार बांध लबालब भरने के बाद भी इसका पानी आज दिनांक तक उपयोग में नहीं आया। स्थानीय लोगों के मुताबिक ये बांध सिर्फ  सरकारी अधिकारी के इस बांध में पैदा होने वाली मछलियों को खाने और रात में पार्टी करने के ही उपयोग से खुश है। उनको किसानों की कोई चिंता नहीं है।

बांध का 33 प्रतिशत पानी नदी में छोड़ने का नियमों में प्रावधान  : -

इलाके के किसानों की माँग है कि बांध पर गेट का निर्माण हो, जिससे नियमों के अनुसार किसानों के हिस्से का 33 प्रतिशत पानी बांडी नदी में छोड़ा जा सकें। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व एक फैसले के अनुसार बांध बनाते समय तब सिंचाई विभाग, जिला प्रशासन और किसानों के बीच सहमति बनी थी कि  बांडी-सिणधरा बांध का 33 प्रतिशत पानी नदी में छोड़ने, 30 प्रतिशत पानी नहर के लिए और 33 प्रतिशत डेड स्टोरेज के लिए रखा जाएगा।

 बांडी नदी का प्राकृतिक बहाव रुकने से यहां ज्यादा नुकसान :-

 पानी नदी में नहीं बंद होने की वजह से बांध के बहाव क्षेत्र में आने वाले थूर, तवाव,  कोटकास्तां, घासेड़ी, खानपुर, लेदरमेर, भागल- सेफ्टा, नासोली, नरता, कुशालपुरा, कावतरा, दांसपा, रूसियार, कोरा, जेतू, देता, लूणावास, अरनू, दामण, जुंजाणी, कोमता, विशाला, धुम्बड़ीया, बागोड़ा सहित अधिकांश गांवों में जल का स्तर गिर गया है। 
 किसानों की मांग मुख्य मांग :- सामाजिक कार्यकर्ता श्रवण सिंह राठौड़ ने राज्य सरकार से मांग रखी कि नियमों के मुताबिक नदी का प्राकृतिक बहाव बहाल करने के लिए बांध में गेट बनाकर कुल स्टोरेज का 33 प्रतिशत पानी नदी में छोड़ा जाए। पिछले 16 वर्ष में बहाव बंद करने से जो भारी नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई अतिरिक्त पानी छोड़ कर की जाए। सिंचाई के लिए नहर के पुनर्निर्माण की अनुमति से पहले बांध में कम से कम तीन गेट बनाने के लिए बजट और स्वीकृति प्रदान की जाए। 
 नर्मदा का व्यर

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