ये कैसी पुलिस? : एफआईआर दर्ज करने की बजाए समझौता करने के लिए दबाव बना रही कालंद्री पुलिस

सिरोही जिले के पुलिस कप्तान के रूप में जब से आईपीएस हिम्मत अभिलाष टांक की नियुक्ति हुई हैं, तब से ही जिले में अपराधियों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं।

एफआईआर दर्ज करने की बजाए समझौता करने के लिए दबाव बना रही कालंद्री पुलिस
  • एक नाबालिग को अगवा करने की नाकाम कोशिश के बावजूद पुलिस अपराधी को बचाने में जुटी।

सिरोही। सिरोही जिले के पुलिस कप्तान के रूप में जब से आईपीएस हिम्मत अभिलाष टांक की नियुक्ति हुई हैं, तब से ही जिले में अपराधियों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। फिर चाहे वो मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ा मामला हो या फिर शराब तस्करी का मामला, बजरी खनन से लेकर डीज़ल पेट्रोल का काला कारोबार जिले में जड़े जमाता जा रहा हैं और पुलिस उन्हें संरक्षण देने में लगी हुई हैं। पुलिस के रवैये को लेकर अब तो हद ही हो गई हैं। ताज़ा मामला सिरोही जिले के कालंद्री थाना क्षेत्र का हैं। जहाँ एक नाबालिग लड़की को जोर जबरदस्ती अगवा कर ले जाने की हुई नाकाम कोशिश के बाद जब नाबालिग का पिता थाने में रिपोर्ट लेकर पहुंचा तो कालंद्री थाना पुलिस मामला दर्ज कर आरोपी को पकड़ने की बजाए उसे संरक्षण देने में लगी हुई हैं। घटना 3 जून की हैं जब पीड़िता अपने सहेली के घर से अपने घर जा रही थी, तभी आरोपी ने पीड़िता के पास आकर गाड़ी रोकी, और उसे जोर जबरदस्ती उठाकर गाड़ी में डालने की कोशिश की। लेकिन पीड़िता के जोर से चिल्लाने के कारण पीछे से आ रहे उसके पिता ने दौड़ कर मौके पर पहुंचकर अपनी बेटी को बचा लिया। आरोपी पीड़िता के पिता को देखकर मौके से भाग गया, पर जाते जाते धमकी भी देकर गया कि वो उसके पूरे परिवार को जान से मार देगा। जिस पर पीड़िता के पिता ने 3 जून को कालंद्री थाने में पहुंचकर एक लिखित रिपोर्ट नामजद आरोपी के विरुद्ध पेश की। पर अपराधियो और बलात्कारियों को संरक्षण देने वाली कालंद्री थाना पुलिस मामला दर्ज करने की बजाए पीड़ित परिवार को समझौता करने का दबाव बनाने में जुट गई। पिछले पांच दिनों से इस पूरे मामले को लेकर पुलिस वाले पंचायती करने में लगे हुए हैं। पीड़ित परिवार थानाधिकारी सहित मामले की पंचायती में जुटे सभी पुलिसकर्मियों से मामला दर्ज करवाने की सैकड़ो बार विनती कर चुका हैं पर कालंद्री पुलिस मामला ही दर्ज नही कर रही। बस ले-देकर समझौता करवाने पर तुली हुई हैं। इस पूरे घटनाक्रम की जब सूत्रों के हवाले से FIRST BHARAT को जानकारी मिली तो टीम ने कालंद्री थानाधिकारी से संपर्क किया, लेकिन थानाधिकारी सरिता ने पूरे मामले से ही अनभिज्ञता जाहिर की।

◆ जब थानाधिकारी को मामले की नही जनकारी तो कौनसा पुलिसकर्मी कर रहा पंचायती

जब पूरा मामला FIRST BHARAT की जानकारी में आया तो हमने कालंद्री थानाधिकारी सरिता से इस मामले की जानकारी लेना चाही। कालंद्री थानाधिकारी ने पुरे मामले से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि ऐसा कोई मामला उनकी जानकारी में नही हैं। और अगर ऐसा हैं तो पीड़ित को मेरे कक्ष में भेजिए तुरन्त मामला दर्ज कर देते हैं। जबकि सूत्रों से मिली जानकारी से साफ जाहिर हो रहा है कि मामले में पूरी पंचायती थानाधिकारी की देखरेख में ही चल रही हैं। यदि थानाधिकारी की बातों पर यकीन भी कर ले तो बड़ा सवाल उठता हैं कि कालंद्री थाने में ऐसा कौनसा पुलिसकर्मी हैं जो थानाधिकारी को बताए बिना एक किशोरी को अगवा करने की नाकाम कोशिश करने जैसे संगीन अपराध में भी वो अपने स्तर पर पंचायती कर मामला रफा दफा करवाने में लगा हुआ हैं? इससे भी बड़ा सवाल कि एक थानाधिकारी को जब अपने थाने में चलने वाली ऐसी गतिविधियो की ही जानकारी नही तो फिर लम्बे चौड़े क्षेत्रफल में फैले थाना क्षेत्र में चल रही कितनी आपराधिक गतिविधियां चोरी छुपके चलती होगी? ऐसे लापरवाह उपनिरीक्षक को किसी थाने में थानाधिकारी के रूप नियुक्त करना कितना जायज हैं?