किशन का इतिहास बना कन्हैया का वर्तमान: गुजरात-राजस्थान में हत्या का एक पैटर्न, दिन भी एक मंगलवार, अंजाम-सरेआम हत्या

गुजरात में किशन और राजस्थान में कन्हैया की सरेआम हत्या इसलिए हुई, क्योंकि दोनों ने सोशल मीडिया पर हिन्दुत्व को लेकर पोस्ट की। इस्लाम पर आस्था रखने वाले इससे भड़क गए। दोनों मामलों के कनेक्शन एक ही इस्लामिक संगठन दावत-ए-इस्लामी से जुड़े पाए गए हैं।

गुजरात-राजस्थान में हत्या का एक पैटर्न, दिन भी एक मंगलवार, अंजाम-सरेआम हत्या

सिरोही। गुजरात के अहमदाबाद के धंधुका में 27 साल के किशन भारवाड़ की 25 जनवरी को हुई सरेआम हत्या को देशवासी अभी भूले भी नहीं थे कि राजस्थान के उदयपुर में कन्हैयालाल तेली का गला रेतकर उसे दिनदहाड़े मार दिया गया। गुजरात में किशन और राजस्थान में कन्हैया की सरेआम हत्या इसलिए हुई, क्योंकि दोनों ने सोशल मीडिया पर हिन्दुत्व को लेकर पोस्ट की। इस्लाम पर आस्था रखने वाले इससे भड़क गए। दोनों मामलों के कनेक्शन एक ही इस्लामिक संगठन दावत-ए-इस्लामी से जुड़े पाए गए हैं। दोनों मामलों में कई तथ्य कॉमन है। दोनों के नाम का अर्थ एक है। एक किशन हैं तो दूसरा कन्हैया। दोनों पर एक ही इल्जाम लगा। एक ने मुस्लिमों के पैगम्बर से बड़ा हिंदुओं के कृष्ण को बताया। तुलना तो जीसस से भी की थी। दूसरे ने बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा के पैगम्बर को लेकर दिए गए बयान का समर्थन करते हुए पोस्ट लिखी। इस पर एक खास समुदाय के सब्र का बांध टूट गया। अंजाम दोनों का एक जैसा ही हुआ। दोनों की सरेआम हत्या कर दी गई। एक की गोली मारकर तो दूसरे की धारदार हथियार से गला रेतकर। दोनों हत्या का दिन मंगलवार था। दोनों मामलों के कनेक्शन एक ही इस्लामिक संगठन दावत-ए-इस्लामी से सामने आए हैं।

किशन और कन्हैया दोनों की कहानी में सोशल मीडिया पोस्ट है। पहले गिरफ्तारी और फिर आरोपी का माफी मांगना है, लेकिन माफी से संतुष्ट न होने वालों की धमकियां अंजाम के रूप में मौत हैं। दोनों मामलों में टारगेट के घर से निकलने का कई दिनों तक इंतजार गया और फिर उस पर खुलेआम भीड़ के बीच वार किया गया। हमलावरों को अपने टारगेट की पल-पल की जानकारी थी। घर से निकलते ही बिना वक्त गंवाए हमला किया गया। हत्यारों की संख्या भी दोनों में दो-दो रही।

इसी साल 25 जनवरी को गुजरात के अहमदाबाद के धंधुका में 27 साल के किशन भारवाड़ को ईशनिंदा की सजा मिली। उसने माफी मांग ली थी। छह जनवरी को किशन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया। कुछ घंटों में ही इस वीडियो ने बवाल खड़ा कर दिया। ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने किशन पर रिपोर्ट दर्ज करा दी। समुदाय का गुस्सा देखकर पुलिस हरकत में आ गई। किशन को गिरफ्तार कर लिया गया। किशन को अगले दिन सात जनवरी को जमानत मिली। जमानत भी उस समुदाय से माफी मांगने के बाद मिली। समुदाय के लोगों ने जमानत मिलने के बाद किशन की पिटाई भी की। किशन ने पूरे समुदाय से हाथ जोड़कर माफी मांगी, लेकिन इस बीच घर वालों को जान से मारने की धमकियां मिलनी शुरू हो चुकी थीं। इससे डरकर घर वालों ने जेल से छूटने के बाद उसे किसी रिश्तेदार के घर कुछ दिनों के लिए भेज दिया। किशन के फोन पर धमकियां बराबर आती रहीं। 

इस बीच किशन की पत्नी को एक बच्ची हुई। किशन के घरवालों ने उसे घर न आने के लिए बार-बार कहा, लेकिन बच्ची का चेहरा देखने के लिए किशन 25 जनवरी को बाइक से घर के लिए रवाना हो गया। रास्ते में ही बाइक सवार दो लोगों ने भरे चौराहे उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। वहीं उसकी मौत हो गई। इस मामले की जांच में शामिल एटीएस ने बाइक सवार दो आरोपियों के अलावा दिल्ली के दरियागंज से भी मौलाना कमर गनी उस्मानी को गिरफ्तार किया। एटीएस ने जांच में मौलाना उस्मानी का संबंध दावत-ए-इस्लामी नाम की संस्था से होने की बात कही थी।

इसी साल जून में राजस्थान के उदयपुर में अहमदाबाद के धंधुका में किशन का इतिहास एक बार फिर कन्हैया के रूप में वर्तमान बनकर सामने आ खड़ा हुआ। दस जून को कन्हैया के आठ साल के बेटे ने पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया में पोस्ट की। ग्यारह जून को उनके पड़ोसी नाजिम ने उन पर ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई। पुलिस ने कन्हैयालाल को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने समझौता कराने के बाद उन्हें छोड़ा। समझौता लिखित था। कन्हैया ने पूरे समुदाय से माफी मांगी थी। उसी दिन कोर्ट से उन्हें जमानत भी मिल गई। पन्द्रह जून को कन्हैया ने पुलिस को एक पत्र लिखकर अपनी हत्या की आशंका जताई। इस आशंका की वजह थी कि कन्हैया को लगातार धमकी मिल रही थी। वे कपड़े सिलते थे और उनकी बीच चौराहे पर दुकान थी। उन्होंने दुकान के आसपास भी कुछ लोगों को उन पर नजर रखते देखा था।

इस बीच नाजिम ने कन्हैया की फोटो वायरल कर दी थी। उसमें लिखा था कि अगर यह व्यक्ति कहीं दिखे तो इसे जान से मार दो। इससे घबराकर कन्हैया ने 5-6 दिन तक दुकान भी नहीं खोली। 28 तारीख को जब वह दुकान पहुंचे तो दो लोग उनकी दुकान में पाजामा सिलवाने के बहाने घुसे। कन्हैया ने नाप लेनी शुरू की और फिर दिनदहाड़े, भरे चौराहे को नजरअंदाज करते हुए एक व्यक्ति ने उन पर धारदार हथियार से वार किया और उसकी गर्दन काट दी। दूसरे ने वीडियो बनाया। इस मामले में अब तक हुई दोनों गिरफ्तारी में भी एनआईए ने दावते-ए-इस्लामी से हत्यारों के तार जुड़े होने की आशंका जाहिर की है।
इस मामले में हत्यारे रियाज और मोहम्मद गौस मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन दावते-ए-इस्लामी से जुड़े हैं। ये पाकिस्तान का एक सुन्नी इस्लामी संगठन है। दावत-ए-इस्लामी मतलब 'इस्लाम की ओर आमंत्रण' है। इसकी स्थापना 1981 में कराची में मौलाना अबू बिलाल मुहम्मद इलियास अत्तारी ने की थी। दावत-ए-इस्लामी संगठन दुनिया के 194 देशों में फैला है। संगठन 32 से ज्यादा ऑनलाइन कोर्स चलाता है। इसका मकसद शरीया कानून के तहत इस्लामी शिक्षा का प्रचार-प्रसार और मुसलमानों को तैयार करना है। भारत के कश्मीर में यह संस्था सबसे ज्यादा सक्रिय है। राज्य के हर जिले में इस संस्था के दफ्तर हैं।

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