India @वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट की पहल: आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कश्मीर से बेंगलुरु के लिए भेजी गई 2000 किलोग्राम अखरोट, पहले अमेरिका से आयात करते थे व्यापारी

भारत में अखरोट उत्पादन में कश्मीर का 90 प्रतिशत हिस्सा है। अपनी बेहतर गुणवत्ता और स्वाद के साथ कश्मीरी अखरोट पोषक तत्वों का एक बड़ा स्रोत हैं और इसलिए दुनिया भर में इसकी व्यापक मांग है। इस उत्पाद के लिए स्थानीय और वैश्विक बाजारों में अपनी जगह बनाने की अपार संभावनाएं हैं।

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कश्मीर से बेंगलुरु के लिए भेजी गई 2000 किलोग्राम अखरोट, पहले अमेरिका से आयात करते थे व्यापारी

नई दिल्ली, एजेंसी।
भारत में अखरोट उत्पादन में कश्मीर का 90 प्रतिशत हिस्सा है। अपनी बेहतर गुणवत्ता और स्वाद के साथ कश्मीरी अखरोट पोषक तत्वों का एक बड़ा स्रोत हैं और इसलिए दुनिया भर में इसकी व्यापक मांग है। इस उत्पाद के लिए स्थानीय और वैश्विक बाजारों में अपनी जगह बनाने की अपार संभावनाएं हैं। हाल ही में डीपीआईआईटी की अपर सचिव सुमिता डावरा द्वारा हरी झंडी दिखाकर अखरोट व्यापार की एक नए पहल शुरूआत की। जम्मू-कश्मीर व्यापार संवर्धन संगठन (जेकेटीपीओ) के सहयोग से आयोजित नई पहल के तहत 2000 किलोग्राम कश्मीरी अखरोट की पहली खेप बडगाम से झंडी दिखाकर ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ (ओडीओपी) के तहत एक ट्रक कर्नाटक के बेंगलुरु के लिए रवाना किया गया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के सरकारी उद्योग एवं वाणिज्य के प्रधान सचिव रंजन प्रकाश ठाकुर, कश्‍मीर की उद्योग निदेशक ताजायुन मुख्तार, कश्मीर की बागवानी उप निदेशक खालिदा, जेकेटीपीओ की प्रबंध निदेशक अंकिता कार और इन्वेस्ट इंडिया टीम इस अवसर पर उपस्‍थित थे।

अमेरिका से खरीदते थे बेंगलूरु के व्यापारी, अब कश्मीर से नई पहल
कश्मीर अखरोट की उपलब्धता के बावजूद भारत में अखरोट का बड़े स्‍तर पर आयात किया जा रहा था, 'ओडीओपी' टीम ने कश्मीर में गहन बाजार विश्लेषण और हितधारक परामर्श शुरू किया। इसके अलावा, भारत में अखरोट के आयातकों से संपर्क किया गया। दोनों सिरों पर समर्पित सहयोग के माध्यम से, ओडीओपी टीम खरीद को सुविधाजनक बनाने में सक्षम हुई। इस तरह के प्रयास आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी बढ़ावा देते हैं। इस मामले में बैंगलुरू स्थित आयातक जो पहले अमरीका से अखरोट खरीद रहे थे, अब आयात लागत के एक हिस्‍से के बल पर गुणवत्ता वाले अखरोट वितरित करने में सक्षम है। बागवानों और व्यापार प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि आगे बढ़ने के तरीके में क्रेता-विक्रेता की मुलाकातों के माध्यम से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय विपणन, अधिकाधिक कृषिगत तथा हस्तशिल्प/हथकरघा उत्पादों के ई-कॉमर्स ऑनबोर्डिंग के साथ-साथ प्रत्येक जिले के उत्पादों के लिए उत्पाद/योजना जागरूकता पैदा करना शामिल है, जिसका वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओडीओपी पहल के तहत समर्थन किया जाएगा।

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