किशोरियों व महिलाओं को दिखाई पैडमेन: अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में जिला मुख्यालय और पंचायत स्तर पर नि:शुल्क दिखाई जाएगी पैडमेन फिल्म

महिला अधिकारिता विभाग की ओर से अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 4 दिवसीय आयोजन के तहत आज पैडमेन फिल्म दिखाई गई। जयपुर के राजमंदिर सिनेमा हॉल में पैडमेन फिल्म का निःशुल्क प्रदर्शन किया गया।

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में जिला मुख्यालय और पंचायत स्तर पर नि:शुल्क दिखाई जाएगी पैडमेन फिल्म

जयपुर।
महिला अधिकारिता विभाग की ओर से अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 4 दिवसीय आयोजन के तहत आज पैडमेन फिल्म दिखाई गई। 
जयपुर के राजमंदिर सिनेमा हॉल में पैडमेन फिल्म का निःशुल्क प्रदर्शन किया गया। 
महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील है। महावारी स्वच्छता के अभाव में महिलाओं को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है।
इससे महिलाओं का जीवन भी संकट में आ जाता है।  ऐसे में राज्य सरकार ने उड़ान योजना शुरू करके प्रदेश की किशोरियों एवं महिलाओं को निःशुल्क सेनेटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की पहल की है। 
भूपेश ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में चार दिवसीय कार्यक्रम प्रदेश स्तर पर आयोजित किया गया है। इसकी कड़ी में आज जयपुर के राजमंदिर सिनेमा हॉल में पैडमेन फिल्म का निःशुल्क प्रदर्शन किया गया।
इसी प्रकार कल सभी जिला मुख्यालय पर सिनेमा हॉल में एवं पंचायत स्तर पर ई-मित्र व डूइट के माध्यम से पैडमेन मूवी दिखाई जाएगी।


इस फिल्म को दिखाए जाने का उद्देश्य उड़ान योजना के प्रति लोगों व महिलाओं में जागरूकता लाना हेै। सेनेटरी नेपकिन के इस्तेमाल केे प्रति महिलाओं को प्रेरित करना।
भूपेश ने बताया कि इस फिल्म शो के माध्यम से महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो सकेंगी। उन्होंने महिलाओं को सेनेटरी नेपकिन का इस्तेमाल करने का आह्वान किया। 
भूपेश ने इस अवसर पर राज्य की महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की अग्रिम शुभकामनाएं दी।
इस अवसर पर प्रमुख शासन सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग श्रेया गुहा, महिला अधिकारिता आयुक्त रश्मि गुप्ता तथा विभागीय अधिकारी एवं बड़ी संख्या में महिलाएं एवं किशोरियां उपस्थित रही।
सिनेमा हॉल में किशोरियां व महिलाएं अपनी सहेलियों तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ बड़ी संख्या में फिल्म देखने के लिए पहुंची।
फिल्म में महिलाओं की माहवारी को समाज द्वारा शर्म से जोड़कर देखने को प्रदर्शित किया गया है, जिसे नायक द्वारा संवेदनशीलता से दूर करने का प्रयास किया जाता है। 
महावारी स्वच्छता प्रबंधन से वंचित महिलाओं की समस्या का समाधान कर नायक द्वारा ग्रामीण परिवेश की महिलाओं को सस्ते एवं हाईजैनिक सेनेटरी नेपकिन बनाकर उपलब्ध करवाये जाते है। 

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