राजे को सीएम प्रोजेक्ट करने की रणनीति : अब राष्ट्रीय नेतृत्व पर दवाब बनाने की व्यूह रचना

राजे समर्थक प्रमुख नेता प्रदेशभर में दौरे कर माहौल बनाने में जुटे

अब राष्ट्रीय नेतृत्व पर दवाब बनाने की व्यूह रचना

जयपुर। भाजपा में वसुंधरा राजे समर्थक धड़े ने चुनाव से पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सीएम उम्मीदवार घोषित करवाने की अपनी रणनीति अब बदल ली है। बेवजह की बयानबाजी न कर गुपचुप में प्रदेशभर में राजे के समर्थन में माहौल बनाने के साथ लॉबिंग की जा रही है। इसके लिए राजे समर्थक चुन्नीदा नेता प्रदेशभर में दौरे कर रहे हैं। इन दौरों को भी फिलहाल गुप्त रखा जा रहा है। नई रणनीति यह है कि प्रदेशभर से आवाज उठे कि वसुंधरा राजे को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करने पर ही शासन आ सकता हैं। राष्ट्रीय नेतृत्व तक भी ये आवाज गूंजे और उन्हें लगे कि राजस्थान में सत्ता में वापसी के लिए वसुंधरा राजे का चेहरा जरूरी है।

खास है मेघवाल की मेवाड़ यात्रा

वसुंधरा राजे के दूत के रूप में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल इन दिनों मेवाड़ दौरे पर है। मेघवाल ने नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के विरोधी गुट के साथ लम्बी मंत्रणा की। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शांतिलाल चपलोत के घर हुई इस मंत्रणा में उदयपुर के कटारिया विरोधी कई नेता मौजूद थे। मेघवाल मूलत: उदयपुर में ही पले पढ़े हैं। मेवाड़ से उनका जुड़ाव वर्षों पुराना हैं इसीलिए उन्हें खास जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष मेघवाल की इन दिनों ये यात्रा अहम हो जाती है, क्योंकि जिन दो विधानसभा सीटों वल्लभनगर व धरियावद उपचुनाव होने है वे दोनों ही उदयपुर अंचल में है और इनके चुनाव परिणाम राज्य की राजनीति की नई दिशा व दशा तय करने वाले है। भाजपा के वर्तमान प्रदेश नेतृत्व की तो ये उपचुनाव अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। उप चुनाव परिणाम भाजपा की अंदरूनी राजनीति को भी काफी प्रभावित करेगा। राजे समर्थकों की इन उपचुनावों पर ही विशेष रूप से नजर टिकी हुई है। प्रदेश के छह जिलों में होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव के परिणामो पर भी राजे समर्थको की नजर है। इसी तरह वसुंधरा गुट के दूसरे प्रमुख नेता प्रदेश के अन्य क्षेत्रों का जिम्मा संभाले हुए हैं।

केंद्रीय नेतृत्व को राजी करने का काम स्वयं राजे ने संभाला

इस बीच पता चला है कि वसुंधरा राजे भी सक्रिय हो गई हैं। अपने इसी मिशन के तहत वे सांसदों की दिल्ली बैठक में पहुंची थीं। राजे दिल्ली के नेताओं को साधने के काम में जुट गई हैं। उनकी कई केन्द्रीय नेताओं से चर्चा भी हुई हैं। भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व वसुंधरा राजे को सीएम उम्मीदवार प्रोजेक्ट करता है या मोदी के नाम पर ही चुनाव लड़ा जाएगा इसका फैसला होने पर ही तस्वीर साफ हो पाएगी। राजे को सीएम प्रत्याशी प्रोजेक्ट करवाने की चल रही कोशिशों में ये दलील दी जा रही है कि वसुंधरा राजे को अगर सीएम उम्मीदवार घोषित किया जाता है तब ही राजस्थान में भाजपा की सरकार बन पाएगी।

आरएसएस का साथ जरूरी

भाजपा में हाल में निकाले जा चुके पूर्व मंत्री रोहिताश कुमार तथा भवानी सिंह राजावत जैसे नेताओं को भी चुप रहने की हिदायत दी गई हैं, क्योंकि इन बयानबाजी से राजे गुट को नुकसान ही उठाना पड़ा हैं। यह दीगर बात है कि अति उत्साही रोहिताश कुमार का चुपी साधे रखना मुश्किल हैं। रोहिताश शर्मा ने तो वसुंधरा को सीएम बनाने की मुहीम चलाने की घोषणा तक कर डाली। रोहिताश आज अपने जन्मदिन पर शक्ति प्रर्दशन भी करने वाले है। उधर, केन्द्रीय नेतृत्व की डांट के बाद जयपुर के नेता कालीचरण सराफ, अशोक परनामी, अशोक लाहोटी आदि ने पार्टी कार्यक्रमों में आना शुरू कर दिया। भाजपा में मुख्यमंत्री चेहरे की स्वीकारोत्ती के लिए आरएसएस का साथ जरूरी हैं। इसी के चलते हाल में निम्बाराम प्रकरण में न केवल राजे का बयान आया बल्कि विरोध में पूरी भाजपा एकजुट दिखाई दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और संघ पर सारा दारोमदार टिका है। उनकी मर्जी के बिना वर्तमान भाजपा में पत्ता भी नहीं हिल सकता।

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