राजस्थान देवस्थान मंत्री की घोषणाएं: राजस्थान विधानसभा में देवस्थान विभाग की ओर से मंदिरों के विकास व जीर्णाद्धार के लिए की गई घोषणाएं ध्वनिमत से पारित

देवस्थान विभाग द्वारा मन्दिरों के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। सभी मंदिरों में पूजा सामग्री सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। सदन ने विविध सामाजिक सेवाएं की 69 करोड़ 1 लाख 30 हजार रुपए की अनुदान मांगे ध्वनिमत से पारित कर दी।

राजस्थान विधानसभा में देवस्थान विभाग की ओर से मंदिरों के विकास व जीर्णाद्धार के लिए की गई घोषणाएं ध्वनिमत से पारित

जयपुर।
देवस्थान मंत्री शकुंतला रावत ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश में कोई भी मंदिर जीर्ण-शीर्ण नहीं रहेगा।
इनके जीर्णाद्धार के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। देवस्थान विभाग द्वारा मन्दिरों के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
सभी मंदिरों में पूजा सामग्री सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। रावत विधानसभा में मांग संख्या 11 (विविध सामाजिक सेवाएं) की अनुदान मांगों पर हुई बहस का जवाब दे रही थी। 
चर्चा के बाद सदन ने विविध सामाजिक सेवाएं की 69 करोड़ 1 लाख 30 हजार रुपए की अनुदान मांगे ध्वनिमत से पारित कर दी।
देवस्थान मंत्री ने कहा कि राजस्थान देवी-देवताओं की भूमि है। राज्य सरकार मंदिरों के विकास के प्रति प्रतिबद्ध है।
प्रदेश में जहां भी मंदिर जीर्ण-शीर्ण है, उनका जीर्णोद्धार एवं उनकी मरम्मत कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना और मोक्ष कलश के लिए विभाग द्वारा कोई कमी नहीं होगी।
वहीं गोगामेड़ी मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 22 करोड़ रुपए व्यय हो चुके है। 
पुजारियों का बढ़ाया मानदेय
रावत ने कहा कि पुजारियों का मानदेय बढ़ाया गया है। इसमें 1800 से बढ़ाकर 3000 रुपए और 3600 से बढ़ाकर 5000 रुपए किया गया है।
उन्होंने बताया कि पुजारियों की लंबित भर्ती जल्दी ही कर दी जाएगी। हर मन्दिर में पूजा हो यह सुनिश्चित किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत 85 हजार से अधिक वृद्वजनों को तीर्थ यात्रा कराई गई।
देवस्थान विभाग द्वारा राज्य एवं राज्य के बाहर प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी के 390, आत्मनिर्भर श्रेणी के 203 एवं सुपुर्दगी श्रेणी के 343 कुल 936 मंदिर प्रबंधित है।
इनमें राज्य में 857 एवं राज्य से बाहर 79 मंदिर स्थित है।  प्रन्यास के अधीन मंदिर अंतर्गत ये मंदिर राजस्थान सार्वजनिक प्रन्यास अधिनियम 1959 के प्रावधानों के अंतर्गत गठित प्रन्यासों (ट्रस्टों) के अधीन मंदिर है। राज्य में 10090 पंजीकृत प्रन्यास है।

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