कांग्रेस की सदारत पर सवाल: प्रधान चुनाव में जोड़तोड़ से सत्ता बचाने वाले डोटासरा नगरपालिका चुनाव में गच्चा खा गए

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा की सदारत कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं दे रही। अपने गृहक्षेत्र में प्रधान चुनाव में जोड़—तोड़ से सत्ता पाने वाले डोटासरा नगरपालिका चुनाव में अपनी पा​र्टी की हार नहीं बचा पाए हैं।

प्रधान चुनाव में जोड़तोड़ से सत्ता बचाने वाले डोटासरा नगरपालिका चुनाव में गच्चा खा गए

जयपुर | राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा की सदारत कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं दे रही। अपने गृहक्षेत्र में प्रधान चुनाव में जोड़—तोड़ से सत्ता पाने वाले डोटासरा नगरपालिका चुनाव में अपनी पा​र्टी की हार नहीं बचा पाए हैं। ऐसे में उनकी सदारत पर ही सवाल है कि आने वाले चार विधानसभा उप चुनाव में वे अपनी साख बचा पाएंगे या नहीं? ऐसा ही हाल युवा कांग्रेस के सिपहसालार गणेश घोघरा का है। यूथ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र डूंगरपुर में कांग्रेस हार गई है।
दो महीने पहले पंचायत समिति के प्रधान के चुनाव में जोड़तोड़ से लाज बचाने के बाद नगरपालिका चुनाव में भी कांग्रेस को चमत्कार का इंतजार है। दरअसल, दो महीने पहले हुए पंचायत समिति प्रधान के चुनाव में भी कांग्रेस बीजेपी बराबरी पर आए थे लेकिन उस वक्त बीजेपी के एक सदस्य को अयोग्य ठहराने से संख्या बराबर हो गई थी। इसके बाद एक निर्दलीय के सहयोग से लॉटरी के जरिए कांग्रेस जीत पाई।

पंचायत समिति प्रधान चुनाव में बीजेपी के एक सदस्य को अयोग्य ठहराने के बाद बराबरी पर आई थी कांग्रेस, फिर लॉटरी से जीत मिली थी। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को दो महीनों में दूसरा झटका लगा है। प्रदेशाध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र की नगरपालिका में कांग्रेस अपने बूते पर बोर्ड नहीं बना पाई, कांग्रेस को निर्दलियों का समर्थन लेना पड़ेगा। लक्ष्मणगढ़ में नगरपालिका चुनाव में भी कांग्रेस और बीजेपी बराबर पर हैं। 40 वार्ड वाली लक्ष्मणगढ नगरपालिका में कांग्रेस और बीजेपी ने 14-14 वार्ड जीते हैं, 11 वार्डों में निर्दलीय जीते हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र में नगरपालिका बोर्ड किसका बने यह निर्दलीय तय करेंगे।

यूथ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र में भी हारी कांग्रेस
उधर, यूथ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र डूंगरपुर में कांग्रेस हार गई, वहां बीजेपी का बोर्ड बना है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनाव नतीजों की समीक्षा करके सुधार करने की जरूरत है। अगर उनके खुद के इलाकों में ही पूरा बहुमत नहीं मिला तो बाकी नेताओं को कैसे सुधार के लिए कहेंगे?