Sirohi @ वीरवर जेतसिंह बोड़ा बलिदान दिवस: सिरोही में मांडाणी गांव में जेतसिंह बोड़ा के बलिदान स्थल पर क्षत्रिय युवक संघ के बैनर तले मनाया बलिदान दिवस

सिरोही प्रांत के मांडाणी गांव के ओरण में स्थित जेतसिंह जी बोड़ा के बलिदान स्थल पर श्री क्षत्रिय युवक संघ के बैनर तले बलिदान दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत से पूर्व स्वयं सेवकों द्वारा यज्ञ किया गया। स्वयं सेविकाओं द्वारा प्रार्थना "क्षत्रिय कुल में प्रभु जन्म दिया तो..." से की गई।

सिरोही में मांडाणी गांव में जेतसिंह बोड़ा के बलिदान स्थल पर क्षत्रिय युवक संघ के बैनर तले मनाया बलिदान दिवस

मांडाणी (सिरोही)।
सिरोही प्रांत के मांडाणी गांव के ओरण में स्थित जेतसिंह जी बोड़ा के बलिदान स्थल पर श्री क्षत्रिय युवक संघ के बैनर तले बलिदान दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत से पूर्व स्वयं सेवकों द्वारा यज्ञ किया गया। स्वयं सेविकाओं द्वारा प्रार्थना "क्षत्रिय कुल में प्रभु जन्म दिया तो..." से की गई। इसके बाद कार्यक्रम की भूमिका एवं परिचय बताते हुए सह प्रांत प्रमुख अमर सिंह चांदणा ने बताया कि पूज्य तनसिंह द्वारा स्थापित श्री क्षत्रिय युवक संघ के स्थापना के 75 वें वर्ष को हीरक जयंती वर्ष के तहत मनाया जा रहा है। इसमें 75 बड़े कार्यक्रमों की श्रृंखला में सिरोही प्रांत का बड़ा कार्यक्रम जेतसिंह बोड़ा बलिदान दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने जेतसिंह बोड़ा के जीवन परिचय के बारे में जानकारी दी।" कार्यक्रम में जालोर संभाग प्रमुख अर्जुन सिंह देलदरी ने " वो कौम ना मिटने पाएगी" सहगीत करवाया। 
क्षत्रिय जीता है तो संसार के प्राणी मात्र के लिए 
क्षत्रिय युवक संघ के संघ प्रमुख लक्ष्मण सिंह बेन्याकांवास ने संबोधित करते हुए कहा कि क्षत्रिय कभी स्वयं के लिए अपनी जाति के लिए नहीं, अपने समाज के लिए नहीं  अपितु  संसार के प्राणी मात्र के लिए जीता है। रत्नगर्भा क्षत्रिय कुल में ऐसे अनेकों महापुरुष हुए उनमें से ही एक जेतसिंह जी है, जिन्होंने क्षत्रियत्व का परिचय देते हुए गायों के लिए अपना बलिदान दिया। उसी क्षत्रियत्व को जगाने के लिए पूज्य तनसिंह जी द्वारा स्थापित संघ पिछले 75 वर्षों से प्रयासरत है। संघ पूज्य तनसिंह की पीड़ा का साकार रूप है जो कि भारतवर्ष में क्षात्रधर्म का पालन करने वाले क्षत्रिय सामूहिक संस्कारमयी कर्म पद्धति द्वारा निरन्तर रूप से कर रहा है।

कार्यक्रम को गणपत सिंह वेरापुरा, बिशन सिंह कैलाश नगर, गोप सिंह विरोली, दिलिप सिंह मांडाणी, देवेन्द्र कंवर चाँदणा ने भी संबोधित किया। जेतसिंह के वंशज प्रदीप सिंह सियाणा ने ऐसे कार्यक्रम लिए संघ का आभार प्रकट करते हुए कहां कि हमें महापुरूषों को याद करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन गणपत सिंह भंवराणी ने किया। कार्यक्रम में स्थानीय सरपंच भगाराम प्रजापत, अमृत जी पूरोहित, मूल सिंह अन्दौर, बिशन सिंह कैलाशनगर, जनकसिंह सियाणा, राजेन्द्र सिंह नरूका, डॉ उदयसिंह डिंगार, माँगू सिंह बावली, ईश्वर सिंह देलदर, गंगा सिंह कैलाशनगर, देरावर सिंह नारादरा, अमर सिंह सवली सहित बोड़ा पट्टे के एवं आसपास के कई गांवो के लोग उपस्थित रहे।


कौन थे जेत सिंह बोडा...
जेतसिंह जालोर जिले के सियाणा गाँव के बोड़ा चौहान ठाकुर सुजाण सिंह के पुत्र थे। आप पिताजी के स्वर्गवास के बाद विक्रम संवत् 1885 में राजगद्दी पर बिराजे तत्पश्चात् विक्रम संवत् 1891 आसौज वदी चौथ को रायपुरिया गांव जो कि बाकरा गांव की जागिरी का हासिल का हिस्सा था। वहां आपके भाणेज की अवयस्कता का फायदा उठाकर लुटेरे रायपुरीया गाँव की गायों को घेर कर ले भागे। समाचार सुनते ही जेतसिंह अपने बारह गाँव के भाईयों सहित लुटेरों का पीछा करते हुए सेऊडा (सिरोही) के पास नाड़ी पर रोकते है एवं गायों को वापस भेज देते हैंं। जहां युद्ध में उनके दो साथी वीरगति को प्राप्त करते है। लुटेरों की पीछा करते हुए मांडाणी गांव के निकट घोड़े के नीचे आने के बाद धोखे से जेत सिंह पर वार किया जाता है। जहां जेत सिहं भी वीरगति को प्राप्त हो गए। आपके जोड़ायत स्वरूप कंवर जो कि अपने पीहर लोहियाणागढ़ वर्तमान जसवंतपुर थे, उन्हें सत चढ़ जाता है, सियाणा पहुंचकर जेतसिंह को गोदी में लेकर आप सती होती है। तभी से सियाना सहित जालोर सिरोही के कई गाँवों में आप जेतजी दाता के नाम से जाने व पूजे जाते है। बलिदान स्थल मांडाणी में है तो वहीं सियाणा खेतलाजी सहित कई गाँवों में जेतजी दाता की छतरी एवं देवरे है।

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