India में सक्रिय हुआ मानसून: देशभर में मानसून का कहर, कहीं अतिवृष्टि तो कहीं अनावृष्टि से प्रभावित जनजीवन,महाराष्ट्र के जलगांव में बाढ़ के से हालात

देशभर में मानसून से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। कहीं मानसून की अधिक मेहरबानी से लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है, तो कहीं इसी मानसून की बेरूखी के चलते अकाल के से हालात बने हुए हैं। देश महाराष्ट्र राज्य के जलगांव में बाढ़ के से हालात है तो उत्तर प्रदेश, दिल्ली में भी मूसलाधार बारिश से जन जीवन प्रभावित हुआ। मौसम विभाग से

देशभर में मानसून का कहर, कहीं अतिवृष्टि तो कहीं अनावृष्टि से प्रभावित जनजीवन,महाराष्ट्र के जलगांव में बाढ़ के से हालात

नई दिल्ली, एजेंसी।
देशभर में मानसून (Monsoon) से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। कहीं मानसून की अधिक मेहरबानी से लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है, तो कहीं इसी मानसून की बेरूखी के चलते अकाल के से हालात बने हुए हैं। देश महाराष्ट्र (Maharashtra) राज्य के जलगांव (Jalgaon) में बाढ़ के से हालात है तो उत्तर प्रदेश, दिल्ली में भी मूसलाधार बारिश से जन जीवन प्रभावित हुआ। मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र में 750 गांव बाढ़ (Floods) की चपेट में आ गए। वहीं दूसरी ओर 500 मवेशियों के बाढ़ में बह जाने के समाचार आ रहे है।

राज्य में भारी बरसात के चलते घरों में कमर तक पानी भर गया। महाराष्ट्र में बाढ़ से महिला की मौत होने की भी समाचार आए है। बताया जा रहा है कि कई गांव में लोग अब भी फंसे हुए हैं और रेस्क्यू किए जाने का इंतजार किया जा रहा है। एक दिन पूर्व मंगलवार को बारिश के बाद औरंगाबाद-धुले हाईवे (Aurangabad Dhule Highway) पर लैंडस्लाइड हो गई। राजमार्ग पर गाड़ियों की लंबी कतार लग गई। बात देश की राजधानी नई दिल्ली की करें तो यहां बरसात ने पिछले 12 सालों को रिकॉर्ड तोड़ दिया। दिल्ली(Delhi) में बुधवार सुबह 8.30 बजे तक 24 घंटे के अंदर 112 एमएम बारिश हुई। गुजरात के सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात में जोरदार बारिश का दौर जारी है। वलसाड जिले(Valsad District) के उमरगाम और वापी में बारिश परेशानी बन गई है। यहां बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। उमरगाम में 10 घंटे के अंदर 11 इंच बारिश हुई है।

वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर(Gorakhpur in Uttar Pradesh) जिले में भी बाढ़ के हालत बन रहे हैं। आसपास के कई गांव पानी में डूब चुके हैं। नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, इससे डरकर गांव के लोग पलायन कर रहे है। चौरीचौरा, राप्ती रोहा बांध, गोर्रा नदी के महुआकोल बांध, लकड़िहा बांध और बोहवार बांध सहित 11 बांधों में रिसाव शुरू हो गया है। 23 साल पहले 1998 में इतने बुरे हालात बने थे। अब तक 39 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित जगह पर पहुंचाया जा चुका है।

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