स्वर्ण जयंती समारोह: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिम्बायोसिस विश्वविद्यालय, पुणे के स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन किया

सिम्बायोसिस के छात्रों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों को बधाई देते हुए, प्रधान मंत्री ने संस्थान के आदर्श वाक्य 'वसुधैव कुटुम्बकम' का उल्लेख किया और कहा कि विभिन्न देशों के छात्रों के रूप में, यह आधुनिक संस्थान भारत की प्राचीन परंपरा का प्रतिनिधित्व कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिम्बायोसिस विश्वविद्यालय, पुणे के स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन किया

पुणे | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सिम्बायोसिस विश्वविद्यालय, पुणे के स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने सिम्बायोसिस आरोग्य धाम का भी उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्यपाल महाराष्ट्र भगत सिंह कोश्यारी भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर सिम्बायोसिस के छात्रों, शिक्षकों और पूर्व छात्रों को बधाई देते हुए, प्रधान मंत्री ने संस्थान के आदर्श वाक्य 'वसुधैव कुटुम्बकम' का उल्लेख किया और कहा कि विभिन्न देशों के छात्रों के रूप में, यह आधुनिक संस्थान भारत की प्राचीन परंपरा का प्रतिनिधित्व कर रहा है। "ज्ञान दूर-दूर तक फैले, ज्ञान पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में जोड़ने का माध्यम बने, यही हमारी संस्कृति रही है। मुझे खुशी है कि यह परंपरा हमारे देश में अभी भी जीवित है”, उन्होंने कहा।

प्रधान मंत्री ने न्यू इंडिया के विश्वास को रेखांकित किया और उल्लेख किया कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और दुनिया के तीसरे सबसे बड़े स्टार्ट अप इकोसिस्टम को बनाए रखता है। स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे मिशन आपकी आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। आज का भारत नवाचार कर रहा है, सुधार कर रहा है और पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि पुनेकर अच्छी तरह जानते हैं कि भारत ने कैसे कोरोना टीकाकरण के संदर्भ में दुनिया को अपना कौशल दिखाया।

सम्बोधन का मूल पाठ

महाराष्ट्र के गवर्नर भगत सिंह कोशियारी जी, देवेन्द्र फाड़नवीस जी, सुभाष देसाई जी, इस यूनिवर्सिटी के founder president प्रोफेसर एसबी मजूमदार जी, principal director डॉ विद्या येरावदेकर जी, सभी फ़ैकल्टी मेम्बर्स, विशिष्ट अतिथिगण, और मेरे युवा साथियों!

आज आप सरस्वती का धाम वैसी एक तपोभूमि का जिसकी Golden values हैं और golden history है, इसके साथ-साथ एक institution के रूप में symbiosis अपनी golden जुबली के मुकाम तक पहुंचा है। एक संस्थान की इस यात्रा में कितने ही लोगों का योगदान होता है, अनेक लोगों की सामूहिक भागीदारी होती है।

जिन स्टूडेंट्स ने यहाँ से पढ़कर symbiosis के विज़न और वैल्यूज़ को adopt किया, अपनी success से symbiosis को पहचान दी, उन सबका भी इस journey में उतना ही बड़ा योगदान है। मैं इस अवसर पर सभी प्रोफेसर्स को, सभी स्टूडेंट्स को और सभी alumni को ढेरों बधाई देता हूँ। मुझे इसी golden moment पर ‘आरोग्य धाम’ complex के लोकार्पण का अवसर भी मिला है। मैं इस नई शुरुआत के लिए भी पूरी symbiosis family को अनेक-अनेक शुभकामनाएँ देता हूँ।

मेरे युवा साथियों,

आप एक ऐसे institute का हिस्सा हैं जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के भारत के मूल विचार पर निर्मित है। मुझे ये भी बताया गया है कि symbiosis ऐसी यूनिवर्सिटी है जहां ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ पर अलग से एक कोर्स भी है। ज्ञान का व्यापक प्रसार हो, ज्ञान पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में जोड़ने का माध्यम बने, यही हमारी परंपरा है, यही हमारी संस्कृति है, ये हमारे संस्‍कार हैं। मुझे खुशी है कि ये परंपरा हमारे देश में आज भी जीवंत है। मुझे बताया गया है कि अकेले symbiosis में ही दुनिया के 85 देशों से 44 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स यहां पढ़ते हैं, अपने cultures को साझा करते हैं। यानी भारत की प्राचीन विरासत आधुनिक अवतार में आज भी आगे बढ़ रही है।

साथियों,

आज इस संस्थान के छात्र उस generation को represent कर रहे हैं जिसके सामने infinite opportunities हैं। आज हमारा ये देश दुनिया की सबसे बड़ी economies में शामिल है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा hub start-up eco-system आज हमारे देश में है। स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे मिशन आपके aspirations को represent कर रहे हैं। आज का इंडिया innovate कर रहा है, improve कर रहा है, और पूरी दुनिया को influence भी कर रहा है।

आप पुणे में रहने वाले लोग तो और अच्छी तरह जानते हैं कि कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत ने किस तरह पूरी दुनिया के सामने अपना सामर्थ्य दिखाया है। अभी आप लोग यूक्रेन संकट के समय भी देख रहे हैं कि कैसे ऑपरेशन गंगा चलाकर भारत अपने नागरिकों को युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाल रहा है। दुनिया के बड़े-बड़े देशों को ऐसा करने में कई मुसीबतें झेलनी पड़ रही हैं। लेकिन ये भारत का बढ़ता हुआ प्रभाव है कि हम हजारों छात्रों को वहां से अपने वतन वापस ला चुके हैं।

साथियों,

आपकी जेनेरेशन एक तरह से खुशनसीब है कि उसे पहले वाली defensive और dependent psychology का नुकसान नहीं उठाना पड़ा। लेकिन, देश में अगर ये बदलाव आया है तो इसका सबसे पहला क्रेडिट भी आप सभी को जाता है, हमारे युवा को जाता है, हमारे यूथ का ही है। अब आप देखिए, उदाहरण के तौर पर जिन सेक्टर्स में देश पहले अपने पैरों पर आगे बढ़ने के बारे में सोचता भी नहीं था, उन सेक्टर्स में अब हिन्‍दुस्‍तान global leader बनने की राह पर है।

Mobile manufacturing का example हमारे सामने है। कुछ साल पहले तक हमारे लिए mobile manufacturing, और ऐसे ही न जाने कितने electronics का एक ही मतलब था- import करो! दुनिया में चाहे कहीं से ले आओ। Defence sector में हम दशकों से ये मानकर चल रहे थे कि जो दूसरे देश हमें देंगे, हम उसी के भरोसे कुछ कर सकते हैं। लेकिन आज स्थिति भी बदली है, परिस्थिति भी बदले हुये हैं। Mobile manufacturing में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश बनकर उभरा है।

सात साल पहले भारत में सिर्फ 2 मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियां थीं, आज 200 से ज्यादा मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स इस काम में जुटी हैं। डिफेंस में भी दुनिया के सबसे बड़े importer देश की पहचान वाला भारत अब डिफेंस exporter बन रहा है। आज देश में दो बड़े डिफेंस corridor बन रहे हैं, जहां बड़े से बड़े आधुनिक हथियार बनेंगे, देश की रक्षा जरूरतों को पूरा करेंगे।

साथियो,

आज़ादी के 75वें साल में हम एक नए भारत के निर्माण के नए लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस अमृत अभियान का नेतृत्व हमारी युवा पीढ़ी को ही करना है। आज software industry से लेकर Health sector तक, AI और AR से लेकर automobile और EV तक, Quantum Computing से लेकर machine learning तक, हर फील्ड में नए मौके बन रहे हैं। देश में Geo-spatial Systems, Drones से लेकर Semi-conductors और Space technology तक लगातार Reforms हो रहे हैं।

ये Reforms सरकार का record बनाने के लिए  नहीं हैं, ये Reforms आपके लिए अवसर लेकर आए हैं। और ये मैं कह सकता हूं कि Reforms आपके लिए हैं, नौजवानों के लिए हें। आप चाहे technical फील्ड में हो, मैनेजमेंट फील्ड में हों, या मेडिकल फील्ड में, मैं समझता हूं ये जो सारी opportunities पैदा हो रही हैं, वो सिर्फ और सिर्फ आपके लिए हैं।

आज देश में जो सरकार है, वो देश के युवाओं के सामर्थ्य पर, आपके सामर्थ्य पर भरोसा करती है। इसलिए हम एक के बाद एक, अनेक सेक्टर्स को आपके लिए खोलते जा रहे हैं। इन अवसरों का खूब फायदा आप उठाइए, इतंजार मत कीजिए।  आप अपने स्टार्ट-अप्स शुरू करिए, देश की जो चुनौतियां हैं, जो Local समस्याएं हैं, उनके समाधान यूनिवर्सिटीज से निकलने चाहिए। नौजवानों के दिमाग से निकलने चाहिए।

आप ये हमेशा याद रखिए कि आप चाहे जिस किसी फील्ड में हों, जिस तरह आप अपने career के लिए goals set करते हैं, उसी तरह आपके कुछ goals देश के लिए होने चाहिए। अगर आप technical field से हैं, तो आपके innovations, आपका काम कैसे देश के काम आ सकता है, क्या आप कोई ऐसा product develop कर सकते हैं जिससे गाँव के किसान को हेल्प मिले, remote areas में स्टूडेंट्स को कुछ मदद हो सके!

इसी तरह, अगर आप मेडिकल फील्ड में हैं तो हमारे health infrastructure को कैसे मजबूत किया जाए कैसे गांवों में भी quality health services उपलब्ध हों, इसके लिए आप tech friends के साथ मिलकर नए स्टार्टअप्स प्लान कर सकते हैं। आरोग्य धाम जैसे जिस विज़न को symbiosis में शुरू किया गया है, ये भी पूरे देश के लिए एक मॉडल के रूप में काम आ सकता है। और जब मैं आरोग्य की बात कर रहा हूं तो आपसे ये भी कहूंगा कि अपनी फिटनेस का भी ध्यान जरूर रखिएगा। खूब हंसिए, जोक्स मारिए, खूब फिट रहिए और देश को नई ऊंचाई पर लेकर जाइए। हमारे goals जब personal growth से बढ़कर national growth के साथ जुड़ जाते हैं, तो राष्ट्रनिर्माण में स्वयं की भागीदार का एहसास बढ़ जाता है।

साथियों,

आज जब आप अपनी यूनिवर्सिटी के 50 वर्ष के मुकाम को सेलीब्रेट कर रहे हैं, तो मैं Symbiosis Family से कुछ आग्रह करना चाहता हूं। और जो यहां बैठे हुए लोग हैं उनको भी आग्रह करना चाहता हूं। क्‍या Symbiosis में हम एक परम्‍परा विकसित कर सकते हैं क्‍या कि हर वर्ष किसी एक थीम के लिए dedicate किया जाए और यहां जो भी लोग हैं, किसी भी फील्‍ड में होंगे, वे एक साल अपने बाकी कामों के उपरांत इस एक थीम के लिए उनका कोई न कोई dedication, योगदान, भागीदारी, imitative होना चाहिए। अभी से मानो तय करें, इधर गोल्‍डन जुबली मना हरे हैं तो next five years, पांच साल, 2022 का थीम कौन सा होगा, 2023 का थीम कौन सा होगा, 2027 का थीम कौन सा होगा, क्‍या अभी से हम तय कर सकते हैं?

अब जैसे एक Theme मैं बताता हूं, जरूरी नहीं कि इसी थीम पर चलना चाहिए, आपकी अपनी योजना से बनाइए। लेकिन मान लीजिए, सोच लीजिए कि ग्‍लोबल वार्मिंग- ये विषय ले लिया। 2022- पूरा ये हमारा परिवार ग्‍लोबल वार्मिंग के हर पहलू, उसी का अध्‍ययन करे, उसी पर रिसर्च करे, उसी पर सेमीनार करे, उसी पर कार्टून बनाए, उसी पर कथाएं लिखे, उसी पर कविताएं लिखे, उसी पर कोई equipment manufacture करे। यानी बाकी सब करते-करते एक अतिरिक्‍त  काम ये थीम ले लें। लोगों को भी जागरूक करे।

उसी प्रकार से जो हमारे कोस्टल एरियाज हैं या फिर समुद्र पर क्लाइमेट चेंज के प्रभाव पर भी हम लोग काम कर सकते हैं। ऐसे ही एक Theme हो सकती है कि हमारे बॉर्डर एरियाज के विकास के लिए। जो हमारे आखिरी गांव हैं, जो हमारी सीमा की सुरक्षा में सेना के साथ कंधे से कंधा मिला करके जी-जान से जुटे रहते हैं। एक प्रकार से पीढ़ी-दर-पीढ़ी वो हमारे देश के रक्षक हैं। क्‍या हम यूनिवर्सिटीज के द्वारा, हमारे परिवार में हमारे बॉर्डर डेवलपमेंट का प्‍लान क्‍या हो सकता है, इसके लिए यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स उस इलाके का टूर करें, वहां के लोगों की दिक्कतें समझें और फिर यहां आ करके बैठ करके चर्चा करें, समाधान खोज कर निकालें।

आपकी यूनिवर्सिटी एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना को मजबूत करने के लिए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का वह सपना भी साकार तब होता है जब एक भारत श्रेष्‍ठ भारत का सपना साकार होता है। यूनिवर्सिटी में आए एक क्षेत्र के छात्र, दूसरे क्षेत्र की भाषाओं के भी कुछ शब्द सीखें, तो और भी बेहतर होगा। आप लोग लक्ष्य रख सकते हैं कि जब Symbiosis का छात्र जब यहां से पढ़कर निकलेगा तो मराठी समेत भारत की 5 अन्य भाषाओं के कम से कम 100 शब्‍द उसको पक्‍के याद होंगे और जीवन में उसकी उपयोगिता उसको पता होगी।

हमारी आजादी के आंदोलन का इतिहास इतना समृद्ध है। इस इतिहास के किसी पहलू को आप डिजिटल करने का काम भी कर सकते हैं। देश के युवाओं में NSS, NCC की तरह हम किस तरह और नई Activities को बढ़ावा दे सकते हैं, इस पर भी ये पूरा परिवार मिल करके काम कर सकता है। जैसे Water Security का विषय हो, Agriculture को टेक्‍नोलॉजी से जोड़ने का विषय हो, Soil Health Testing से लेकर Food Products की Storage और Natural Farming तक, आपके पास रिसर्च से लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए, बहुत से Topic हैं।

ये Topic क्या होंगे, इसका निर्णय मैं आप पर ही छोड़ता हूं। लेकिन ये जरूर कहूंगा कि देश की आवश्यकताओं को, देश की समस्याओं के समाधान को आप अपने उन विषयों को चुनिए ताकि हम सारे नौजवान, सारे यंग माइंड मिल करके, इतना बड़ा इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर है, व्‍यवस्‍था है, हम कुछ न कुछ solution दे दें इसको। और मैं आपको निमंत्रण दे रहा हूं कि आप अपने सुझावों और अनुभवों को सरकार से भी साझा करिएगा। इन Themes पर काम करने के बाद आप अपनी रिसर्च, आपके रिजल्ट, आपके Ideas, आपके सुझाव, प्रधानमंत्री कार्यालय को भी भेज सकते हैं।

मुझे विश्वास है कि जब यहां के प्रोफेसर्स, यहां की फेकल्टी, यहां के छात्र मिलकर इस अभियान का हिस्सा बनेंगे, तो बहुत अद्भुत नतीजे मिलेंगे। आप कल्‍पना कीजिए आप आप 50 साल मना रहे हैं, जब 75 साल मनाएंगे, और 25 साल में देश के लिए 25 थीम पर 50-50 हजार माइंडों ने काम किया हो, कितना बड़ा सम्‍पुट आप देश को देंगे। और मैं समझता हूं, इसका बहुत बड़ा फायदा, Symbiosis के Students को ही होगा।

आखिरी में, मैं Symbiosis के Students को एक और बात कहना चाहता हूं।इस संस्थान में रहते हुए आपको अपने प्रोफेसर्स से, टीचर्स से, अपने साथियों से बहुत कुछ सीखने को मिला होगा। मेरा आपको सुझाव है कि self-awareness, innovation और Risk taking Ability को हमेशा मजबूत बनाए रखिएगा। मैं आशा करता हूँ, आप सब इसी भावना के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ेंगे। और मुझे विश्‍वास है कि 50 साल की आपके पास एक ऐसी पूंजी है, अनुभव की पूंजी है। अनेक experiment करते-करते आप यहां पहुंचे हैं। एक खजाना है आपके पास। ये खजाना भी देश के काम आएगा। आप फलें-फूलें और यहां पर आने वाला हर बच्‍चा अपना उज्‍ज्‍वल भविष्‍य बनाने के लिए आत्‍मविश्‍वास के साथ निकल पड़े। यही मेरी आपको शुभकामनाएं हैं।

मैं फिर एक बार आपका धन्‍यवाद इसलिए भी करूंगा कि मुझे आपके बीच आने के लिए कई अवसर मिलते रहते हैं, लेकिन आ नहीं पाता हूं। मैं मुख्‍यमंत्री था तो एक बार जरूर पहुंच गया था आपके बीच। आज फिर इस पवित्र धरती पर आने का मौका मिला है। मैं आप सबका बहुत आभारी हूं कि मुझे इस नई पीढ़ी के साथ रूबरू होने का अवसर दिया।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद, बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

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