नवरात्रि विशेष : देश के अनेक हिस्सों में मां दुर्गा की मूर्ति बनाने केलिए इस्तेमाल होती है वेश्याओं के घर की मिट्टी, इसकी वजह खास है।

देश के अनेक हिस्सों में मां दुर्गा की मूर्ति बनाने केलिए इस्तेमाल होती है वेश्याओं के घर की मिट्टी, इसकी वजह खास है। वेश्याओं के आंगन की मिट्टी के बिना मां दुर्गा की मूर्ति को पूर्ण भी नहीं माना जाता।

देश के अनेक हिस्सों में मां दुर्गा की मूर्ति बनाने केलिए इस्तेमाल होती है वेश्याओं के घर की मिट्टी, इसकी वजह खास है।
देश के अनेक हिस्सों में मां दुर्गा की मूर्ति बनाने केलिए इस्तेमाल होती है वेश्याओं के घर की मिट्टी

नई दिल्ली । नवरात्रि के अवसर पर की जाने वाली दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की मूर्ति बनाने के लिए खासतौर पर वेश्याओं के आंगन की मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है।

वेश्याओं के आंगन की मिट्टी के बिना मूर्ति पूर्ण भी नहीं मानी जाती है, इसकी बहुत ही खास वजह है।

ज्ञात हो कि देश के कुछ खास हिस्सों में विशेषकर उत्तर भारत और उत्तर पूर्व के भारत में नवरात्रि का पावन पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।

इन Navratri Utsav में मां दुर्गा की पूजा होती है,  इसलिए इस पर्व या उत्सव को दुर्गोसत्व या दुर्गा पूजा भी कहते हैं। इस साल नवरात्रि महोत्सव की शुरुआत 15 अक्टूबर 2023 से होने जा रही है।

दुर्गा पूजा शुरू होने से काफी पहले, मां दुर्गा की मूर्ति का निर्माण कार्य शुरू हो जाता है।।देशभर में जगह जगह कई पूजा केलिए पंडाल बनाए जाते हैं और मां दुर्गा की मिट्टी की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है।

पाठकों को जानकार हैरानी होगी कि मां दुर्गा की मूर्ति के बनाने के लिए वेश्याओं की आंगन की मिट्टी का इस्तेमाल परंपरा से किया जाता रहा है। वेश्याओं के आंगन की मिट्टी के बिना मां दुर्गा की मूर्ति को पूर्ण भी नहीं माना जाता।

मां दुर्गा की मूर्ति अथवा प्रतिमा को तैयार करने के लिए गंगा की मिट्टी, गोमूत्र, गोबर और वेश्यालय की मिट्टी की आवश्यकता रहती है। मूर्ति बनाने में इन वस्तुओं के इस्तेमाल करने की परंपरा बहुत पुरानी है। 

क्यों वेश्याओं आंगन की मिट्टी से बनती है मां दुर्गा की प्रतिमा -

एक कथा के अनुसार एक बार कुछ वेश्याएं गंगा घाट पर स्नान के लिए जा रही थी। उन्होंने गंगा जी के घाट पर एक कुष्ठ रोगी को बैठे हुए देखा जो लोगों से गंगा स्नान करवाने के लिए मिन्नतें कर रहा था। लेकिन कोई भी उसकी तरफ ध्यान नहीं दे रहा था।

वेश्याओं ने उस कुष्ठ रोगी को गंगा स्नान करवाया। वह कुष्ठ रोगी और कोई नहीं बल्कि भगवान शिव ही थे। भगवान शिव वेश्याओं से प्रसन्न हुए और वरदान मांगने को कहा।

तब वेश्याओं ने कहा कि प्रभु हमारे आंगन की मिट्टी के बिना मां दुर्गा प्रतिमा ना बन पाए। भगवान शिव वेश्याओं को यही वरदान दिया तब से यह परंपरा चली आ रही है। यह प्राचीन पौराणिक कथा अनेक जगह पढ़ने में आती है।

इस कार्य हेतु अनेक जगह मंदिर के पुजारी वेश्याओं से उनके आंगन की मिट्टी मांगकर लाते थे और मांगी हुई मिट्टी को मिलाकर मां दुर्गा की मूर्ति बनाई जाती थी।

यह प्राचीन परंपरा आज भी चल रही है। वैसे वेश्याओं के आंगन की मिट्टी से बनने वाली मूर्तियों के बारे में अनेकों मान्यता व किस्से है।

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