आजादी का अमृत महोत्सव: आजादी के अमृत महोत्सव के तहत राजधानी के रवींद्र मंच पर सांस्कृतिक समारोह आयोजित, कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ कल्ला ने किया शुभारंभ

कला, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने देश के अमर शहीदों की कुर्बानियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों के अथक संघर्ष से मिली आज़ादी की रक्षा करते हुए देश की एकता और अखण्डता का अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया है।

आजादी के अमृत महोत्सव के तहत राजधानी के रवींद्र मंच पर सांस्कृतिक समारोह आयोजित, कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ कल्ला ने किया शुभारंभ

जयपुर।
कला, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने देश के अमर शहीदों की कुर्बानियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों के अथक संघर्ष से मिली आज़ादी की रक्षा करते हुए देश की एकता और अखण्डता का अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया है। डॉ. कल्ला रविवार को रवीन्द्र रंगमंच पर कला, साहित्य एवं संस्कृति विभाग तथा रवीन्द्र मंच सोसाईटी की ओर से देश की आज़ादी के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ’आजादी का अमृत महोत्सव’ के सिलसिले में आयोजित कार्यक्रमों के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे। कला, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि हमें भाषा, जाति, मजहब और प्रांतीयता के नाम पर देश को कमजोर करने वाली ताकतों से सावधान रहते हुए देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने के ध्येय से काम करना है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अमर शहीदों भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और अशफाक उल्ला खान के बलिदान को याद करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के नेतृत्व आजादी के आंदोलन में नेहरू खानदान की तीन पीढ़ियों मोतीलाल नेहरू, पं. जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी एक साथ जेल में रहे। इसी प्रकार पूरे देश में कई पीढ़ियों ने एक साथ जेल में यातनाएं सहकर देश को स्वतंत्र कराने में अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा आजादी का अमृत महोत्सव ऎसे स्वतंत्रता सेनानियों और अमर शहीदों के बलिदान को याद करते हुए हम सभी के लिए उनके जज्बे से देश के लिए कुछ कर गुजरने की सीख लेने का अवसर है। डॉ. कल्ला ने रवीन्द्र मंच सोसाईटी द्वारा कोरोनाकाल में भी वर्चुअल माध्यम से कला एवं संस्कृति की गतिविधियों को जारी रखने के प्रयासों की सराहना करते हुए रविवार को अभिषेक मुद्गल के निर्देशन में प्रस्तुत नाटक ’बलिदान’ एवं अनिता प्रधान के निर्देशन में प्रस्तुत ’गीत आज़ादी के’ के कलाकारों को शानदार प्रस्तुतियों  के लिए बधाई दी।
मुख्य अतिथि डॉ. कल्ला, आयोजना विभाग के शासन सचिव नवीन जैन, तथा डायरेक्टर पुरातत्व प्रकाश चन्द्र शर्मा द्वारा महात्मा गांधी की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। स्वागत उद्बोधन में रवींद्र मंच प्रबंधक शिप्रा शर्मा ने बताया कि रवींद्र मंच सोसाईटी द्वारा कलाकारों के लिए अधिकाधिक कार्यक्रम, वर्कशॉप इत्यादि आयोजित किए जाएंगे। अनिता प्रधान द्वारा निर्देशित देशभक्ति गीतों पर कार्यक्रम की शुरूआत राजस्थान विश्वविद्यालय के युवा छात्र-छात्राओं के द्वारा ओजस्वी स्वर में आज़ादी के गीतों के साथ की गई। जिसमें राजस्थानी भाषा के गीतों, ’धरती धोरां की’, जय जय राजस्थान’ और ’मायड़ थारो बो पूत कठै, महाराणा प्रताप कठै... जैसे गीतों का समावेश किया गया। युवा छात्र-छात्राओं की दमदार संगीत एवं धुनों ने रवींद्र मंच सभागार में मौजूद सभी लोगों में देशभक्ति का जज्बा जगाते हुए जोशपूर्ण माहौल पैदा किया। इस कार्यक्रम में रागिनी, आरोही, त्रिवेणी, दीपांशा, रणजीत, वरूण, निखिल, महेश, मोहित, शिवकुमार ने गायन एवं तबले पर अनुपम शर्मा, ढोलक पर फतेह फारसी, की-बोर्ड पर आदित्य सिंह, हारमोनियम पर मधुर आदि ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।


इसके साथ ही राजस्थान के लोकनाट्य कार्यक्रम में लेखक अर्जुनदेव चारण द्वारा लिखित एवं राजस्थान के स्वतंत्रता सेनानी एवं कवि  केसरी सिंह बारहठ के जीवन से प्रेरित राजस्थानी भाषा के नाटक ’बलिदान’ का दमदार मंचन किया गया। रंग मस्ताने संस्था के द्वारा प्रस्तुत नाटक का निर्देशन जयपुर के रंगकर्मी अभिषेक मुद्गल के द्वारा किया गया। इस नाटक के माध्यम से केसरी सिंह बारहठ के बलिदानों को बताया गया हैं कि किस प्रकार उन्होने अपने छोटे भाई जोरावर सिंह, बेटे प्रताप सिंह एवं दामाद ईश्वरदास को आज़ादी की लडाई में बलिदान कर लिया। इसमें यह भी बताया गया है कि केसरी सिंह बारहठ ने अपनी ’चेतावनी रा चुंगट्या’ कविता के माध्यम से उदयपुर के महाराणा फतेह सिंह को अंग्रेजों के दरबार में जाने से रोक दिया था। नाटक के माध्यम से यह भी संदेश दिया गया हैं कि अप्रत्यक्ष रूप से स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वालों को भी याद किया जाना चाहिए। नाटक का निर्देशन अभिषेक मुद्गल के द्वारा किया गया जिसमें नवीन शर्मा, निपुण माथुर, गिरीश यादव, गरिमा सिंह, सारिका राठौड, प्रांजल उपाध्याय, स्मृति भारद्वाज, सुधांशु शुक्ला, साहिल, अंकित अद्विक, खालिद खान, जय भोजवानी ने अपने अभिनय से सभागार में मौजूद दर्शकों की दाद हासिल की। नाटक की वेशभूषा में गरिमा सिंह, मंच सज्जा में गिरीश यादव एवं मारवाड़ी भाषा प्रशिक्षण में आशीष चारण की प्रमुख भूमिका रही। गायन एवं हारमोनियम पर मोहित कुमार एवं अमित चौधरी, बांसुरी एवं ढपली पर रमन आचार्य ने संगत की। संगीत जितेन्द्र शर्मा के द्वारा तैयार किया गया।

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