विवादों में संत: श्रीपतिधाम के संत पर नंदगांव से लाखों रुपए व जेवरात चुराने का आरोप, न्यायालय के आदेश पर दो संत, ट्रस्टी व अन्य के खिलाफ परिवाद दर्ज

परिवादी सुमन सुलभ महाराज ने परिवाद पेश करते हुए आरोप लगाया कि गोविंदवल्लभदास व विठ्ठलकृष्ण के गलत कार्यों की उन्हें जानकारी है इसलिए वे लोग उनको रास्ते से हटाना चाहते है। इनके ऑडियो-वीडियो व अन्य सबूत भी उनके पास है इसलिए वे लोग उन सबूतों को नष्ट करने की धमकी देते हैं।

श्रीपतिधाम के संत पर नंदगांव से लाखों रुपए व जेवरात चुराने का आरोप, न्यायालय के आदेश पर दो संत, ट्रस्टी व अन्य के खिलाफ परिवाद दर्ज
श्रीपतिधाम के संत पर नंदगांव से लाखों रुपए व जेवरात चुराने का आरोप

सात माह तक पुलिस के चक्कर काटते रहे पर मामला दर्ज नहीं हुआ। अब न्यायालय के आदेश पर दो संत, ट्रस्टी व अन्य के खिलाफ परिवाद दर्ज।

सिरोही। रेवदर तहसील के नंदगांव में संचालित मनोरमा गोलोक तीर्थ पर कब्जा करने एवं कमरों के ताले तोडक़र लाखों रुपए की नकदी, जेवरात व सामान चुरा ले जाने का आरोप लगाया गया है। नंदगांव के संत ने इस सम्बंध में अन्य संत व संस्था के ट्रस्टी समेत कई लोगों के खिलाफ परिवाद दिया है।

संत का आरोप है कि पुलिस व राजनीतिक रसूखात के कारण सात माह तक पुलिस ने मामला ही दर्ज नहीं किया। अब न्यायालय के आदेश पर परिवाद दर्ज किया गया है। मामला गत वर्ष जून-जुलाई माह का बताया जा रहा है।

नंदगांव के सुमन सुलभ ब्रह्मचारी महाराज ने राजपुरा के समीप श्रीपतिधाम नंदनवन के गोविंदवल्लभ दास उर्फ हेमराज प्रजापत (मेड़ा जागीर-सांचौर), नानरवाड़ा (पिण्डवाड़ा) निवासी संस्था ट्रस्टी ब्रह्मदत्त पुरोहित, गोधाम पथमेड़ा के विठ्ठलकृष्ण उर्फ  दिलीप रामजीराम विठ्ठला (बिच्छावाड़ी-सांचौर) समेत अन्य 30-35 लोगों के खिलाफ परिवाद पेश किया है।

परिवादी ने बताया कि इस सम्बन्ध में 27 जुलाई 2023 को  पुलिस अधीक्षक सिरोही व थानाधिकारी रेवदर को रिपोर्ट पेश की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।  

पुलिस जाब्ता लगाकर नंदगांव में प्रवेश रोका -
परिवादी सुमन सुलभ ने बताया घटना के समय जयपुर थे। उस समय उनके मोबाइल पर वाट्सएप मैसेज आया, जिसमें गोभक्तों को सम्बोधित करते हुए लिखा हुआ था। उसमे उनपर अनर्गल बहुत सारे आरोप लगाए गए थे एवं नन्दगांव परिसर में उनका प्रवेश निषेध करने का लिखा था। थोड़ी देर बाद उनको पुलिस के माध्यम से सूचना मिली कि वे नंदगांव में प्रवेश न हो सके लिए वहां पुलिस जाब्ता लगा दिया है।

घटना के बाद वे रात में ट्रेन से जयपुर से आबूरोड आए तथा वहां पहुंचकर पुलिस अधिकारियों से बात की तथा नन्दगांव आने की बात कही। इस पर उनको वहां आने का मना किया तथा बताया कि आपका यहां आना उचित  नहीं रहेगा ये लोग झगड़ा कर सकते है। दूसरे दिन सूचना मिली कि गोविन्दवल्लभ दास व ब्रह्मदत्त पुरोहित ने उनके दोनों कमरों के व मन्दिर का ताला तोड़ पूरा सामान ले लिया है।

राजनीतिक दबाव से पुलिस लगाई और सामान चुराया -
परिवाद में आरोप लगाया कि गोविन्दवल्लभ दास व ब्रह्मदत्त पुरोहित ने उनके कमरों में हाथ से लिखी हुई तीन डायरियां, एक कीमती माला, जिसमें नवरतन, हीरा पन्ना व मोती डाले हुए थे। जो करीब ढाई लाख का था, एक नम्बर रुद्राक्ष वाली पांच सौ माला, एक सोने की अंगूठी, जिसमें पुखराज लगा हुआ था, चांदी के बर्तन, दो किलो चंदन लकड़ी, दो रिकॉर्डर, एक कैमरा, एक 32 इंच की एलईडी टीवी, केसीओ, एक मिक्चर, हजारों रुपए मूल्य का कोट, स्वेटर, चूल्हा, रसोई का पूरा सामान, वाइब्रेशन मशीन,  अटैची, पांच लाख रुपए नकदी, पूजा सामग्री समेत काफी सामान इन दोनों ने व साथ आए लोगों ने चोरी कर ले लिया।

आरोप लगाया कि इन लोगों ने मिलकर षडय़ंत्र किया तथा बैठक के बहाने जयपुर में धोखे में रखा और पीछे राजनीतिक दबाव डालकर नंदगांव में पुलिस बल तैनात कर दिया। इसके बाद उनके कार्यालय और निवास के ताले तोड़ कर सामान चुरा लिया।

इसलिए रास्ते से हटाना चाहते हैं -
परिवादी सुमन सुलभ महाराज ने परिवाद पेश करते हुए आरोप लगाया कि गोविंदवल्लभदास व विठ्ठलकृष्ण के गलत कार्यों की उन्हें जानकारी है इसलिए वे लोग उनको रास्ते से हटाना चाहते है। इनके ऑडियो-वीडियो व अन्य सबूत भी उनके पास है इसलिए वे लोग उन सबूतों को नष्ट करने की धमकी देते हैं।

इस सम्बंध में गोधाम के संस्थापक महाराज को भी सबूतों के साथ पत्र लिखकर दिया था, जिसकी जांच होनी चाहिए। ये लोग वर्तमान में राजनीतिक रूप से भी बहुत प्रभावशाली व्यक्ति है।

आरोप लगाया कि संस्था के बड़े व्यक्तियों का इन पर वरदहस्त है। पुलिस-प्रशासन व राजनीतिक ताकत होने से ये लोग उनके विरुद्ध झूठे मुकदमे से लेकर हत्या तक कुछ भी कर सकते हैं।  

सबको भगाकर तीर्थ पर कब्जा कर लिया -
परिवाद में बताया कि 30 जून 2023 को परिवादी सुमन सुलभ महाराज जयपुर थे। उस समय दिन में गोविंदवल्लभ दास व  ट्रस्टी ब्रह्मदत्त पुरोहित 30-35 लोगों के साथ नंदनवन आए तथा धमाल  मचाया। कहने लगे कि सुमन सुलभ कहां हैं उसे खत्म करना है।

धर्माचार्य आश्रम में उनके पास पढऩे व रहने वाले सभी 22 विद्यार्थियों व अन्य 17 जनों को संस्था से निकाल दिया। उनके पास रहते हुए अध्ययन कर रहे बाड़मेर के दो युवकों को भी शाम को भगा दिया।

गोलोक तीर्थ में परिवार के साथ काम करने वाले पांच जनों को भी निकाल दिया गया। इसके बाद गोविन्दवल्लभ दास, ब्रह्मदत्त पुरोहित ने अपने साथ लाए प्रभावशाली लोगों से मिलकर षडयंत्रपूर्वक गोलोक तीर्थ नंदगांव पर कब्जा कर लिया।  
अच्छी सेवा के कारण दस वर्ष पहले नंदगांव आए थे -
परिवादी ने बताया कि युवावस्था में ही उन्होंने 1996 में घर-बार छोड़ दिया था एवं गुरु दत्तात्रेय महाराज की सेवा में गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा आ गए थे। उनके आशीर्वाद से वर्ष 2003-04 तक सेवाएं दी थी।

उसके बाद गोमाता की अच्छी सेवा देखकर वर्ष 2003-04 में नन्दगांव (रेवदर-सिरोही) भेज दिया था। वे पूर्णकालिक गोसेवक हैं तथा अपना जीवन गोसेवा में समर्पित किया है। नन्दगांव के निर्माण में सौ फीसदी उनका योगदान रहा है। संस्था में उनके पास तीन कमरे हंै।

धर्माचार्य कमरा नम्बर 7 में पूजा का मंदिर है। कमरा नंबर 8 में व चिकित्सालय में कमरा नंबर 28 में वे निवासी करते हैं, जहां उनका सामान रहता है। किसी कार्य से बाहर जाने पर वे ताला लगाकर जाते हैं। दोनों कमरों व पूजा के मंदिर की चाबी उनके पास रहती है।

इस कारण षडय़ंत्र रचने का लगाया आरोप -
परिवाद में बताया कि मनोरमा गोलोक तीर्थ नन्दगांव की स्थापना गोधाम पथमेड़ा संस्थान के सहयोग से ही उन्होंने की है तथा अध्यक्ष, संचालक व कोषाध्यक्ष के पद पर रहकर सेवाएं दी है। अभी गोलोक तीर्थ नन्दगाव में दस हजार के लगभग गोमाता हैं। तीन हजार बीघा से अधिक भूमि है, उनके द्वारा खरीद की हुई है।

इसके अलावा आश्रम में बच्चे भी पढ़ते है। वे पिछले 27 वर्ष से गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा व मनोरमा गोलोकतीर्थ नन्दगाव में सेवाएं दे रहे हैं। नंदगाव की बेहतरीन सेवाओं और गोमाता की खुशहाली को देखते हुए गोभक्तों में संस्थान की कीर्ति फैल रही है।

तीर्थ में तीन हजार बीघा से अधिक भूमि होने से एवं उनकी उपलब्धि व यश-कीर्ति को देखकर संस्थान के पूर्व सेवारत गोविन्दवल्लभ दास, विठ्ठलकृष्ण ने उनको हटाने के लिए षडय़ंत्र रचा तथा संस्था के ट्रस्टियों को झूठी शिकायत कर मुझे गोलोकतीर्थ धाम नन्दगांव के संचालक व कोषाध्यक्ष के पद से हटा दिया। जिसकी मुझे जानकारी तक नहीं दी गई थी। ये दोनों संस्था के बड़े शक्तिशाली व्यक्ति के निजी सेवादार होने से बहुत प्रभावशाली है।

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