कोरोना संक्रमण बच्चों में : विदेशों में कोरोना संक्रमण वयस्कों की तुलना में बच्चों में फैल रहा है अधिक

अमेरिका में वैसे कोरोना संक्रमण के मामले गिरावट की ओर हैं, मगर अप्रेल की शुरुआत में वहां बच्चों में संक्रमण के मामले वयस्कों की तुलना में ज्यादा देखे गए। इसने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

विदेशों में कोरोना संक्रमण वयस्कों की तुलना में बच्चों में फैल रहा है अधिक

नई दिल्ली। 
अमेरिका (America) में वैसे कोरोना संक्रमण के मामले गिरावट की ओर हैं, मगर अप्रेल की शुरुआत में वहां बच्चों (Children) में संक्रमण के मामले वयस्कों की तुलना में ज्यादा देखे गए। इसने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Center for Disease Control and Prevention) के मुताबिक, अप्रेल की शुरुआत में छोटे बच्चों से लेकर 12 साल तक की उम्र के बच्चों में कोरोना के मामले 65 या उससे ऊपर के वयस्कों की तुलना में बढ़ गए। ऐसे में विशेषज्ञों को आशंका है कि कोरोना के वेरियंट युवाओं को नए-नए तरीके से प्रभावित कर रहे हैं। इसमें सूजन (swelling) पैदा करने वाली बीमारी भी शामिल है जो कोरोना से ही जोडक़र देखी जा रही है। बॉस्टन चिल्ड्रंस हॉस्पिटल ( Boston Children's Hospital) की क्रिटिकल केयर डॉक्टर एड्रीन रैंडॉल्फ (Doctor Adrien Randolph) के अनुसार अकेले फरवरी में बच्चों में मल्टी सिस्टम इन्फ्लेमेट्री सिंड्रोम के दो हजार से ज्यादा मामले देखे गए, जो अप्रेल में बढक़र तीन हजार के भी पार चले गए। अमूमन कोरोना से ठीक होने के एक महीने बाद बच्चों के शरीर के दिल, दिमाग, फेफड़े या आंतें में सूजन पैदा हो जाती है। इसमें पेटदर्द से लेकर पेचिस जैसे लक्षण भी उभर सकते हैं। ये आमतौर पर एक से 14 साल के बच्चों में देखी गई है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि बच्चों की एक पूरी आबादी अभी बिना किसी वैक्सीन के है। रैंडॉल्फ कहती हैं कि सूजन की यह बीमारी ऐसे बच्चों में ज्यादा देखी जा रही है जो दिखने में स्वस्थ हैं और उनमें लक्षण भी नहीं हैं।

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